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Una News: सरकार 600 रुपये में तो बच्चों की वर्दी का कपड़ा तक नहीं आता

Mon, 26 May 2025 02:19 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 26 May 2025 02:19 AM IST
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Government, even the cloth for children's uniforms doesn't cost Rs. 600
अभिभावक बोले- इतनी राशि से वर्दी की खरीद संभव नहीं, सिलाई तो दूर की बात
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मांग : बच्चों की वर्दी खर्च की पूरी राशि का हो भुगतान, नहीं तो औपचारिकताएं की जाएं बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली मुफ्त वर्दी पर अभिभावकों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार स्कूलों में लड़कियों की वर्दी के नाम पर 600 रुपये उनके खाते में डाल रही है। इस राशि से वर्दी का कपड़ा तक नहीं आता, सिलाई तो दूर की बात है। अढ़ाई वर्ष पूर्व सरकार की ओर से कक्षा एक से आठ तक सभी लड़के और लड़कियों को वर्दी की सुविधा मुफ्त दी जाती थी। इससे गरीब परिवारों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों का रुख करने लगे। अढाई वर्ष पूर्व नई सरकार आने के बाद केवल लड़कियों को ही वर्दी के नाम पर 600 रुपये डाले जा रहे। जबकि, एक वर्दी पर खर्च लगभग 1500 रुपये हो रहा। अभिभावकों का कहना है कि 600 रुपये में तो वर्दी का कपड़ा तक नहीं आ रहा। वर्दी की खरीद और सिलाई करने में करीब 1500 रुपये खर्च हो रहे।
जिले के कुछ स्कूल प्रबंधन समितियों के सदस्यों रमा कुमारी, श्याम लाल, दिनेश कमार, ममता देवी, सोहन लाल, राम प्रसाद सुशील कुमार, अंजना देवी तथा नरदेव सिंह का कहना है कि सरकार की ओर से यदि गरीब बच्चों को वर्दी देनी ही है तो कम से कम एक वर्दी के 1500 रुपये डाले जाएं। गरीब अभिभावक बच्चों की वर्दी के लिए 900 रुपये जेब से डालने में समर्थ नहीं है। यही कारण है कि विद्यालयों में बच्चों की संख्या कम होती जा रही है। अगर निजी के बराबर ही खर्च करना है तो अभिभावक उन्हीं स्कूलों का रुख करना बेहतर मान रहे।
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अभिभावकों रविंद्र कुमार, उर्मिला देवी, सत्येंद्र कुमार, जसवंत सिंह, वरिंद्र कुमार का कहना है कि अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग में क्या गरीब लड़के नहीं होते। उनको न वर्दी मिल रही है और न कोई पैसा उनके खाते में जा रहा। जबकि कुछ वर्ष पहले कक्षा एक से आठवीं तक सभी बच्चों को वर्दियों की सुविधा दी जाती थी। कहा कि यह सरकार का परिवर्तन करने का कौन सा ढंग है।
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प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला महासचिव सचिन सत्येंद्र मिन्हास का कहना है कि अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग में भी गरीब अभिभावकों के बच्चे हैं। उनमें कई अति गरीब हैं। उनको भी वर्दी की सुविधा मिलनी चाहिए। प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापक संघ के जिला अध्यक्ष नरेश शर्मा और महासचिव विवेक दत्ता का कहना है कि सरकार को लड़के और लड़कियों में कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए। सामान्य वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग में भी कई बच्चे गरीब परिवारों से हैं और वर्दी के पात्र है। जब उन्हें वर्दी नहीं मिलती तो उनमें हीन भावना उत्पन्न होती है।

सरकार और उच्च अधिकारियों के आदेश समय-समय पर आते हैं। हमें उनका पालन करना होता है। नए आदेशों में यदि परिवर्तन होता है तो विभाग इसे तुरंत अमल में लाएगा। -सोमलाल धीमान, उपनिदेशक, जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग
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