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विरोध के बावजूद पंचायतों को नगर निगम में कर दिया शामिल : सत्ती
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कहा, प्रतिनिधियों से मिलेंगे और आगामी रूपरेखा तैयार करेंगे
प्रदेश में चल रही दिशाहीन सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक सतपाल सत्ती ने कहा कि पंचायतों के विरोध के बावजूद नगर निगम ऊना में शामिल किया गया है। इसका भाजपा कड़े शब्दों में विरोध करती है। उन्होंने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि वे जल्द ही नगर निगम में शामिल की गई पंचायतों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे और आगामी रूपरेखा तैयार करेंगे। कहा कि वर्तमान की कांग्रेस सरकार दिशाहीन है और ग्रामीण, पंचायती राज और शहरी विकास विभाग के अधिकारी भी सरकार के निर्णय से अनजान हैं कि आगे किस दिशा में नगर निगम में काम करना है। सरकार के इस तरह के फरमान से जहां पंचायतों में कोई भी विकास कार्य नहीं होगा, दूसरी ओर मनरेगा जैसे स्कीमों के तहत ग्रामीण इलाकों के लोगों को मिलने वाली सुविधाओं से भी महरूम रहना पड़ेगा। नगर निगम में शामिल की गई पंचायतों ने विरोध दर्ज करवाया है। इसके बावजूद कोई भी जनसुनवाई नहीं की गई है और जबरन जनता के ऊपर निर्णय को थोपा गया है। नगर निगम में शामिल की गई पंचायतों में लाखों रुपये जिला प्रशासन, विभाग, विधायक निधि सहित खर्च करने को लंबित पड़े हैं। लेकिन, एकाएक पंचायतों को नगर निगम में शामिल करने से अब उस पैसे का किस स्तर पर इस्तेमाल आगे करना है, इसे लेकर कोई स्पष्ट नीति सरकार नहीं बना पाई है। ऊना में खनन माफिया सक्रिय है। आरोप लगाया कि इनमें कांग्रेस नेताओं की संलिप्तता से आज दिन तक माफिया पर कोई भी बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। मात्र रोजमर्रा के काम के लिए इस्तेमाल की जाने वाली खनन सामग्री में लगे लोगों के ही चालान काटे जा रहे हैं। उद्योग मंत्री के नए क्रशर और लीज पर रोक के निर्णय का भाजपा तब स्वागत करेगी जब धरातल पर इसका असर देखने को मिलेगा।
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प्रदेश में चल रही दिशाहीन सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक सतपाल सत्ती ने कहा कि पंचायतों के विरोध के बावजूद नगर निगम ऊना में शामिल किया गया है। इसका भाजपा कड़े शब्दों में विरोध करती है। उन्होंने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि वे जल्द ही नगर निगम में शामिल की गई पंचायतों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे और आगामी रूपरेखा तैयार करेंगे। कहा कि वर्तमान की कांग्रेस सरकार दिशाहीन है और ग्रामीण, पंचायती राज और शहरी विकास विभाग के अधिकारी भी सरकार के निर्णय से अनजान हैं कि आगे किस दिशा में नगर निगम में काम करना है। सरकार के इस तरह के फरमान से जहां पंचायतों में कोई भी विकास कार्य नहीं होगा, दूसरी ओर मनरेगा जैसे स्कीमों के तहत ग्रामीण इलाकों के लोगों को मिलने वाली सुविधाओं से भी महरूम रहना पड़ेगा। नगर निगम में शामिल की गई पंचायतों ने विरोध दर्ज करवाया है। इसके बावजूद कोई भी जनसुनवाई नहीं की गई है और जबरन जनता के ऊपर निर्णय को थोपा गया है। नगर निगम में शामिल की गई पंचायतों में लाखों रुपये जिला प्रशासन, विभाग, विधायक निधि सहित खर्च करने को लंबित पड़े हैं। लेकिन, एकाएक पंचायतों को नगर निगम में शामिल करने से अब उस पैसे का किस स्तर पर इस्तेमाल आगे करना है, इसे लेकर कोई स्पष्ट नीति सरकार नहीं बना पाई है। ऊना में खनन माफिया सक्रिय है। आरोप लगाया कि इनमें कांग्रेस नेताओं की संलिप्तता से आज दिन तक माफिया पर कोई भी बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। मात्र रोजमर्रा के काम के लिए इस्तेमाल की जाने वाली खनन सामग्री में लगे लोगों के ही चालान काटे जा रहे हैं। उद्योग मंत्री के नए क्रशर और लीज पर रोक के निर्णय का भाजपा तब स्वागत करेगी जब धरातल पर इसका असर देखने को मिलेगा।