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Una News: गर्मी की मार, हर तीसरे दिन फसलों की सिंचाई कर रहे किसान
Fri, 24 May 2024 03:15 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 24 May 2024 03:15 AM IST
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किसानों के लिए फसलों को बचाना बना चुनौती
बोले- वर्तमान में ट्यूबवेल की सिंचाई साबित हो रही नाकाफी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला में भीषण गर्मी ने कृषि कार्यों को एक बड़ी चुनौती बना दिया है। किसानों को हर तीसरे दिन फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है। वहीं, दिन में पड़ने वाली तीखी धूप ने फसलों को झुलसाना शुरू कर दिया है। आलम यह है कि किसानों को सिंचाई के अलावा कीटनाशकों और खाद का छिड़काव करने के लिए उचित वातावरण नहीं मिल पा रहा। जानकारी के अनुसार वर्तमान में जिला में हरी सब्जियां और अगेती मक्की की खेती हो रही है। सभी फसलें सिंचाई सुविधा वाले इलाकों में तैयार हो रही हैं, लेकिन तीखी धूप ने सिंचित इलाकों में भी किसानों की कमर तोड़ दी है। हर दूसरे या तीसरे दिन फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है, ताकि जमीन में नमी रहे और फसलें खराब न होने पाएं। इसके बावजूद दोपहर के समय फसल मुरझाने लगी हैं। विशेषकर जिन किसानों के डीजल इंजन के संचालित होने वाले ट्यूबवेल से सिंचाई करनी है, उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। किसान लखविंदर सिंह, रामपाल, विजय कुमार, सुरेंद्र सिंह, अरविंद कुमार ने कहा कि वर्तमान का मौसम फसलों के लिहाज से ठीक नहीं है। मौसम इतना गर्म है कि फसल की वृद्धि बेहद धीमी गति से हो रही है। खाद या कीटनाशकों का छिड़काव करें, तो तेज धूप में फसलें झुलसने का डर रहता है। सिंचाई के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अगर बारिश हो जाए तो फसलों के लिए यह एक बड़ी राहत होगी।
कोट्स
भीषण गर्मी में अगेती मक्की और हरी सब्जियों को इस समय लगातार सिंचाई की आवश्यकता है। मैदानी इलाकों में यह फसलें तैयार हो रही हैं और किसानों को इसका काफी अनुभव है। यह किसानों की आय का मुख्य साधन है। उम्मीद है कि इस बार भी किसानों को अच्छी पैदावार मिलेगी। अगर कोई समस्या पेश आए तो कृषि विभाग के विशेषज्ञों से परामर्श लिया जा सकता है।
डाॅक्टर कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग
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बोले- वर्तमान में ट्यूबवेल की सिंचाई साबित हो रही नाकाफी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला में भीषण गर्मी ने कृषि कार्यों को एक बड़ी चुनौती बना दिया है। किसानों को हर तीसरे दिन फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है। वहीं, दिन में पड़ने वाली तीखी धूप ने फसलों को झुलसाना शुरू कर दिया है। आलम यह है कि किसानों को सिंचाई के अलावा कीटनाशकों और खाद का छिड़काव करने के लिए उचित वातावरण नहीं मिल पा रहा। जानकारी के अनुसार वर्तमान में जिला में हरी सब्जियां और अगेती मक्की की खेती हो रही है। सभी फसलें सिंचाई सुविधा वाले इलाकों में तैयार हो रही हैं, लेकिन तीखी धूप ने सिंचित इलाकों में भी किसानों की कमर तोड़ दी है। हर दूसरे या तीसरे दिन फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है, ताकि जमीन में नमी रहे और फसलें खराब न होने पाएं। इसके बावजूद दोपहर के समय फसल मुरझाने लगी हैं। विशेषकर जिन किसानों के डीजल इंजन के संचालित होने वाले ट्यूबवेल से सिंचाई करनी है, उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। किसान लखविंदर सिंह, रामपाल, विजय कुमार, सुरेंद्र सिंह, अरविंद कुमार ने कहा कि वर्तमान का मौसम फसलों के लिहाज से ठीक नहीं है। मौसम इतना गर्म है कि फसल की वृद्धि बेहद धीमी गति से हो रही है। खाद या कीटनाशकों का छिड़काव करें, तो तेज धूप में फसलें झुलसने का डर रहता है। सिंचाई के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अगर बारिश हो जाए तो फसलों के लिए यह एक बड़ी राहत होगी।
कोट्स
भीषण गर्मी में अगेती मक्की और हरी सब्जियों को इस समय लगातार सिंचाई की आवश्यकता है। मैदानी इलाकों में यह फसलें तैयार हो रही हैं और किसानों को इसका काफी अनुभव है। यह किसानों की आय का मुख्य साधन है। उम्मीद है कि इस बार भी किसानों को अच्छी पैदावार मिलेगी। अगर कोई समस्या पेश आए तो कृषि विभाग के विशेषज्ञों से परामर्श लिया जा सकता है।
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डाॅक्टर कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग