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Una News: मातृ-शिशु अस्पताल में महिला सुरक्षा कर्मियों ने संभाला सुरक्षा का जिम्मा
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मातृ शिशु अस्पताल ऊना का भवन। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। क्षेत्रीय अस्पताल के बाद अब मातृ-शिशु अस्पताल में भी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर दी गई है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजे जाने के बाद विभाग ने इसे मंजूर किया और दस महिला सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया।
इस कदम से अस्पताल भवन में व्यवस्था बनाने में आसानी होगी और उपचार के लिए आने वाले लोगों को बेहतर सुविधा मिलेगी। मातृ-शिशु अस्पताल में दो गायनी ओपीडी, एक शिशु रोग ओपीडी, क्रस्ना लैब, लेबर रूम, गायनी वार्ड, चिल्ड्रन वार्ड सहित अन्य सुविधाओं का संचालन किया जा रहा है। पहले से ही क्षेत्रीय अस्पताल में 17 निजी सुरक्षा कर्मी तैनात हैं। अब नागरिक अस्पतालों में भी सुरक्षा का जिम्मा निजी कंपनियों को देने के लिए आगामी दिनों में प्रयास किए जाएंगे।
मातृ-शिशु अस्पताल में सुबह से ही मरीजों का आना शुरू हो जाता है और ओपीडी खुलने से पहले ही लंबी कतारें लग जाती हैं। सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति में व्यवस्थाएं बनाए रखना कठिन होता था, जिससे कभी-कभी मरीज और तीमारदार आपस में झगड़ने भी लगते थे।
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अब 24 घंटे शिफ्ट के हिसाब से तैनात सुरक्षा कर्मी इन समस्याओं से निपटेंगे और ओपीडी के बाहर बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।
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ऊना। क्षेत्रीय अस्पताल के बाद अब मातृ-शिशु अस्पताल में भी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर दी गई है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजे जाने के बाद विभाग ने इसे मंजूर किया और दस महिला सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया।
इस कदम से अस्पताल भवन में व्यवस्था बनाने में आसानी होगी और उपचार के लिए आने वाले लोगों को बेहतर सुविधा मिलेगी। मातृ-शिशु अस्पताल में दो गायनी ओपीडी, एक शिशु रोग ओपीडी, क्रस्ना लैब, लेबर रूम, गायनी वार्ड, चिल्ड्रन वार्ड सहित अन्य सुविधाओं का संचालन किया जा रहा है। पहले से ही क्षेत्रीय अस्पताल में 17 निजी सुरक्षा कर्मी तैनात हैं। अब नागरिक अस्पतालों में भी सुरक्षा का जिम्मा निजी कंपनियों को देने के लिए आगामी दिनों में प्रयास किए जाएंगे।
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मातृ-शिशु अस्पताल में सुबह से ही मरीजों का आना शुरू हो जाता है और ओपीडी खुलने से पहले ही लंबी कतारें लग जाती हैं। सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति में व्यवस्थाएं बनाए रखना कठिन होता था, जिससे कभी-कभी मरीज और तीमारदार आपस में झगड़ने भी लगते थे।
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