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Una News: मां चिंतपूर्णी के दरबार में चढ़ाए सोने के नेत्र
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होटल का कार्य पूरा होने की मांगी थी मन्नत
संवाद न्यूज एजेंसी
भरवाईं (ऊना)। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी मंदिर में एक श्रद्धालु बृजमोहन शर्मा ने मां के चरणों में सोने के नेत्र चढ़ाए हैं। यह दान उनकी श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। सोने के नेत्र चढ़ाने के पीछे की भावना यह है कि श्रद्धालु ने माता रानी का आशीर्वाद लेकर भरवाईं में होटल का कार्य शुरू किया था और अब मन्नत पूरी होने पर बृजमोहन ने माता रानी के चरणों में यह भेंट दान की है। चिंतपूर्णी मंदिर में दान की परंपरा बहुत पुरानी है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर मां के चरणों में सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं अर्पित करते हैं। यह दान उनकी श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है और मंदिर की समृद्धि में भी योगदान करता है। मां चिंतपूर्णी के प्रति भक्तों की आस्था बहुत गहरी है। श्रद्धालु दूर-दूर से मंदिर में आते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने पर दान करते हैं। सोने के नेत्र चढ़ाना भी इसी आस्था का एक हिस्सा है, जो श्रद्धालुओं की भक्ति और समर्पण को दर्शाता है। बृज मोहन शर्मा ने बताया कि मंदिर में चढ़ाए गए नेत्र चार ग्राम के हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भरवाईं (ऊना)। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी मंदिर में एक श्रद्धालु बृजमोहन शर्मा ने मां के चरणों में सोने के नेत्र चढ़ाए हैं। यह दान उनकी श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। सोने के नेत्र चढ़ाने के पीछे की भावना यह है कि श्रद्धालु ने माता रानी का आशीर्वाद लेकर भरवाईं में होटल का कार्य शुरू किया था और अब मन्नत पूरी होने पर बृजमोहन ने माता रानी के चरणों में यह भेंट दान की है। चिंतपूर्णी मंदिर में दान की परंपरा बहुत पुरानी है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर मां के चरणों में सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं अर्पित करते हैं। यह दान उनकी श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है और मंदिर की समृद्धि में भी योगदान करता है। मां चिंतपूर्णी के प्रति भक्तों की आस्था बहुत गहरी है। श्रद्धालु दूर-दूर से मंदिर में आते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने पर दान करते हैं। सोने के नेत्र चढ़ाना भी इसी आस्था का एक हिस्सा है, जो श्रद्धालुओं की भक्ति और समर्पण को दर्शाता है। बृज मोहन शर्मा ने बताया कि मंदिर में चढ़ाए गए नेत्र चार ग्राम के हैं।