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Una News: पशुपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया
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पशुपालन विभाग ने लगाया मेगा शिविर, नौ कुत्तों के निशुल्क ऑपरेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। नेशनल लाइव स्टॉक मिशन के तहत पशुपालन विभाग की ओर से बहुआयामी पशु चिकित्सालय ललड़ी में बुधवार को एक मेगा शिविर का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक डॉ. दिनेश परमार ने की। शिविर में लगभग 70 पशुपालकों ने भाग लिया और पशुपालन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। शिविर में सहायक निदेशक डॉ. दिनेश परमार ने पशुपालकों को विभाग की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और उन्हें पशुपालन को एक व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि पशुपालन को आधुनिक तकनीकों के साथ अपनाकर आमदनी को बेहतर बनाया जा सकता है। शिविर के दौरान पशु चिकित्सा सर्जन डॉ. मनोज शर्मा के नेतृत्व में नौ कुत्तों के निशुल्क ऑपरेशन किए गए। डॉ. मनोज ने बताया कि इन ऑपरेशनों में यूरोपियन स्टैंडर्ड तकनीक का उपयोग किया गया। जिससे पशुओं को न तो दर्द होता है और न ही जान का कोई खतरा रहता है। यह प्रक्रिया कम चीर-फाड़ वाली होती है। ऑपरेशन के बाद किसी भी तरह की समस्या उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने पशुपालन के चार प्रमुख स्तंभों के बारे में पशुपालकों को जानकारी दी। शिविर में उपस्थित पशुपालकों को उनके पशुओं के लिए निशुल्क दवाइयां और टॉनिक वितरित किए गए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। नेशनल लाइव स्टॉक मिशन के तहत पशुपालन विभाग की ओर से बहुआयामी पशु चिकित्सालय ललड़ी में बुधवार को एक मेगा शिविर का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक डॉ. दिनेश परमार ने की। शिविर में लगभग 70 पशुपालकों ने भाग लिया और पशुपालन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। शिविर में सहायक निदेशक डॉ. दिनेश परमार ने पशुपालकों को विभाग की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और उन्हें पशुपालन को एक व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि पशुपालन को आधुनिक तकनीकों के साथ अपनाकर आमदनी को बेहतर बनाया जा सकता है। शिविर के दौरान पशु चिकित्सा सर्जन डॉ. मनोज शर्मा के नेतृत्व में नौ कुत्तों के निशुल्क ऑपरेशन किए गए। डॉ. मनोज ने बताया कि इन ऑपरेशनों में यूरोपियन स्टैंडर्ड तकनीक का उपयोग किया गया। जिससे पशुओं को न तो दर्द होता है और न ही जान का कोई खतरा रहता है। यह प्रक्रिया कम चीर-फाड़ वाली होती है। ऑपरेशन के बाद किसी भी तरह की समस्या उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने पशुपालन के चार प्रमुख स्तंभों के बारे में पशुपालकों को जानकारी दी। शिविर में उपस्थित पशुपालकों को उनके पशुओं के लिए निशुल्क दवाइयां और टॉनिक वितरित किए गए।