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Una News: हल्की फुहारों ने गेहूं की फसल में भरी नई जान
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ऊना में बारिश के दौरान गंतव्य की और जाता बाईक सवार।संवाद
गैर सिंचित इलाकों लंबे समय से थी बारिश की दरकार
किसानों ने कहा, लंबे समय से थी बारिश की आस
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला में वीरवार सुबह मौसम ने करवट ली और करीब एक घंटे तक हल्की बारिश हुई। हालांकि, उम्मीद से कम बारिश हुई, लेकिन यह गेहूं की फसल के लिए संजीवनी से कम नहीं। किसान बीते दो माह से गेहूं के लिए बारिश का इंतजार कर रहे थे। वर्तमान में फसल बर्बादी के कगार पर थी। खासकर गैर सिंचित इलाकों में फसल की स्थिति बेहद खराब हो चुकी थी। बारिश से फसल को काफी हद कर लाभ मिलेगा और किसान खाद और कीटनाशकों का छिड़काव भी कर पाएंगे।
ऊना जिले में करीब 35000 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल तैयार होती है। 60 फीसदी से अधिक फसल गैर सिंचित इलाकों में उगाई जाती है। इसमें किसान अपनी जरूरत के साथ मंडियों में भी फसल की बिक्री करते हैं। ऐसे में परिवार के गुजारे के साथ आमदनी के लिए भी गेहूं एक बेहतरीन फसल है। फसल की अच्छी पैदावार के लिए मौसम की स्थिति विशेष मायने रखती है। अगर समय पर बारिश हो तो फसल पर खाद और कीटनाशकों का छिड़काव भी समय पर होता है। इससे फसल अच्छे तरीके से वृद्धि करती है और पैदावार भी बेहतरीन होती है।
किसानों मदन लाल, मोनू सैनी, सुखविंद्र सिंह, सुरेंद्र कुमार, सुखराम, जतिंद्र कुमार सहित अन्य ने बताया कि बीते कुछ सालों से गेहूं सहित सभी फसलों पर मौसम की मार पड़ी है। जब बारिश की आवश्यकता होती है, उस समय फसल सूखे का सामना करती है और कटाई के समय बारिश हो जाती है। किसानों ने कहा कि मौसम के चक्र में बीते कुछ सालों के काफी बदलाव आया है और फसल उगाने का चक्र पुराने समय से चला आ रहा। गेहूं की फसल को पहली बारिश दो माह बाद नसीब हुई, जबकि एक माह के तक फसल की सिंचाई जरूरी है। इसका असर फसल की वृद्धि और पैदावार पर होना तय है। उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि गेहूं की फसल को इस समय बारिश की सख्त जरूरत थी। कहा कि अब किसान जरूरी दवाइयों और खाद का छिड़काव कर पाएंगे। किसान किसी परामर्श के लिए विभाग विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।
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किसानों ने कहा, लंबे समय से थी बारिश की आस
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला में वीरवार सुबह मौसम ने करवट ली और करीब एक घंटे तक हल्की बारिश हुई। हालांकि, उम्मीद से कम बारिश हुई, लेकिन यह गेहूं की फसल के लिए संजीवनी से कम नहीं। किसान बीते दो माह से गेहूं के लिए बारिश का इंतजार कर रहे थे। वर्तमान में फसल बर्बादी के कगार पर थी। खासकर गैर सिंचित इलाकों में फसल की स्थिति बेहद खराब हो चुकी थी। बारिश से फसल को काफी हद कर लाभ मिलेगा और किसान खाद और कीटनाशकों का छिड़काव भी कर पाएंगे।
ऊना जिले में करीब 35000 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल तैयार होती है। 60 फीसदी से अधिक फसल गैर सिंचित इलाकों में उगाई जाती है। इसमें किसान अपनी जरूरत के साथ मंडियों में भी फसल की बिक्री करते हैं। ऐसे में परिवार के गुजारे के साथ आमदनी के लिए भी गेहूं एक बेहतरीन फसल है। फसल की अच्छी पैदावार के लिए मौसम की स्थिति विशेष मायने रखती है। अगर समय पर बारिश हो तो फसल पर खाद और कीटनाशकों का छिड़काव भी समय पर होता है। इससे फसल अच्छे तरीके से वृद्धि करती है और पैदावार भी बेहतरीन होती है।
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किसानों मदन लाल, मोनू सैनी, सुखविंद्र सिंह, सुरेंद्र कुमार, सुखराम, जतिंद्र कुमार सहित अन्य ने बताया कि बीते कुछ सालों से गेहूं सहित सभी फसलों पर मौसम की मार पड़ी है। जब बारिश की आवश्यकता होती है, उस समय फसल सूखे का सामना करती है और कटाई के समय बारिश हो जाती है। किसानों ने कहा कि मौसम के चक्र में बीते कुछ सालों के काफी बदलाव आया है और फसल उगाने का चक्र पुराने समय से चला आ रहा। गेहूं की फसल को पहली बारिश दो माह बाद नसीब हुई, जबकि एक माह के तक फसल की सिंचाई जरूरी है। इसका असर फसल की वृद्धि और पैदावार पर होना तय है। उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि गेहूं की फसल को इस समय बारिश की सख्त जरूरत थी। कहा कि अब किसान जरूरी दवाइयों और खाद का छिड़काव कर पाएंगे। किसान किसी परामर्श के लिए विभाग विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।

ऊना में बारिश के दौरान गंतव्य की और जाता बाईक सवार।संवाद

ऊना में बारिश के दौरान गंतव्य की और जाता बाईक सवार।संवाद
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