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बच्चे ने निगला पांच का सिक्का, आपरेशन कर बचाई जान
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संवाद न्यूज एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। बच्चे ने खेल-खेल में पांच रुपये का सिक्का निगल लिया, जिससे उसकी जान पर बन आई। गनीमत यह रही कि समय रहते बच्चे को स्थानीय आर्य ईएनटी अस्पताल लाया गया, जहां कड़ी मशक्कत के बाद डॉक्टरों की टीम ने बच्चे की भोजन नली में फंसे पांच रुपये के सिक्के को निकालकर उसे नई जिंदगी प्रदान की है।
बच्चे के पिता राकेश कुमार निवासी स्वामीपुर बाग ने बताया कि शनिवार को उनके चार वर्षीय बेटे रोहांश ने अचानक पांच रुपये का सिक्का निगल लिया। इसके चलते उसे सांस लेने में काफी तकलीफ महसूस होने लगी। जल्द ही उसे स्थानीय आर्य ईएनटी मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में लाया गया, जहां ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. केआर आर्य तथा डॉक्टर दीपक आर्य ने कड़ी मशक्कत के बाद ऑपरेशन से बच्चे के गले में फंसे सिक्के को बाहर निकालकर उनके बेटे को नया जीवन प्रदान किया।
अभी कुछ दिनों पहले भी इसी तरह का मामला सामने आया था। डॉ. केआर आर्य और डॉक्टर दीपक आर्य ने कहा कि बच्चों को सिक्कों सहित अन्य नुकीली से दूर रखें तथा कोई भी ऐसी छोटी चीज खेलने के लिए न दें, जो उनके लिए मुसीबत बन जाए। अगर समय रहते बच्चे को यहां नहीं पहुंचाया जाता था, उसकी जान को खतरा हो सकता था।
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मैहतपुर (ऊना)। बच्चे ने खेल-खेल में पांच रुपये का सिक्का निगल लिया, जिससे उसकी जान पर बन आई। गनीमत यह रही कि समय रहते बच्चे को स्थानीय आर्य ईएनटी अस्पताल लाया गया, जहां कड़ी मशक्कत के बाद डॉक्टरों की टीम ने बच्चे की भोजन नली में फंसे पांच रुपये के सिक्के को निकालकर उसे नई जिंदगी प्रदान की है।
बच्चे के पिता राकेश कुमार निवासी स्वामीपुर बाग ने बताया कि शनिवार को उनके चार वर्षीय बेटे रोहांश ने अचानक पांच रुपये का सिक्का निगल लिया। इसके चलते उसे सांस लेने में काफी तकलीफ महसूस होने लगी। जल्द ही उसे स्थानीय आर्य ईएनटी मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में लाया गया, जहां ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. केआर आर्य तथा डॉक्टर दीपक आर्य ने कड़ी मशक्कत के बाद ऑपरेशन से बच्चे के गले में फंसे सिक्के को बाहर निकालकर उनके बेटे को नया जीवन प्रदान किया।
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अभी कुछ दिनों पहले भी इसी तरह का मामला सामने आया था। डॉ. केआर आर्य और डॉक्टर दीपक आर्य ने कहा कि बच्चों को सिक्कों सहित अन्य नुकीली से दूर रखें तथा कोई भी ऐसी छोटी चीज खेलने के लिए न दें, जो उनके लिए मुसीबत बन जाए। अगर समय रहते बच्चे को यहां नहीं पहुंचाया जाता था, उसकी जान को खतरा हो सकता था।
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