{"_id":"6298fa027f3e4301b31b380e","slug":"narrated-the-story-of-shrimad-bhagwat-in-akrot-una-news-sml4108738149","type":"story","status":"publish","title_hn":"अकरोट में बही श्रीमद्भागवत की गंगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अकरोट में बही श्रीमद्भागवत की गंगा
विज्ञापन
बाबा बालकनाथ मंदिर अकरोट में श्रीमद् भागवत कथा के दौरान आरती करते हुए ग्रामीण। संवाद
- फोटो : Una
ऊना। बाबा बालक नाथ मंदिर अकरोट में कथा ज्ञान सप्ताह के दूसरे दिन वीरवार को भी श्रद्धालु श्रीमद्भागवत की गंगा में आस्था और श्रद्धा की डुबकी लगाते रहे। कथा वाचक अतुल कृष्ण महाराज ने श्रद्धालुओं पर प्रवचनों की अमृत वर्षा की।
भगवान शुकदेव का गंगा के तट पर आगमन, सृष्टि वर्णन, मुक्ति के प्रकार, भगवान के 24 अवतार, देवहूति एवं कर्दम ऋषि का प्रसंग, भगवान कपिल का प्राकट्य एवं अष्टांग योग का वर्णन श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से सुना।
भागवत कथा की महिमा का गुणगान करते हुए अतुल कृष्ण महाराज ने कहा कि कर्म करने के लक्ष्य में ही गुण और दोष छिपे होते हैं।
रावण द्वारा श्री सीताजी का हरण अधर्म था परंतु भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी हरण अधर्म नहीं माना गया। एक में स्वार्थ है और दूसरे में परमार्थ एवं मंगल। अज्ञानी लोग आधे जल से भरी गागर बन कर छलकते रहते हैं और अंत में खाली रह जाते हैं। उक्त उन्होंने कहा कि भगवान न तो किसी के गुण का नाश करते हैं और न दोषों का। गुण एवं दोष का चयन व्यक्ति स्वयं करता है और फल भोगता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
भगवान शुकदेव का गंगा के तट पर आगमन, सृष्टि वर्णन, मुक्ति के प्रकार, भगवान के 24 अवतार, देवहूति एवं कर्दम ऋषि का प्रसंग, भगवान कपिल का प्राकट्य एवं अष्टांग योग का वर्णन श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से सुना।
विज्ञापन
भागवत कथा की महिमा का गुणगान करते हुए अतुल कृष्ण महाराज ने कहा कि कर्म करने के लक्ष्य में ही गुण और दोष छिपे होते हैं।
रावण द्वारा श्री सीताजी का हरण अधर्म था परंतु भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी हरण अधर्म नहीं माना गया। एक में स्वार्थ है और दूसरे में परमार्थ एवं मंगल। अज्ञानी लोग आधे जल से भरी गागर बन कर छलकते रहते हैं और अंत में खाली रह जाते हैं। उक्त उन्होंने कहा कि भगवान न तो किसी के गुण का नाश करते हैं और न दोषों का। गुण एवं दोष का चयन व्यक्ति स्वयं करता है और फल भोगता है।
विज्ञापन