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पंद्रह साल पुराने निजी वाहनों पर प्रतिबंध न लगाया जाए : संघ
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सामाजिक संस्था संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से किया पुनर्विचार का आग्रह
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। अखिल भारतीय हिमाचल सामाजिक संस्था संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष केएम लाल और राष्ट्रीय महासचिव जतिंदर कंवर ने केंद्र सरकार की ओर से 15 वर्ष पुराने वाहनों पर लगाए जा रहे प्रतिबंध पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय यदि व्यावसायिक (काॅमर्शियल) वाहनों तक सीमित रखा जाए तो उचित हो सकता है, लेकिन निजी वाहनों को भी इसके दायरे में लाना सरासर अनुचित है। आम जनता के साथ अन्याय है।काॅमर्शियल वाहन दिन-रात चलते हैं और अधिक दूरी तय करते हैं। इनसे प्रदूषण फैलने की संभावना अधिक रहती है। इसके विपरीत निजी वाहन आमतौर पर केवल कुछ घंटों के लिए सीमित दूरी तक ही उपयोग में लाए जाते हैं और अच्छी देखरेख के चलते अपेक्षाकृत कम प्रदूषण करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय आम आदमी की आर्थिक स्वतंत्रता पर कुठाराघात है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और यह देखना चाहिए कि इसका प्रभाव सबसे अधिक किस वर्ग पर पड़ रहा है। संघ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार ने यह आंकड़े सार्वजनिक किए हैं कि कितने निजी वाहन वास्तव में प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। यदि नहीं तो केवल आयु के आधार पर वाहन प्रतिबंधित करना वैज्ञानिक और न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। सरकार को नीति बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि भारत जैसे देश में हर वर्ग के लोग निजी वाहन का उपयोग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करते हैं। संघ ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर आम जनता की आवाज को सुने।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। अखिल भारतीय हिमाचल सामाजिक संस्था संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष केएम लाल और राष्ट्रीय महासचिव जतिंदर कंवर ने केंद्र सरकार की ओर से 15 वर्ष पुराने वाहनों पर लगाए जा रहे प्रतिबंध पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय यदि व्यावसायिक (काॅमर्शियल) वाहनों तक सीमित रखा जाए तो उचित हो सकता है, लेकिन निजी वाहनों को भी इसके दायरे में लाना सरासर अनुचित है। आम जनता के साथ अन्याय है।काॅमर्शियल वाहन दिन-रात चलते हैं और अधिक दूरी तय करते हैं। इनसे प्रदूषण फैलने की संभावना अधिक रहती है। इसके विपरीत निजी वाहन आमतौर पर केवल कुछ घंटों के लिए सीमित दूरी तक ही उपयोग में लाए जाते हैं और अच्छी देखरेख के चलते अपेक्षाकृत कम प्रदूषण करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय आम आदमी की आर्थिक स्वतंत्रता पर कुठाराघात है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और यह देखना चाहिए कि इसका प्रभाव सबसे अधिक किस वर्ग पर पड़ रहा है। संघ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार ने यह आंकड़े सार्वजनिक किए हैं कि कितने निजी वाहन वास्तव में प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। यदि नहीं तो केवल आयु के आधार पर वाहन प्रतिबंधित करना वैज्ञानिक और न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। सरकार को नीति बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि भारत जैसे देश में हर वर्ग के लोग निजी वाहन का उपयोग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करते हैं। संघ ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर आम जनता की आवाज को सुने।