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Una News: भूमि रिकॉर्ड निकालने की फीस में 10 रुपये बढ़ोतरी से जनता नाराज
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एक पृष्ठ फर्द निकालने पर देने होंगे 21 रुपये, पहले लगते थे 11 रुपये
डिजिटल इंडिया के दौर में ज़मीन से जुड़े दस्तावेजों को सस्ता और सुगम बनाया जाए
संवाद न्यूज एजेंसी
नंदपुर (ऊना)। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से भूमि दस्तावेजों की प्रतियों के शुल्क में की गई बढ़ोतरी से आम जनता नाराज है। उपमंडल अंब सहित पूरे प्रदेश में अब जमीन से संबंधित दस्तावेज़ जैसे खसरा, खतौनी या फर्द निकालने पर प्रति पृष्ठ 21 रुपये देने होंगे। पहले यह शुल्क केवल 11 रुपये था। लोकमित्र केंद्रों पर प्रति पृष्ठ 10 रुपये शुल्क और एक रुपये सेवा शुल्क लिया जाता था। अब इसमें संशोधन करते हुए 17 रुपये प्रति पृष्ठ, तीन रुपये जीएसटी और एक रुपये सेवा शुल्क लिया जा रहा है। कुल मिलाकर 21 रुपये प्रति पृष्ठ का भुगतान करना होगा। लोगों का कहना है कि पहले जमीन खरीद में लाखों रुपये देने पड़ते हैं और फिर दस्तावेज बनवाने में अलग। यह सरासर गलत है।
अंब निवासी राजेश शर्मा का कहना है कि पहले मेहनत करके ज़मीन खरीदो, फिर उसकी रजिस्ट्रेशन पर सरकार को मोटा शुल्क दो। अब अगर आपको उस ज़मीन की कोई जानकारी या दस्तावेज़ चाहिए तो उसकी प्रति पर भी दोगुना पैसा देना पड़ेगा। यह आम आदमी के साथ सीधी नाइंसाफी है।
पोलियां गांव के निवासी राजीव कुमार ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की। कहा कि सरकार को चाहिए कि डिजिटल इंडिया के दौर में ज़मीन से जुड़े दस्तावेजों को सस्ता और सुगम बनाया जाए। इसके विपरीत बोझ बढ़ाया जा रहा है। हर बार आम नागरिक को ही क्यों कीमत चुकानी पड़े। जनता की मांग है कि राज्य सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करे और शुल्क वृद्धि को वापस लिया जाए। लोगों का कहना है कि सरकारी सेवाओं का डिजिटाइजेशन तब सार्थक होगा जब आम जन को इसका लाभ सुलभ और सस्ता मिलेगा।
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डिजिटल इंडिया के दौर में ज़मीन से जुड़े दस्तावेजों को सस्ता और सुगम बनाया जाए
संवाद न्यूज एजेंसी
नंदपुर (ऊना)। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से भूमि दस्तावेजों की प्रतियों के शुल्क में की गई बढ़ोतरी से आम जनता नाराज है। उपमंडल अंब सहित पूरे प्रदेश में अब जमीन से संबंधित दस्तावेज़ जैसे खसरा, खतौनी या फर्द निकालने पर प्रति पृष्ठ 21 रुपये देने होंगे। पहले यह शुल्क केवल 11 रुपये था। लोकमित्र केंद्रों पर प्रति पृष्ठ 10 रुपये शुल्क और एक रुपये सेवा शुल्क लिया जाता था। अब इसमें संशोधन करते हुए 17 रुपये प्रति पृष्ठ, तीन रुपये जीएसटी और एक रुपये सेवा शुल्क लिया जा रहा है। कुल मिलाकर 21 रुपये प्रति पृष्ठ का भुगतान करना होगा। लोगों का कहना है कि पहले जमीन खरीद में लाखों रुपये देने पड़ते हैं और फिर दस्तावेज बनवाने में अलग। यह सरासर गलत है।
अंब निवासी राजेश शर्मा का कहना है कि पहले मेहनत करके ज़मीन खरीदो, फिर उसकी रजिस्ट्रेशन पर सरकार को मोटा शुल्क दो। अब अगर आपको उस ज़मीन की कोई जानकारी या दस्तावेज़ चाहिए तो उसकी प्रति पर भी दोगुना पैसा देना पड़ेगा। यह आम आदमी के साथ सीधी नाइंसाफी है।
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पोलियां गांव के निवासी राजीव कुमार ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की। कहा कि सरकार को चाहिए कि डिजिटल इंडिया के दौर में ज़मीन से जुड़े दस्तावेजों को सस्ता और सुगम बनाया जाए। इसके विपरीत बोझ बढ़ाया जा रहा है। हर बार आम नागरिक को ही क्यों कीमत चुकानी पड़े। जनता की मांग है कि राज्य सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करे और शुल्क वृद्धि को वापस लिया जाए। लोगों का कहना है कि सरकारी सेवाओं का डिजिटाइजेशन तब सार्थक होगा जब आम जन को इसका लाभ सुलभ और सस्ता मिलेगा।
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