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बीमार और संक्रमित गाय बेचने पर डेयरी फार्म मालिक को जुर्माना
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला उपभोक्ता फोरम ऊना के अध्यक्ष भुवनेश अवस्थी ने उपभोक्ता को बीमार और संक्रमित गाय बेचने पर डेयरी फार्म मालिक को 92,000 रुपये गाय की कीमत नौ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। फोरम ने मानसिक परेशानी और तकलीफ की एवज में 15000 रुपये और कानूनी खर्च 10,000 रुपये भी उपभोक्ता को देने का फैसला सुनाया है।
उपभोक्ता के अधिवक्ता साहिल ठाकुर ने बताया कि शिकायतकर्ता ने सर्वजीत चीमा डेयरी फॉर्म बट नूरा कलां कपूरथला पंजाब से दिसंबर 2021 में एक गाय और एक भैंस खरीदी थी। पशुओं को बेचते समय प्रतिवादी ने शिकायतकर्ता को यह आश्वासन दिया था कि गाय रोजाना 35 लीटर दूध देती है, लेकिन बाद में गाय ने दूध देना कम कर दिया।
जिस पर शिकायतकर्ता मान सिंह निवासी भड़ोलिया खुर्द ऊना ने गाय की डॉक्टरी जांच भी करवाई। जांच में पता चला कि गाय पहले से ही बीमार थी और संक्रमण के कारण इसने दूध देना कम कर दिया था। शिकायतकर्ता ने इस बात की जानकारी प्रतिवादी को दी, लेकिन उसने गाय को वापस लेने से मना कर दिया।
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बाद में मजबूरन शिकायतकर्ता को उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उपभोक्ता फोरम ने सभी तथ्यों व सबूतों और साक्ष्यों की जांच पड़ताल के बाद प्रतिवादी को सेवाओं में कमी और जानबूझकर संक्रमित पशु बेचने को अनुचित व्यापार अभ्यास माना। फोरम ने सभी तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर उपभोक्ता के हक में अपना फैसला सुनाया।
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ऊना। जिला उपभोक्ता फोरम ऊना के अध्यक्ष भुवनेश अवस्थी ने उपभोक्ता को बीमार और संक्रमित गाय बेचने पर डेयरी फार्म मालिक को 92,000 रुपये गाय की कीमत नौ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। फोरम ने मानसिक परेशानी और तकलीफ की एवज में 15000 रुपये और कानूनी खर्च 10,000 रुपये भी उपभोक्ता को देने का फैसला सुनाया है।
उपभोक्ता के अधिवक्ता साहिल ठाकुर ने बताया कि शिकायतकर्ता ने सर्वजीत चीमा डेयरी फॉर्म बट नूरा कलां कपूरथला पंजाब से दिसंबर 2021 में एक गाय और एक भैंस खरीदी थी। पशुओं को बेचते समय प्रतिवादी ने शिकायतकर्ता को यह आश्वासन दिया था कि गाय रोजाना 35 लीटर दूध देती है, लेकिन बाद में गाय ने दूध देना कम कर दिया।
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जिस पर शिकायतकर्ता मान सिंह निवासी भड़ोलिया खुर्द ऊना ने गाय की डॉक्टरी जांच भी करवाई। जांच में पता चला कि गाय पहले से ही बीमार थी और संक्रमण के कारण इसने दूध देना कम कर दिया था। शिकायतकर्ता ने इस बात की जानकारी प्रतिवादी को दी, लेकिन उसने गाय को वापस लेने से मना कर दिया।
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बाद में मजबूरन शिकायतकर्ता को उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उपभोक्ता फोरम ने सभी तथ्यों व सबूतों और साक्ष्यों की जांच पड़ताल के बाद प्रतिवादी को सेवाओं में कमी और जानबूझकर संक्रमित पशु बेचने को अनुचित व्यापार अभ्यास माना। फोरम ने सभी तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर उपभोक्ता के हक में अपना फैसला सुनाया।