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Una News: बाबा रुद्रानंद आश्रम में नई फसल पर लगाया जाता है भोग

Sun, 21 Apr 2024 01:50 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Sun, 21 Apr 2024 01:50 AM IST
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Bhog is offered to the new crop in Baba Rudranand Ashram.
डेरा बाबा रुद्धा नंद जी का फाईल चित्र।
170 साल से डेरा में ब्रह्मचारी और ब्राह्मण महंत ही रहे मुखिया
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संवाद न्यूज एजेंसी।

नारी (ऊना)। हिमाचल ही नहीं, अपितु उत्तरी भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में ऊना जिले के नारी गांव में स्थित डेरा बाबा रूद्रानंद प्रसिद्ध तपोभूमि है। जहां कितने ही लोगों की श्रद्धा जुड़ी है। आश्रम और धूने के प्रति लोगों की श्रद्धा वर्षों से चली आ रही है। आज भी प्रत्येक त्योहार पर यहां श्रद्धालु शीष नवाने आते हैं।
बतां दें 170 सालों से डेरा में आज तक ब्रह्मचारी और ब्राह्मण महंत ही मुखिया रहे हैं। डेरा में धूने का इतिहास से पहले आदि गुरु बाबा रूद्रानंद जी के बारे में जानना अत्यंत जरूरी है, जो इस आश्रम के संस्थापक हैं। आदि गुरु 1008 बाबा रूद्र जी का जन्म आश्रम के निकट गांव बडसाला नलोइया भारद्वाज ब्राह्मण परिवार में पंडित गढ़ियाराम के घर में हुआ। माता-पिता ने इनका नाम रूद्र रखा। रुद्रु बचपन से ही प्रभु भक्ति में लीन रहते थे। भक्ति में लीन रूद्रु जी को बाबा दयाल दास जी के दर्शन हुए। उनके मार्गदर्शन में ही रूद्र ने बनारस के ब्रह्मानंद को अपना गुरु बनाया। कई स्थानों पर तपस्या करने के बाद आखिर में गांव नारी में अपना डेरा लगा लिया।
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उन्होंने कुटिया बनाकर 1850 ई. को बसंत पंचमी के दिन अखंड धूने की स्थापना की। धूने के पास बैठकर तपस्या करते हुए रूद्रू से कुछ गांववासियों ने दुर्व्यवहार किया। इसके बाद रुद्रू वहां से जोगी पंगा में चले गए। क्षेत्र के लोग 6 वर्ष बाद उन्हें वापस उसी स्थान पर ले आए। लोगों ने उनके आश्रम के लिए बहुत सारी जमीन दी। जहां बैठकर तपस्या करते उन्होंने बहुत सारी सिद्धियां प्राप्त कर लीं। उनके धूने पर आकर धीरे-धीरे लोगों की मनोकामनाएं पूरी होने लगीं। धूने की विभूति आज भी कई प्रकार की दवाइयों का काम करती है। 19वीं शताब्दी पूरी होने के कुछ समय बाद ही रूद्रानंद महाराज संसारिक य़ात्रा पूर्ण कर प्रभु भक्ति में लीन हो गए। उन्होंने एक शिष्य परमानंद को चुना, जिन्होंने आश्रम की परंपराओं को उनके कहे अनुसार ही आगे बढ़ाया। यह धूना लगातार 170 वर्षों से चल रहा है।
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मान्यता- दवाई से बढ़कर है धूने की विभूति
मान्यता है धूने की विभूति दवाई से बढ़कर है, अगर श्रद्धा के साथ इसका सेवन किया जाए। जिले के ही नहीं, बल्कि पूरे भारत से श्रद्धालु बाबा रूद्रानंद के अखंड धूने के प्रति श्रद्धा रखते हैं। नई फसल आने पर हर व्यक्ति फसल को खुद खाना शुरू करने से पहले नई फसल को धूने पर चढ़ाता है। लोगों का मानना है कि धूने की परिक्रमाएं करने से मानसिक रोगी भी ठीक हो जाते हैं तथा लोगो को शांति प्रदान होती है। इस आश्रम का प्रमुख देवता वेद प्रमाणित अग्नि ही है।
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