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न्यूनतम बस किराया 10 रुपये करना असंवेदनशील निर्णय : पुष्प राज
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बाेले-लाखों गरीब और मध्य वर्गीय नागरिकों के लिए एक गंभीर आर्थिक बोझ
किफायती परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी से किनारा कर रही सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ऊना विभाग के संयोजक पुष्प राज ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से न्यूनतम बस किराये में 5 से 10 रुपये तक की वृद्धि का निर्णय न केवल असंवेदनशील है, बल्कि लाखों गरीब और मध्य वर्गीय नागरिकों के लिए एक गंभीर आर्थिक बोझ भी साबित होगा। यह वृद्धि उन नागरिकों पर अतिरिक्त दबाव डालने वाली है, जो रोज़ाना बसों में सफर करते हैं। इस पर सरकार के मंत्री का यह बयान कि कई बार लोगों के पास खुले 5 रुपये नहीं होते तो हमने इसे बढ़ाकर 10 रुपये करने का फैसला किया है। यह न केवल निंदनीय और असंवेदनशील है, बल्कि यह दर्शाता है कि सरकार आम जनता की वास्तविक समस्याओं और उनके जीवन की कठिनाइयों को समझने में असफल रही है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में जहां परिवहन की सुविधाएं पहले से ही सीमित हैं, वहां इस तरह के फैसले से सार्वजनिक परिवहन की सुलभता और किफायती होने की उम्मीदें धूमिल हो जाती हैं। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से सरकार से आग्रह किया है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार करे।
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किफायती परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी से किनारा कर रही सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ऊना विभाग के संयोजक पुष्प राज ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से न्यूनतम बस किराये में 5 से 10 रुपये तक की वृद्धि का निर्णय न केवल असंवेदनशील है, बल्कि लाखों गरीब और मध्य वर्गीय नागरिकों के लिए एक गंभीर आर्थिक बोझ भी साबित होगा। यह वृद्धि उन नागरिकों पर अतिरिक्त दबाव डालने वाली है, जो रोज़ाना बसों में सफर करते हैं। इस पर सरकार के मंत्री का यह बयान कि कई बार लोगों के पास खुले 5 रुपये नहीं होते तो हमने इसे बढ़ाकर 10 रुपये करने का फैसला किया है। यह न केवल निंदनीय और असंवेदनशील है, बल्कि यह दर्शाता है कि सरकार आम जनता की वास्तविक समस्याओं और उनके जीवन की कठिनाइयों को समझने में असफल रही है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में जहां परिवहन की सुविधाएं पहले से ही सीमित हैं, वहां इस तरह के फैसले से सार्वजनिक परिवहन की सुलभता और किफायती होने की उम्मीदें धूमिल हो जाती हैं। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से सरकार से आग्रह किया है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार करे।