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Una News: सब कुछ जल गया बाबू जी... शुक्र है बच्चे बच गए
Sun, 26 Apr 2026 02:12 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 26 Apr 2026 02:12 PM IST
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ऊना के लालसिगीं में प्रवासी मजदूरों की झुग्गियों में लगी भीषण आग से उठती लपटें।संवाद
ऊना। सब कुछ जल गया बाबू जी.. पर शुक्र है मेरे बच्चे बच गए। प्रवासी महिला के यह शब्द लालसिंगी अग्निकांड के दौरान मौके पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गए। उसने मोबाइल फोन पर किसी से बात करते हुए रोते-बिलखते अपना दर्द बयां किया।
आंखों के सामने अपना आशियाना जलता देखना किसी भी इंसान के लिए सबसे बड़ा दुख होता है। ऊना के लालसिंगी क्षेत्र में शुक्रवार को कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला, जहां भयंकर आग ने प्रवासी मजदूरों की झुग्गियों को राख के ढेर में बदल दिया।
घटना के दौरान प्रवासी रोते नजर आए। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह प्रवासी मजदूर रोज की तरह नाश्ता कर गेहूं कटाई के लिए खेतों में गए थे। दिन में काम शुरू ही हुआ था कि झुग्गियों में आग लगने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही मजदूर दराटी खेतों में छोड़कर अपनी बस्ती की ओर दौड़ पड़े।
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मौके पर पहुंचकर जो दृश्य उन्होंने देखा, वह दिल दहला देने वाला था। आग की लपटों ने उनके अस्थायी आशियानों और उसमें रखे सामान को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया था। इस बीच जब उनकी नजर अपने सहमे हुए बच्चों पर पड़ी तो उन्होंने राहत की सांस ली। बच्चों को सुरक्षित देख मां-बाप की आंखों से आंसू बह निकले।
कुछ लोग अपनी जली हुई झुग्गियों में इस उम्मीद से पानी डालते नजर आए कि शायद कुछ सामान बच जाए लेकिन ज्यादातर परिवारों का सब कुछ जल चुका था। उनके पास पहने हुए कपड़ों के सिवाय कुछ भी नहीं रहा। दमकल विभाग की टीम आग बुझाने में जुटी रही।
बस दो जले नोट ही बचे
यूपी के मुरादाबाद निवासी बाबू राम ने बताया कि वह ऊना में पेंटर का काम करता है। सुबह काम पर गया था लेकिन आग लगने की सूचना मिलने पर जब वापस लौटा तो सब कुछ जल चुका था। मेहनत की कमाई भी आग में जल गई और अब सिर्फ 500 रुपये के दो जले हुए नोट ही बचे हैं।
बच्चे सुरक्षित मिले, यही राहत है
मुरादाबाद की सरवेश ने बताया कि वह रोज की तरह सुबह खाना बनाकर गेहूं कटाई के लिए गई थी और बच्चे झुग्गी में ही थे। आग की खबर मिलते ही वह दौड़कर पहुंची। बच्चों को सुरक्षित देख राहत मिली लेकिन झुग्गी और सारा सामान जल चुका था।
अब कहां जाएं, कुछ समझ नहीं आ रहा
मुरादाबाद के ही प्रवासी महावीर ने बताया कि इस हादसे में उनकी सारी जमा पूंजी खत्म हो गई है। अब आगे क्या करेंगे और कहां जाएंगे, यह समझ नहीं आ रहा। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि इस घटना में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ।
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आंखों के सामने अपना आशियाना जलता देखना किसी भी इंसान के लिए सबसे बड़ा दुख होता है। ऊना के लालसिंगी क्षेत्र में शुक्रवार को कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला, जहां भयंकर आग ने प्रवासी मजदूरों की झुग्गियों को राख के ढेर में बदल दिया।
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घटना के दौरान प्रवासी रोते नजर आए। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह प्रवासी मजदूर रोज की तरह नाश्ता कर गेहूं कटाई के लिए खेतों में गए थे। दिन में काम शुरू ही हुआ था कि झुग्गियों में आग लगने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही मजदूर दराटी खेतों में छोड़कर अपनी बस्ती की ओर दौड़ पड़े।
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मौके पर पहुंचकर जो दृश्य उन्होंने देखा, वह दिल दहला देने वाला था। आग की लपटों ने उनके अस्थायी आशियानों और उसमें रखे सामान को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया था। इस बीच जब उनकी नजर अपने सहमे हुए बच्चों पर पड़ी तो उन्होंने राहत की सांस ली। बच्चों को सुरक्षित देख मां-बाप की आंखों से आंसू बह निकले।
कुछ लोग अपनी जली हुई झुग्गियों में इस उम्मीद से पानी डालते नजर आए कि शायद कुछ सामान बच जाए लेकिन ज्यादातर परिवारों का सब कुछ जल चुका था। उनके पास पहने हुए कपड़ों के सिवाय कुछ भी नहीं रहा। दमकल विभाग की टीम आग बुझाने में जुटी रही।
बस दो जले नोट ही बचे
यूपी के मुरादाबाद निवासी बाबू राम ने बताया कि वह ऊना में पेंटर का काम करता है। सुबह काम पर गया था लेकिन आग लगने की सूचना मिलने पर जब वापस लौटा तो सब कुछ जल चुका था। मेहनत की कमाई भी आग में जल गई और अब सिर्फ 500 रुपये के दो जले हुए नोट ही बचे हैं।
बच्चे सुरक्षित मिले, यही राहत है
मुरादाबाद की सरवेश ने बताया कि वह रोज की तरह सुबह खाना बनाकर गेहूं कटाई के लिए गई थी और बच्चे झुग्गी में ही थे। आग की खबर मिलते ही वह दौड़कर पहुंची। बच्चों को सुरक्षित देख राहत मिली लेकिन झुग्गी और सारा सामान जल चुका था।
अब कहां जाएं, कुछ समझ नहीं आ रहा
मुरादाबाद के ही प्रवासी महावीर ने बताया कि इस हादसे में उनकी सारी जमा पूंजी खत्म हो गई है। अब आगे क्या करेंगे और कहां जाएंगे, यह समझ नहीं आ रहा। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि इस घटना में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ।