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Una News: मीना ने अचार बनाकर सुधारी आर्थिकी, दूसरों का भी बनीं सहारा
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महिला
विभिन्न पदार्थों से तैयार करती हैं अचार, प्रति माह कमा रहीं 25000
30 अन्य महिलाओं को भी बनाया आत्मनिर्भर, घर पर तैयार करती हैं उत्पाद
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से क्या संभव है, इसकी मिसाल घंडावल गांव की मीना ने पेश की है। मीना ने घर पर अचार बनाने का काम शुरू किया और न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि गांव की 30 अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। आज उनके अचार स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी लोकप्रिय हैं।
मीना आम, नींबू, मिर्च, आंवला, गाजर, अदरक और गलगल जैसे विविध अचार बनाती हैं। शुद्ध मसालों और पारंपरिक विधि से बने उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में मीना प्रति माह करीब 25,000 रुपये कमा रही हैं, जबकि उनके साथ जुड़ी महिलाएं लगभग 15,000 रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। खास बात यह है कि यह सब घर पर ही होता है, जिससे महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ रोजगार भी कर पा रही हैं।
मीना ने स्वयं प्रशिक्षण लेकर इस काम को सीखा और फिर अन्य महिलाओं को अचार निर्माण, पैकेजिंग और विपणन की जानकारी दी। करीब 30 महिलाएं नियमित रूप से काम कर रही हैं, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। महिलाएं समूह बनाकर कच्चे माल की खरीद, उत्पादन और बिक्री की जिम्मेदारियां साझा करती हैं। मीना के अनुसार शुरुआत में बाजार तलाशना और लोगों का भरोसा जीतना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया। धीरे-धीरे ग्राहकों का विश्वास बढ़ा और ऑर्डर मिलने लगे। भविष्य में वह अपने उत्पादों की ब्रांडिंग और ऑनलाइन बिक्री की योजना भी बना रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र में महिला स्वरोजगार का यह प्रयास न केवल आर्थिक सशक्तीकरण का उदाहरण है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरा है। मीना की सफलता यह साबित करती है कि सही दिशा, मेहनत और सहयोग से घर बैठे भी रोजगार सृजित किया जा सकता है।
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विभिन्न पदार्थों से तैयार करती हैं अचार, प्रति माह कमा रहीं 25000
30 अन्य महिलाओं को भी बनाया आत्मनिर्भर, घर पर तैयार करती हैं उत्पाद
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से क्या संभव है, इसकी मिसाल घंडावल गांव की मीना ने पेश की है। मीना ने घर पर अचार बनाने का काम शुरू किया और न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि गांव की 30 अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। आज उनके अचार स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी लोकप्रिय हैं।
मीना आम, नींबू, मिर्च, आंवला, गाजर, अदरक और गलगल जैसे विविध अचार बनाती हैं। शुद्ध मसालों और पारंपरिक विधि से बने उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में मीना प्रति माह करीब 25,000 रुपये कमा रही हैं, जबकि उनके साथ जुड़ी महिलाएं लगभग 15,000 रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। खास बात यह है कि यह सब घर पर ही होता है, जिससे महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ रोजगार भी कर पा रही हैं।
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मीना ने स्वयं प्रशिक्षण लेकर इस काम को सीखा और फिर अन्य महिलाओं को अचार निर्माण, पैकेजिंग और विपणन की जानकारी दी। करीब 30 महिलाएं नियमित रूप से काम कर रही हैं, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। महिलाएं समूह बनाकर कच्चे माल की खरीद, उत्पादन और बिक्री की जिम्मेदारियां साझा करती हैं। मीना के अनुसार शुरुआत में बाजार तलाशना और लोगों का भरोसा जीतना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया। धीरे-धीरे ग्राहकों का विश्वास बढ़ा और ऑर्डर मिलने लगे। भविष्य में वह अपने उत्पादों की ब्रांडिंग और ऑनलाइन बिक्री की योजना भी बना रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र में महिला स्वरोजगार का यह प्रयास न केवल आर्थिक सशक्तीकरण का उदाहरण है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरा है। मीना की सफलता यह साबित करती है कि सही दिशा, मेहनत और सहयोग से घर बैठे भी रोजगार सृजित किया जा सकता है।
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