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हिमाचल: संजीव गांधी के खिलाफ एक और FIR, जवानों के आवासों की मरम्मत के 14 लाख सरकारी आवास पर खर्च करने का आरोप
Fri, 23 Oct 2026 03:07 PM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Fri, 23 Oct 2026 03:07 PM IST
सार
शिमला में डीआईजी संजीव गांधी के खिलाफ पुलिस भवनों और जवानों के आवासों की मरम्मत के बजट में कथित अनियमितताओं को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है।
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आईपीएस अधिकारी संजीव गांधी।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
डीआईजी संजीव गांधी के खिलाफ सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में एक और एफआईआर दर्ज की गई है। इस बार पुलिस जवानों के आवासों और पुलिस भवनों की मरम्मत के लिए आवंटित धनराशि के इस्तेमाल में कथित अनियमितताओं के आरोप हैं। पुलिस मुख्यालय की ऑडिट समिति की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस थाना सदर शिमला में 22 अक्तूबर को एफआईआर संख्या 139/2026 दर्ज की गई है। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(5) के तहत दर्ज किया गया है।
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ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान पुलिस भवनों और जवानों के सरकारी आवासों की मरम्मत के लिए आवंटित करीब 1.28 करोड़ रुपये में से 14,07,392 रुपये तत्कालीन एसएसपी संजीव गांधी के सरकारी आवास ‘साउथवुड’ पर खर्च किए जाना दर्शाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस आवास की मरम्मत के लिए सरकार या पुलिस मुख्यालय की ओर से अलग बजट स्वीकृत नहीं किया गया था। संबंधित कार्य मूल प्रस्तावों में भी शामिल नहीं थे और आवश्यक पूर्व स्वीकृतियों से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिले।
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रामपुर और शोघी के बजट पर भी सवाल
ऑडिट रिपोर्ट में रामपुर और शोघी के लिए आवंटित धनराशि को लेकर भी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, रामपुर में एसडीपीओ आवास की मरम्मत के लिए स्वीकृत 2.80 लाख रुपये भी शिमला स्थित तत्कालीन एसएसपी के सरकारी आवास पर खर्च दर्शाए गए। इसी तरह शोघी पुलिस बैरियर की गुमटी की मरम्मत के लिए निर्धारित 2.50 लाख रुपये की राशि भी एसएसपी आवास पर खर्च दिखाई गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि शोघी में मरम्मत कार्य पूरा होने के प्रमाण नहीं मिले।
ऑडिट रिपोर्ट में रामपुर और शोघी के लिए आवंटित धनराशि को लेकर भी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, रामपुर में एसडीपीओ आवास की मरम्मत के लिए स्वीकृत 2.80 लाख रुपये भी शिमला स्थित तत्कालीन एसएसपी के सरकारी आवास पर खर्च दर्शाए गए। इसी तरह शोघी पुलिस बैरियर की गुमटी की मरम्मत के लिए निर्धारित 2.50 लाख रुपये की राशि भी एसएसपी आवास पर खर्च दिखाई गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि शोघी में मरम्मत कार्य पूरा होने के प्रमाण नहीं मिले।
इसके अलावा, वर्ष 2023-24 में 1.62 लाख रुपये और वर्ष 2024-25 में 7.22 लाख रुपये सरकारी आवास पर खर्च दर्शाए जाने का उल्लेख है। इन कार्यों के लिए आवश्यक पूर्व स्वीकृति और जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा से संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं पाए गए।
50 प्रस्तावित कार्यों में से 22 का रिकॉर्ड मिला
ऑडिट रिपोर्ट में वर्ष 2025-26 के दौरान 28.67 लाख रुपये के बजट के तहत प्रस्तावित 50 कार्यों में से 22 कार्यों का रिकॉर्ड मिलने की बात कही गई है। इनमें 13 कार्य मूल स्वीकृत प्रस्ताव से बाहर के बताए गए हैं। प्रेस विज्ञप्ति में शोघी पुलिस पोस्ट की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके अनुसार, पुलिस पोस्ट अब भी एक कंटेनर में संचालित हो रही है और कर्मचारियों को कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करनी पड़ रही है। ऐसे में जवानों की सुविधाओं के लिए निर्धारित धनराशि के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे हैं।
50 प्रस्तावित कार्यों में से 22 का रिकॉर्ड मिला
ऑडिट रिपोर्ट में वर्ष 2025-26 के दौरान 28.67 लाख रुपये के बजट के तहत प्रस्तावित 50 कार्यों में से 22 कार्यों का रिकॉर्ड मिलने की बात कही गई है। इनमें 13 कार्य मूल स्वीकृत प्रस्ताव से बाहर के बताए गए हैं। प्रेस विज्ञप्ति में शोघी पुलिस पोस्ट की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके अनुसार, पुलिस पोस्ट अब भी एक कंटेनर में संचालित हो रही है और कर्मचारियों को कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करनी पड़ रही है। ऐसे में जवानों की सुविधाओं के लिए निर्धारित धनराशि के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे हैं।
फरवरी में हुआ था तबादला
संजीव गांधी का फरवरी 2026 में एसएसपी शिमला के पद से तबादला हो गया था। हालांकि, प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने अब तक पद के लिए निर्धारित सरकारी आवास खाली नहीं किया है। इसमें प्रचलित नियमों का हवाला देते हुए कहा गया है कि पद छोड़ने के बाद अधिकतम एक माह तक ही सरकारी आवास अपने पास रखने की अनुमति होती है। पुलिस मुख्यालय ने एसपी शिमला की ओर से मामला संज्ञान में लाए जाने के बाद एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने कहा कि मामले की जांच जारी है और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
संजीव गांधी का फरवरी 2026 में एसएसपी शिमला के पद से तबादला हो गया था। हालांकि, प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने अब तक पद के लिए निर्धारित सरकारी आवास खाली नहीं किया है। इसमें प्रचलित नियमों का हवाला देते हुए कहा गया है कि पद छोड़ने के बाद अधिकतम एक माह तक ही सरकारी आवास अपने पास रखने की अनुमति होती है। पुलिस मुख्यालय ने एसपी शिमला की ओर से मामला संज्ञान में लाए जाने के बाद एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने कहा कि मामले की जांच जारी है और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।