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Una News: मिड-डे-मील कर्मियों को नहीं मिला मानदेय, परिवार चलाना हुआ मुश्किल

Sat, 01 Mar 2025 06:42 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Sat, 01 Mar 2025 06:42 AM IST
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Mid-day meal workers did not get honorarium, it became difficult to run the family.
दिसंबर माह से नहीं हो रहा भुगतान,, जिले में 1000 से ज्यादा कर्मचारी परेशान
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कर्मचारियों ने सरकार से उइाई मांग, जल्द दिया जाए बकाया मानदेय

संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। जिला के सरकारी स्कूलों में प्री नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक विद्यार्थियों के लिए दोपहर का भोजन तैयार करने वाले मिड-डे-मील कर्मचारी खुद मानदेय को तरस रहे हैं। बताया जा रहा कि दिसंबर माह के बाद मिड-डे-मील कर्मियों को मानदेय नहीं मिला है। कर्मियों को अध्यापकों और स्कूल प्रबंधन कमेटी की मदद से गुजारा करना पड़ रहा। कर्मचारियों का कहना है कि मेहनत के बावजूद मानदेय नहीं मिल रहा। एक तो पहले ही मानदेय बहुत कम है।
जानकारी के अनुसार जिला के सरकारी स्कूलों में 1000 से अधिक मिड-डे-मील कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारी सुबह स्कूल शुरु होने से करीब एक घंटा पहले पहुंच जाते हैं। इसके बाद विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करने में जुट जाते हैं। मिड-डे मील वर्कर को केवल 4500 रुपये मानदेय मिलता है। इसमें एक किस्त 3500 की तो एक 1000 रुपये की अलग-अलग मिलती है। इतने कम वेतनमान के लिए भी उन्हें हर शैक्षणिक सत्र में दो से पांच माह कर इंतजार करना पड़ता है। हालांकि बीते जनवरी माह में प्रदेश के स्कूलों में मिड डे मील कर्मचारियों के लिए शिक्षा निदेशालय की ओर से 27 करोड़ का बजट जारी करने का फैसला लिया गया। सरकार ने भी कहा कि स्कूलों को यह बजट जल्द ही मिल जाएगा, लेकिन फरवरी माह बीतने के बावजूद उनके खातों में मानदेय नहीं पहुंचा। मौजूदा शैक्षणिक सत्र बीतने को केवल एक माह का समय बचा है।
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सीटू जिला सचिव गुरनाम सिंह ने कहा कि मिड-डे-मील कर्मचारियों को कभी मानदेय समय पर नहीं मिलता। कहा कि मिड-डे-मील कर्मचारियों में लगभग सभी गरीब परिवारों से संबंधित होते हैं। अगर उन्हें समय पर वेतन नहीं मिलेगा तो उनके परिवारों के लिए गुजारा करना मुश्किल हो जाएगा। कहा कि इस समस्या को लेकर रविवार और सोमवार को शिमला में विस्तृत चर्चा की जाएगी। उसके बाद आगामी रणनीति को लेकर कार्य किया जाएगा। कहा कि 26 बच्चों की शर्त की वजह से आज 15 वर्ष से सेवाएं दे रहे मिड-डे मील वर्कर को नौकरी छोड़नी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि यूनियन मांग करती है कि हर महीने वेतन दिया जाए। किसी भी वर्कर की छंटनी न की जाए।
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