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चिंतपूर्णी में अब पार्किंग पर्ची में गोलमाल
ब्यूरो, अमर उजाला, ऊना।
Updated Sat, 31 Dec 2016 11:04 PM IST
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नोटबंदी के दौरान काले धन को सफेद करने के मामले के बाद चिंतपूर्णी में अब कथित तौर पर कार पार्किंग पर्ची के गोलमाल का खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक चिंतपूर्णी बस अड्डे के समीप हिमाचल पथ परिवहन निगम की ओर से ठेके पर संचालित माता चिंतपूर्णी कार पार्किंग में 100 रुपये की पर्ची में कथित तौर पर गोलमाल चल रहा है।
श्रद्धालुओं को कार पार्किंग की एवज में किसी दूसरे वाहन की पहले से कटी हुई पर्ची थमा दी जा रही है। डिजिटल पर्चियों में न तो संबंधित वाहन का नंबर अंकित है और न ही उस वाहन का पार्किंग में प्रवेश करने का समय सही है। जाहिर तौर पर पार्किंग शुल्क लेने और वाहन चालक से पर्ची की कलेक्शन के बाद रसीद को फाड़ने के बजाय वही पर्ची दूसरे वाहन चालकों को थमा दी जा रही है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब चंडीगढ़ से आए एक श्रद्धालु को कार पार्किंग के बदले प्रात: 10:49 की डिजिटल पर्ची थमाई गई। जबकि उक्त वाहन का पार्किंग में प्रवेश का समय दोपहर करीब दो बजे का था। उक्त पर्ची पर वाहन नंबर भी कोई और अंकित था। श्रद्धालु ने जब इस बारे में जानकारी लेनी चाहिए तो पर्ची काटने वाला कारिंदा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसी तरह की शिकायतें कुछ और श्रद्धालुओं ने भी की हैं।
गौर हो कि चिंतपूर्णी बस अड्डा की पार्किंग में रोजाना कई शिफ्टों में हजारों की संख्या में वाहन पार्क होते हैं। हालांकि एचआरटीसी ने उक्त पार्किंग को ठेके पर दे रखा है, लेकिन पार्किंग शुल्क विभाग के नाम से ही लिया जा रहा है। श्रद्धालु मनीश दीक्षित ने इस मामले की जांच की मांग की है। इस तरह के गोरखधंधे से अड्डा पार्किंग के नाम पर लाखों के गोलमाल की आशंका जताई जा रही है। वहीं, पार्किंग में पार्क किए गए वाहनों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे है। अगर पर्ची में संबंधित वाहन का नंबर और अन्य सही जानकारी अंकित नहीं तो ऐसे में वाहनों की सुरक्षा का जिम्मेवार कौन है।
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उधर, इस संदर्भ में देहरा डिपो के आरएम राजेंद्र सिंह पठानिया का कहना है कि उक्त पार्किंग जमीन सहित ठेकेदार को तीस साल की लीज पर दी गई है। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की है। अगर कहीं निर्धारित शुल्क से ज्यादा लिया जा रहा है या अनुबंध के तहत किसी और नियम की अवहेलना हो रही तो विभाग इसकी जांच करेगा।
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श्रद्धालुओं को कार पार्किंग की एवज में किसी दूसरे वाहन की पहले से कटी हुई पर्ची थमा दी जा रही है। डिजिटल पर्चियों में न तो संबंधित वाहन का नंबर अंकित है और न ही उस वाहन का पार्किंग में प्रवेश करने का समय सही है। जाहिर तौर पर पार्किंग शुल्क लेने और वाहन चालक से पर्ची की कलेक्शन के बाद रसीद को फाड़ने के बजाय वही पर्ची दूसरे वाहन चालकों को थमा दी जा रही है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब चंडीगढ़ से आए एक श्रद्धालु को कार पार्किंग के बदले प्रात: 10:49 की डिजिटल पर्ची थमाई गई। जबकि उक्त वाहन का पार्किंग में प्रवेश का समय दोपहर करीब दो बजे का था। उक्त पर्ची पर वाहन नंबर भी कोई और अंकित था। श्रद्धालु ने जब इस बारे में जानकारी लेनी चाहिए तो पर्ची काटने वाला कारिंदा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसी तरह की शिकायतें कुछ और श्रद्धालुओं ने भी की हैं।
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गौर हो कि चिंतपूर्णी बस अड्डा की पार्किंग में रोजाना कई शिफ्टों में हजारों की संख्या में वाहन पार्क होते हैं। हालांकि एचआरटीसी ने उक्त पार्किंग को ठेके पर दे रखा है, लेकिन पार्किंग शुल्क विभाग के नाम से ही लिया जा रहा है। श्रद्धालु मनीश दीक्षित ने इस मामले की जांच की मांग की है। इस तरह के गोरखधंधे से अड्डा पार्किंग के नाम पर लाखों के गोलमाल की आशंका जताई जा रही है। वहीं, पार्किंग में पार्क किए गए वाहनों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे है। अगर पर्ची में संबंधित वाहन का नंबर और अन्य सही जानकारी अंकित नहीं तो ऐसे में वाहनों की सुरक्षा का जिम्मेवार कौन है।
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उधर, इस संदर्भ में देहरा डिपो के आरएम राजेंद्र सिंह पठानिया का कहना है कि उक्त पार्किंग जमीन सहित ठेकेदार को तीस साल की लीज पर दी गई है। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की है। अगर कहीं निर्धारित शुल्क से ज्यादा लिया जा रहा है या अनुबंध के तहत किसी और नियम की अवहेलना हो रही तो विभाग इसकी जांच करेगा।