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Una News: गेहूं की फसल पर मंडराने लगे संकट के बादल

Mon, 04 Nov 2024 11:56 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 04 Nov 2024 11:56 PM IST
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Clouds of crisis started looming over the wheat crop
गेहूं की फसल पर मंडराने लगे संकट के बादल
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10 से 15 नवंबर तक बिजाई के लिए है सही समय
35,514 हेक्टेयर भूमि में की जाती है गेहूं की बिजाई
80 हजार मीट्रिक टन तक होती है हर साल पैदावार
अमर उजाला ग्राउंड रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। कृषि प्रधान जिला ऊना में गेहूं की बिजाई पर संकट के बदले मंडराने लगे हैं। गैर सिंचित इलाकों में किसानों को पूरी तरह से बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके चलते नवंबर के पहले हफ्ते में भी बारिश न होने के कारण किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। बंगाणा उपमंडल में भले ही किसानों ने गेहूं की बिजाई का कार्य शुरू कर दिया है लेकिन 500 हेक्टेयर भूमि पर भी गेहूं की बिजाई अभी बाकी है। यह एरिया गैर सिंचित क्षेत्र में आता है। विभाग ने रबी फसल के सीजन के दौरान गेहूं के अलावा जौ, बाजरा, सरसों, चने सहित अन्य बीज उपलब्ध करवा दिए हैं। 5000 क्विंटल बीज वर्तमान में उपलब्ध है और साढ़े आठ हजार क्विंटल की खरीद पंजाब, हरियाणा और यूपी सहित बाहरी राज्यों से की गई है। इसकी एक ट्रक की खेप ऊना जिले में पहुंच गई है। ऐसा दावा कृषि विभाग के अधिकारियों ने किया है। जिले के अधिकतर क्षेत्रों में आलू की बिजाई कर दी गई है। विभाग के अनुसार बारिश न होने की सूरत में बीजी गई गेहूं की फसल पर खराब होने का खतरा मंडराने लगा है। अधिकारियों का तर्क है कि 10 से लेकर 15 नवंबर तक गेहूं की बिजाई के लिए समय काफी उपयुक्त माना जाता है। अगर इस दौरान बारिश हुई तो यह किसानों के लिए वरदान साबित होगी। जिले में 35,514 हेक्टेयर भूमि में गेहूं की बिजाई होती है। 500 हेक्टेयर गैर संचित भूमि में किसान गेहूं की बिजाई करते हैं और सालाना 80 हजार मीट्रिक टन की गेहूं की पैदावार होती है। इस बार अगर समय रहते बारिश नहीं हुई, तो इसका असर गेहूं की पैदावार पर देखने को मिलेगा। कृषि विभाग ऊना के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने कहा कि 10 से 15 नवंबर तक गेहूं की बिजाई का उपयुक्त समय है। जिले कई क्षेत्रों में बिजाई कर दी गई है। खेतों में अच्छी नमी होने की सूरत में गेहूं की फसल निकल भी आई है लेकिन बारिश न होने से फसल के खराब होने का संशय बरकरार है।
गगरेट के घनारी क्षेत्र के किसान सुशील जरियाल ने बताया कि इस बार गेहूं की बुआई में देरी हो रही है। इसके पीछे मुख्य कारण बारिश का न होना और बीज की कमी है। किसानों को बीज न मिलने से बुआई का काम प्रभावित हो रहा है। हालांकि, डिपुओं में खाद उपलब्ध है, लेकिन बीज और बारिश की कमी से परेशानी आ रही है।
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अंब क्षेत्र से राष्ट्रीय स्वतंत्र किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर सीता राम ने बरसात के कारण गेंहू की बिजाई न होने पर चिंता प्रकट की है। उन्होंने बताया कि बारिश न होने के कारण फसल बीजने में देरी हुई। गेहूं की फसल 15 नवंबर से पहले बीज दी जाती है लेकिन अभी खेत सूखे पड़े हैं। बारिश न हुई तो पचास प्रतिशत से अधिक खेत खाली रहेंगे।
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बंगाणा क्षेत्र के विनोद शर्मा, लाल शाह का कहना है कि पहले मक्की की फसल को सूखे की मार का सामना करना पड़ा और अब गेहूं की फसल की बिजाई के लिए किसानों को बिना बारिश के बिजाई करनी पड़ रही है। कुछ किसानों ने बिजाई कर दी है। कुछ कर रहे हैं और कुछ किसान अभी तक बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

सदर ऊना क्षेत्र से हिमाचल किसान यूनियन के प्रधान सरदार रंजीत सिंह का कहना है कि बारिश न होने के कारण खेतों में बीजी गई गेहूं की फसल को नुकसान होगा। पहले भी बारिश न होने से मक्की और आलू की फसल प्रभावित हुई है। अब गेहूं की पैदावार पर भी इसका असर पड़ेगा।
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