{"_id":"5dc451dd8ebc3e5b0d457adc","slug":"cow-una-news-sml313413577","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुधारू पशुओं को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुधारू पशुओं को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू
विज्ञापन
ऊना में दुधारू गाय को चिन्हित करने के लिए टैग लगाते हुए।
- फोटो : Una
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऊना। जिले में दुधारू गाय और भैंसों को चिह्नित करने के लिए टैग लगाने का काम शुरू हो गया है। अपर बसाल पंचायत के नरेश कुमार के डेयरी फार्म में चार गायों को विशेष प्रकार के टैग लगाकर इसका शुभारंभ किया गया।
यह काम केंद्र और हिमाचल प्रदेश सरकार की पशु उत्पादकता और स्वास्थ्य योजना के सूचना नेटवर्क (इनाफ) के तहत किया जा रहा है। उपनिदेशक पशु पालन विभाग डॉ. जय सिंह सेन ने बताया कि योजना के तहत सभी दुधारू गाय और भैंसों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। दुधारु पशुओं को 12 डिजिट के यूनिक पहचान नंबर (यूआईडी) के साथ प्लास्टिक टैग विधि से पहचान की जा रही है। चिह्नित पशुओं के डाटा इनाफ ऐप के डाटाबेस पर अपलोड किया जा रहा है। इस ऐप से पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान का पूरा ब्योरा रखा जा सकेगा। इससे पशुओं की नस्ल को सुधारने में सहायता मिलेगी। साथ ही इसकी मॉनिटरिंग शिमला से लेकर दिल्ली में बैठकर कहीं भी की जा सकेगी।
उन्होंने बताया कि इस काम के लिए विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग और जरूरी सामग्री दी गई है। उन्होंने सभी पशुपालकों से इस योजना को सफल बनाने की अपील की है। इस मौके पर डॉ. सुरेश धीमान सहायक निदेशक (परियोजना), डॉ. उपेंद्र शर्मा सहायक निदेशक (प्रसार), डॉ. राकेश भट्टी वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी ऊना, डॉ. परमेश डोगरा पशु चिकित्सा अधिकारी बसाल, सुशील कुमार, रजत तथा दीपक सहित अन्य भी उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह काम केंद्र और हिमाचल प्रदेश सरकार की पशु उत्पादकता और स्वास्थ्य योजना के सूचना नेटवर्क (इनाफ) के तहत किया जा रहा है। उपनिदेशक पशु पालन विभाग डॉ. जय सिंह सेन ने बताया कि योजना के तहत सभी दुधारू गाय और भैंसों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। दुधारु पशुओं को 12 डिजिट के यूनिक पहचान नंबर (यूआईडी) के साथ प्लास्टिक टैग विधि से पहचान की जा रही है। चिह्नित पशुओं के डाटा इनाफ ऐप के डाटाबेस पर अपलोड किया जा रहा है। इस ऐप से पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान का पूरा ब्योरा रखा जा सकेगा। इससे पशुओं की नस्ल को सुधारने में सहायता मिलेगी। साथ ही इसकी मॉनिटरिंग शिमला से लेकर दिल्ली में बैठकर कहीं भी की जा सकेगी।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि इस काम के लिए विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग और जरूरी सामग्री दी गई है। उन्होंने सभी पशुपालकों से इस योजना को सफल बनाने की अपील की है। इस मौके पर डॉ. सुरेश धीमान सहायक निदेशक (परियोजना), डॉ. उपेंद्र शर्मा सहायक निदेशक (प्रसार), डॉ. राकेश भट्टी वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी ऊना, डॉ. परमेश डोगरा पशु चिकित्सा अधिकारी बसाल, सुशील कुमार, रजत तथा दीपक सहित अन्य भी उपस्थित रहे।
विज्ञापन