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सरकारी कर्मचारी नियुक्ति और सेवा शर्तें बिल वापस ले सरकार : सुरेश

Fri, 20 Dec 2024 05:37 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Dec 2024 05:37 PM IST
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Government should withdraw government employee appointment and service conditions bill: Suresh
एचजीसीटीए ने काॅलेज परिसर में गेट मीटिंग कर जताया विरोध
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बोले, सरकार आए दिन ले रही कर्मचारी विरोधी फैसले
संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। ऊना कॉलेज में प्रदेश राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ (एचजीसीटीए) की स्थानीय इकाई के प्रधान डॉ. सुरेश कुमार के नेतृत्व में शुक्रवार को सरकार की ओर से विधानसभा में लाए गए सरकारी कर्मचारी नियुक्ति और सेवा शर्तें बिल 2024 के विरोध में गेट मीटिंग की। उन्होंने बताया कि संविदा के आधार पर नियुक्त कॉलेज प्रवक्ताओं ने 2009 से लंबी लड़ाई लड़कर माननीय उच्च न्यायालय शिमला से न्याय प्राप्त किया। न्यायालय ने अपने फैसले में कर्मचारियों को वरिष्ठता सहित अन्य सभी लाभ नियुक्ति के प्रथम दिन से देने के फैसले दिए। कुछ प्रवक्ताओं को यह लाभ मिल भी चुके हैं। अधिकतर प्रवक्ताओं को अभी यह लाभ नहीं मिले। प्रदेश सरकार ने इसी बीच विधानसभा में एक कर्मचारी विरोधी बिल पेश किया है। इसे 12 दिसंबर 2003 से लागू माने जाने का प्रावधान है। सरकार को कर्मचारियों को संविदा अवधि की देनदारी का लाभ नियुक्ति तिथि से न देना पड़ा, इसलिए यह बिल लाया गया है। माननीय न्यायालय के फैसले को दरकिनार किया गया है। जब प्रदेश सरकार ने पुरानी पेंशन स्कीम लागू की थी तो कॉलेज प्राध्यापक संघ ने इसका स्वागत किया था। उसके बाद प्रदेश सरकार लगातार एक से बढ़कर एक कर्मचारी विरोधी फैसले ले रही है। इस कर्मचारी विरोधी बिल में स्टडी लीव पर जाने वाले प्रवक्ताओं को केवल 40% वेतन, पीरियड आधार पर गेस्ट फैकल्टी रखना, अनुबंध कर्मचारियों का वर्ष में केवल एक बार नियमितीकरण और अनुबंध कर्मचारियों की वार्षिक वृद्धि को रोकना आदि फैसले शामिल हैं। इसलिए हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ (एचजीसीटीए) इस बिल को वापस लेने की सरकार से मांग करता है। यदि सरकार ने यह कर्मचारी विरोधी बिल वापस नहीं लिया, तो महाविद्यालय प्राध्यापक संघ को प्रदेश के अन्य कर्मचारी संगठनों से मिलकर संघर्ष का रास्ता अपनाने को मजबूर होना पड़ेगा तथा इसका समस्त उत्तरदायित्व प्रदेश सरकार का होगा।
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