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Una News: किसानों को बारिश का इंतजार, गेहूं की बिजाई में देरी

Thu, 07 Nov 2024 05:09 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2024 05:09 PM IST
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Farmers wait for rain, delay in wheat sowing
35,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर गेहूं की होती है बिजाई, 80 फीसदी क्षेत्र है गैर सिंचित
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किसान नवंबर माह की शुरुआत में करते हैं गेहूं की बिजाई

आलू उत्पादक क्षेत्रों में नवंबर के अंत तक होती है गेेहूं का बिजाई
बीते कई दिन से बारिश न होने से जमीन में नहीं है बिजाई लायक नमी

बारिश में निर्भर इलाकों में किसानों की चिंता बढ़ी

संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। जिले में किसानों को गेहूं की बिजाई के लिए बारिश का इंतजार है। बीते कई दिन से बारिश न होने के कारण गेहूं की बिजाई करने के लिए जमीन में पर्याप्त नमी नहीं बची है। खासकर बारिश पर निर्भर इलाकों में बारिश के बाद ही बिजाई संभव हो पाएगी। वहीं, सिंचित इलाकों में अधिकतर किसान वर्तमान में आलू की फसल तैयार कर रहे हैं। उन्हें हर सप्ताह सिंचाई करनी पड़ रही है।
जिले के जिन इलाकों में आलू की फसल तैयार नहीं होती, वहां नवंबर की शुरुआत में किसान गेहूं की बिजाई कर देते हैं। जबकि, आलू तैयार करने वाले किसान नवंबर के अंत में या दिसंबर की शुरुआत में यह फसल लगाते हैं। इसलिए जिन इलाकों में आलू तैयार नहीं होता वहां के किसान नवंबर की शुरुआत में गेहूं की बिजाई करना सबसे उत्तम मानते हैं। इसके पीछे उनका तर्क है कि समय पर बिजाई करने से गेहूं की पैदावार अच्छी होती है। जबकि, आलू उत्पादक इलाकों में बिजाई देरी से होती है, जिसका सीधा असर पैदावार पर होता है।
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किसानों श्याम लाल, किशन चंद, सुरेंद्र कुमार, योगराज, महीमल सिंह ने बताया कि गेहूं की बिजाई के लिए बीज और खाद की खरीद कर ली है। बस बारिश का इंतजार है। कई दिन से अच्छी बारिश नहीं हुई। अब 11 नवंबर तक बारिश की आस है। अगर बारिश होती है तो 15 नवंबर से पहले बिजाई कर देंगे। वहीं, आलू की फसल तैयार करने वाले किसान विनोद कुमार, सुनील, प्रेम चंद, तरसेम लाल ने कहा कि वह प्रति वर्ष 25 नवंबर के आसपास बिजाई करते हैं। पैदावार अच्छी रहती है। हालांकि, समय पर बिजाई और देरी से होने में पैदावार का अंतर तो रहता है।
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कोट्स
Iजिले में 35,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर गेहूं की बिजाई होती है। इसमें 28,000 हेक्टेयर गैर सिंचित क्षेत्र है। जिले में 80 फीसदी क्षेत्र गैर सिंचित है। ऐसे में इन इलाकों में समय-समय पर बारिश की आवश्यकता होती है। बिजाई से पहले जमीन में नमी होने से बीज अच्छी तरह से अंकुरित होता है। इसलिए इस समय किसानों को बारिश का इंतजार है। उम्मीद है कि जल्द बारिश होगी और अच्छे स्तर पर बारिश होगी। -Iडॉ कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, कृषि विभाग ऊना।
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