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पड़ोसी पाकिस्तान, अमेरिका विश्वसनीय नहीं : जगतराम
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कहा, इंदिरा ने कभी तीसरे देश का दखल कबूल नहीं किया
युद्ध के समय सभी देशवासियों ने सरकार को दिया था सहयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। पड़ोसी पाकिस्तान, अमेरिका और ट्रंप विश्वसनीय नहीं हैं। यह बात राष्ट्रीय इंटक के संगठन सचिव और प्रदेश इंटक के महासचिव कामरेड जगत राम शर्मा ने प्रेस बयान में कही है। बताया कि भारत ने पहले भी कई युद्ध किए हैं। 1962 में चीन का युद्ध, 1965 तथा 1971 में पाकिस्तान युद्ध, 1999 में कारगिल का युद्ध भी देखा है। मैं सिविल डिफेंस कमेटियों का सदस्य भी रहा। ब्लैक आउट और अन्य रक्षात्मक उपायों को नजदीक से देखा और आसमान पर आग लगे जहाजों को देखा। 1965 में भारत की फौजें पूरी तरह लाहौर में पहुंच चुकी थीं। 1971 में पाकिस्तान के जनरल नियाजी ने भारत के जनरल अरोड़ा और मुक्ति वाहिनी के आगे 92000 पाकिस्तानी फौजियों ने आत्म समर्पण कर दिया और देश के लोगों ने इंदिरा को दुर्गा माता कहना शुरू कर दिया। इंदिरा ने कभी तीसरे देश का दखल कबूल नहीं किया। अब तो अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ही भारत पाकिस्तान के सीजफायर की घोषणा कर दी, जो 3 घंटे भी नहीं चली। सभी युद्धों में भारत की समस्त जनता हिंदू, सिख, मुसलमान, ईसाई, किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, उद्योगपतियों ने एकजुट होकर तत्कालीन सरकारों का पूरा सहयोग किया। बहुत से लोगों ने अपने सोने के गहने भी सरकार को दान में दे दिए। उस समय सांप्रदायिकता, जात-पात, धार्मिक प्रचार नहीं होता था। केवल बेरोजगारी और विकास की बात होती थी। अब ये सारी बातें गायब हैं। जगतराम ने यह भी बताया कि आज तक पाकिस्तानियों का मुकाबला पुराने सैनिक ही कर रहे हैं। अग्निवीर अभी बहुत दूर हैं। फौज में 1,80,000 पद खाली पड़े हैं, उनको भरा जाए। ट्रंप से दोस्ती के बाद सरकारी क्षेत्र के 23 उद्योग निजी क्षेत्र को बेच दिए गए हैं। लाखों लोगों को बेरोजगार कर दिया गया।
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युद्ध के समय सभी देशवासियों ने सरकार को दिया था सहयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। पड़ोसी पाकिस्तान, अमेरिका और ट्रंप विश्वसनीय नहीं हैं। यह बात राष्ट्रीय इंटक के संगठन सचिव और प्रदेश इंटक के महासचिव कामरेड जगत राम शर्मा ने प्रेस बयान में कही है। बताया कि भारत ने पहले भी कई युद्ध किए हैं। 1962 में चीन का युद्ध, 1965 तथा 1971 में पाकिस्तान युद्ध, 1999 में कारगिल का युद्ध भी देखा है। मैं सिविल डिफेंस कमेटियों का सदस्य भी रहा। ब्लैक आउट और अन्य रक्षात्मक उपायों को नजदीक से देखा और आसमान पर आग लगे जहाजों को देखा। 1965 में भारत की फौजें पूरी तरह लाहौर में पहुंच चुकी थीं। 1971 में पाकिस्तान के जनरल नियाजी ने भारत के जनरल अरोड़ा और मुक्ति वाहिनी के आगे 92000 पाकिस्तानी फौजियों ने आत्म समर्पण कर दिया और देश के लोगों ने इंदिरा को दुर्गा माता कहना शुरू कर दिया। इंदिरा ने कभी तीसरे देश का दखल कबूल नहीं किया। अब तो अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ही भारत पाकिस्तान के सीजफायर की घोषणा कर दी, जो 3 घंटे भी नहीं चली। सभी युद्धों में भारत की समस्त जनता हिंदू, सिख, मुसलमान, ईसाई, किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, उद्योगपतियों ने एकजुट होकर तत्कालीन सरकारों का पूरा सहयोग किया। बहुत से लोगों ने अपने सोने के गहने भी सरकार को दान में दे दिए। उस समय सांप्रदायिकता, जात-पात, धार्मिक प्रचार नहीं होता था। केवल बेरोजगारी और विकास की बात होती थी। अब ये सारी बातें गायब हैं। जगतराम ने यह भी बताया कि आज तक पाकिस्तानियों का मुकाबला पुराने सैनिक ही कर रहे हैं। अग्निवीर अभी बहुत दूर हैं। फौज में 1,80,000 पद खाली पड़े हैं, उनको भरा जाए। ट्रंप से दोस्ती के बाद सरकारी क्षेत्र के 23 उद्योग निजी क्षेत्र को बेच दिए गए हैं। लाखों लोगों को बेरोजगार कर दिया गया।