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Una News: सीबीएसई स्कूलों का सपना अधूरा, किताबें गायब और शिक्षक नदारद

Sat, 23 May 2026 12:07 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Sat, 23 May 2026 12:07 AM IST
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CBSE schools' dream unfulfilled, books missing and teachers absent
ऊना। प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न में बदलकर शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने का दावा किया था। स्कूल खुलने के डेढ़ माह बाद भी कई सीबीएसई स्कूलों में न तो पूरा स्टाफ पहुंच पाया है और न ही विद्यार्थियों को निर्धारित किताबें मिल सकी हैं। हालत यह है कि नौवीं कक्षा के छात्रों से बांटी गई किताबें वापस ले ली गईं और अब शिक्षक मोबाइल की पीडीएफ फाइलों के सहारे पढ़ाई करवाने को मजबूर हैं।
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नई शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरुआत में अभिभावकों और विद्यार्थियों में उत्साह जरूर दिखाई दिया लेकिन अब हालात चिंता पैदा करने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि सरकार ने बिना पर्याप्त तैयारी के स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न में बदल दिया, जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। सबसे अधिक असर उन विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जिनकी पढ़ाई अभी तक सही तरीके से शुरू ही नहीं हो पाई। प्रदेश सरकार पहली से बारहवीं तक सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करने की योजना पर काम कर रही लेकिन स्कूलों में अभी मूलभूत व्यवस्थाएं ही अधूरी हैं। कई स्कूलों में विषय अध्यापकों की कमी बनी हुई है। कुछ शिक्षकों ने तबादले लेकर अन्य स्कूलों का रुख कर लिया है जबकि कई शिक्षक इन दिनों चुनावी ड्यूटी में व्यस्त हैं। ऐसे में पढ़ाई का पूरा ढांचा प्रभावित हो गया है।
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पहले किताबें दीं, फिर वापस ली

सबसे ज्यादा परेशानी नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को झेलनी पड़ रही है। शिक्षा विभाग ने पहले एनसीईआरटी की किताबें वितरित कीं लेकिन बाद में सिलेबस में बदलाव का हवाला देकर किताबें वापस मांग ली गईं। अब विद्यार्थी नई किताबों के इंतजार में हैं। किताबें न होने के कारण शिक्षक बच्चों को मोबाइल और प्रिंटेड पीडीएफ के माध्यम से पढ़ा रहे हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जहां निजी स्कूलों में तीन से चार अध्याय तक पढ़ाई पूरी हो चुकी है, वहीं सरकारी सीबीएसई स्कूलों के विद्यार्थी अभी तक सिलेबस और किताबों के इंतजार में ही उलझे हुए हैं।
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सरकार ने इन स्कूलों के लिए अलग शिक्षक कैडर बनाने की घोषणा भी की थी लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आई है। न तो स्थायी स्टाफ तैनात किया गया और न ही विषय विशेषज्ञ उपलब्ध करवाए गए हैं। ऐसे में शिक्षा सुधार के बड़े दावे फिलहाल कागजों तक सीमित दिखाई दे रहे हैं।


शिक्षा उपनिदेशक अनिल तक्खी ने बताया कि नौवीं कक्षा का सिलेबस बदला जा रहा और नई किताबों की मांग भेज दी गई है। जल्द ही विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध करवा दी जाएंगी।
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