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बाजारों में मंदी, दुकानदारों का धंधा चौपट
ब्यूरो/अमर उजाला/थानाकलां
Updated Thu, 17 Nov 2016 11:00 PM IST
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ऊना के एक बैंक में उमड़ी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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उपमंडल बंगाणा के बाजारों पर 500 और 1000 की नोटबंदी का खासा असर देखने को मिल रहा है। उपमंडल बंगाणा में इस समय करीब पांच हजार लोग दुकानदारी के पेशे से जुड़े हुए हैं। इन लोगों का कहना है कि सुबह आकर दुकानों में बैठ जाते हैं और शाम को कई दुकानदार बिना कमाई के बैरंग ही घर को लौट रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक 500 या हजार रुपये का पुराना नोट या दो हजार रुपये का नया नोट लेकर दुकानों में पहुंच रहा है।
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पांच सौ और हजार के पुराने नोट को ले नहीं सकते और दो हजार के खुले पैसे नहीं मिल रहे हैं, जिससे ग्राहक और दुकानदारों के लिए आफत खड़ी हो गई है। बैंकों में सौ-सौ के नोट अभी मिल नहीं रहे हैं। व्यापार मंडल बंगाणा के पूर्व प्रधान विजय कुमार का कहना है कि दस हजार की सेल तीन हजार तक सिमट गई है। ऐसे हालात में आम दुकानदार पिस रहा है। थानाकलां के व्यापारी नरेश कुमार का कहना है कि शादियों के सीजन में पैसों की कमी के चलते लोग खरीदारी ही नहीं कर पा रहे हैं। दुकान से जो माल बिक रहा है उसका उधार हो रहा है और हमें उधार माल नहीं मिल रहा है।
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कनफेक्शनरी के दुकानदार अमर चंद का कहना है कि नोटबंदी होने से उनका व्यवसाय सिमटकर 30 फीसदी ही रह गया है। ब्लाक कांग्रेस व्यापार मंडल अध्यक्ष देसराज खत्री का कहना है कि आम दुकानदार का व्यवसाय तीस फीसदी रह गया है। दुकानदारों में अमित, रामपाल, धर्मपाल, सुरेश कुमार, विनोद शर्मा, प्रेमचंद, मंगल सिंह, नीलकमल ने केंद्र सरकार से मांग की है कि शीघ्र बैंक में पर्याप्त राशि भेजी जाए।
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