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Una News: बंगाणा के जंगलों में बढ़ रहा दुर्लभ वन्यजीवों का शिकार
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वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की सरेआम उड़ रहीं धज्जियां
दुर्लभ वन्य जीवों की घट रही आबादी, वन विभाग की सख्ती जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। उपमंडल बंगाणा के जंगलों में जानवरों के शिकार की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। बेखौफ शिकारी वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए खुलेआम शिकार कर रहे हैं। इससे न केवल दुर्लभ वन्यजीवों की आबादी घट रही है, बल्कि जंगलों का प्राकृतिक संतुलन भी प्रभावित हो रहा है। स्थानीय निवासियों अजय धीमान, सुशील, चमन लाल, रमेश का कहना है कि शिकारियों का आतंक दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। वे रात के अंधेरे या फिर दिन में सुनसान इलाकों में सक्रिय रहते हैं। हालांकि, वन विभाग की गश्त जारी है, लेकिन शिकारियों पर अभी तक पूरी तरह से अंकुश नहीं लग पाया है। वन विभाग का दावा है कि गश्ती दल लगातार जंगलों में निगरानी कर रहा है, लेकिन शिकारी नई-नई तरकीबें अपनाकर वन्यजीवों का शिकार कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग से मांग की जा रही है कि गश्त को और मजबूत किया जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए, ताकि जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
क्या कहता है वन्यजीव संरक्षण अधिनियम
भारत में 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत किसी भी वन्यजीव का शिकार अपराध है। दोषी पाए जाने पर सात साल तक की सजा और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके बावजूद शिकार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बाक्स
वन विभाग ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
इस मामले पर जब क्षेत्रीय वन अधिकारी आनंद कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वन विभाग की टीम नियमित रूप से गश्त कर रही है। किसी भी शिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। यदि कोई शिकार करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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दुर्लभ वन्य जीवों की घट रही आबादी, वन विभाग की सख्ती जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। उपमंडल बंगाणा के जंगलों में जानवरों के शिकार की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। बेखौफ शिकारी वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए खुलेआम शिकार कर रहे हैं। इससे न केवल दुर्लभ वन्यजीवों की आबादी घट रही है, बल्कि जंगलों का प्राकृतिक संतुलन भी प्रभावित हो रहा है। स्थानीय निवासियों अजय धीमान, सुशील, चमन लाल, रमेश का कहना है कि शिकारियों का आतंक दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। वे रात के अंधेरे या फिर दिन में सुनसान इलाकों में सक्रिय रहते हैं। हालांकि, वन विभाग की गश्त जारी है, लेकिन शिकारियों पर अभी तक पूरी तरह से अंकुश नहीं लग पाया है। वन विभाग का दावा है कि गश्ती दल लगातार जंगलों में निगरानी कर रहा है, लेकिन शिकारी नई-नई तरकीबें अपनाकर वन्यजीवों का शिकार कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग से मांग की जा रही है कि गश्त को और मजबूत किया जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए, ताकि जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
क्या कहता है वन्यजीव संरक्षण अधिनियम
भारत में 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत किसी भी वन्यजीव का शिकार अपराध है। दोषी पाए जाने पर सात साल तक की सजा और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके बावजूद शिकार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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वन विभाग ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
इस मामले पर जब क्षेत्रीय वन अधिकारी आनंद कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वन विभाग की टीम नियमित रूप से गश्त कर रही है। किसी भी शिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। यदि कोई शिकार करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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