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Una News: मौसम साफ होते ही आलू की बिजाई में जुटे किसान
Sun, 15 Sep 2024 04:04 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 15 Sep 2024 04:04 AM IST
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ऊना। बीते कुछ दिन से मौसम साफ होने के बाद आलू की बिजाई ने जोर पकड़ लिया है। किसान इन दिनों जमकर आलू की बिजाई में जुटे हैं। अभी तक 80 प्रतिशत के आसपास इलाकों में बिजाई पूरी हो चुकी है।
वहीं, दो से तीन दिन तक मौसम साफ रहा, तो शत-प्रतिशत बिजाई हो जाएगी। मौसम की यह स्थिति किसानों के लिए राहत भरी है। जानकारी के अनुसार ऊना में 2500 से 3000 हेक्टेयर जमीन पर आलू की बिजाई होती है। अगर मौसम साफ रहे तो 25 अगस्त से बिजाई शुरू हो जाती है। पांच सितंबर तक लगभग बिजाई पूरी हो जाती है, लेकिन इस बार लगातार बारिश के कारण बिजाई करीब 10-15 दिन देरी से शुरू हुई। इस कारण किसानों की चिंता इस फसल को लेकर बढ़ गई है। दरअसल ऊना जिला में तैयार होने वाली आलू की फसल पड़ोसी राज्य पंजाब और उत्तर प्रदेश से पहले मंडियों में पहुंचती है। इसका कारण यह है कि ऊना में बिजाई अन्य राज्यों के मुकाबले पहले होती है, लेकिन इस बार बिजाई में देरी हुई है। इससे अच्छे दाम न मिलने का डर भी बढ़ गया है।
किसान विनोद कुमार, प्रेम चंद, तरसेम लाल, सुनील, राजेश सैनी ने कहा कि रेतीली जमीन पर तो बारिश होने के कुछ घंटे बाद ही बिजाई संभव है, लेकिन मिट्टी वाली जमीन में बिजाई के लिए पर्याप्त नमी होना जरूरी है। एक बार बारिश हो जाए तो दो से तीन दिन बिजाई नहीं हो पाती। अब जो बिजाई बाकी है, वो ऐसे ही खेतों में हो रही है, जहां मिट्टी वाली जमीन है, जबकि रेतीली जमीन पर बिजाई हो चुकी है। ध्यान रहे कि आलू की 70 प्रतिशत फसल स्वां नदी के आसपास तैयार होती है। जहां कि जमीन रेतीली है। इस तरह की जमीन को आलू के लिए काफी अच्छी माना जाता है, लेकिन इसमें लगातार सिंचाई करनी पड़ती है।
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कोट्स
आलू की बिजाई इस समय जोरों पर है। जिला के किसान इस फसल को तैयार करने में निपुण हैं। अगर कृषि विभाग की कोई आवश्यकता पड़ती है तो किसान निसंकोच संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग
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वहीं, दो से तीन दिन तक मौसम साफ रहा, तो शत-प्रतिशत बिजाई हो जाएगी। मौसम की यह स्थिति किसानों के लिए राहत भरी है। जानकारी के अनुसार ऊना में 2500 से 3000 हेक्टेयर जमीन पर आलू की बिजाई होती है। अगर मौसम साफ रहे तो 25 अगस्त से बिजाई शुरू हो जाती है। पांच सितंबर तक लगभग बिजाई पूरी हो जाती है, लेकिन इस बार लगातार बारिश के कारण बिजाई करीब 10-15 दिन देरी से शुरू हुई। इस कारण किसानों की चिंता इस फसल को लेकर बढ़ गई है। दरअसल ऊना जिला में तैयार होने वाली आलू की फसल पड़ोसी राज्य पंजाब और उत्तर प्रदेश से पहले मंडियों में पहुंचती है। इसका कारण यह है कि ऊना में बिजाई अन्य राज्यों के मुकाबले पहले होती है, लेकिन इस बार बिजाई में देरी हुई है। इससे अच्छे दाम न मिलने का डर भी बढ़ गया है।
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किसान विनोद कुमार, प्रेम चंद, तरसेम लाल, सुनील, राजेश सैनी ने कहा कि रेतीली जमीन पर तो बारिश होने के कुछ घंटे बाद ही बिजाई संभव है, लेकिन मिट्टी वाली जमीन में बिजाई के लिए पर्याप्त नमी होना जरूरी है। एक बार बारिश हो जाए तो दो से तीन दिन बिजाई नहीं हो पाती। अब जो बिजाई बाकी है, वो ऐसे ही खेतों में हो रही है, जहां मिट्टी वाली जमीन है, जबकि रेतीली जमीन पर बिजाई हो चुकी है। ध्यान रहे कि आलू की 70 प्रतिशत फसल स्वां नदी के आसपास तैयार होती है। जहां कि जमीन रेतीली है। इस तरह की जमीन को आलू के लिए काफी अच्छी माना जाता है, लेकिन इसमें लगातार सिंचाई करनी पड़ती है।
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आलू की बिजाई इस समय जोरों पर है। जिला के किसान इस फसल को तैयार करने में निपुण हैं। अगर कृषि विभाग की कोई आवश्यकता पड़ती है तो किसान निसंकोच संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग