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Una News: श्रीमद्भागवत में भक्त प्रह्लाद का किया सुंदर चित्रण
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आचार्य श्री विवेक विशिष्ठ
बाथू गांव के मोहल्ला लंबी बड़ी में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का चौथा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
टाहलीवाल (ऊना)। महिला मंडल की ओर से गांव बाथू के मोहल्ला लंबी बड़ी में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन आचार्य विवेक विशिष्ठ जी ने भक्त प्रह्लाद की कथा का सुंदर चित्रण किया। कथावाचक ने वर्णन किया कि कैसे भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और विश्वास ने भगवान नारायण को प्रकट होने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने नृसिंह रूप में अवतार लेकर उनकी रक्षा की। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार भगवान नारायण ने हिरण्यकश्यप के सभी वरदानों को शून्य कर दिया और अंत में उसे मृत्युदंड दिया।
आचार्य जी ने भावपूर्ण ढंग से बताया कि भगवान किस प्रकार अपने भक्त के लिए स्वयं खंभे से प्रकट होते हैं और उन्हें अपने कंठ से लगाकर उनकी रक्षा करते हैं। इस प्रसंग के माध्यम से भक्तों को यह संदेश दिया गया कि भगवान अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं, चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों। श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की भव्यता देखने को मिली। भगवान के जन्म के समय गोकुल और मथुरा में जो आनंद और उल्लास छाया था, उसका जीवंत चित्रण आचार्य जी ने किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
टाहलीवाल (ऊना)। महिला मंडल की ओर से गांव बाथू के मोहल्ला लंबी बड़ी में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन आचार्य विवेक विशिष्ठ जी ने भक्त प्रह्लाद की कथा का सुंदर चित्रण किया। कथावाचक ने वर्णन किया कि कैसे भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और विश्वास ने भगवान नारायण को प्रकट होने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने नृसिंह रूप में अवतार लेकर उनकी रक्षा की। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार भगवान नारायण ने हिरण्यकश्यप के सभी वरदानों को शून्य कर दिया और अंत में उसे मृत्युदंड दिया।
आचार्य जी ने भावपूर्ण ढंग से बताया कि भगवान किस प्रकार अपने भक्त के लिए स्वयं खंभे से प्रकट होते हैं और उन्हें अपने कंठ से लगाकर उनकी रक्षा करते हैं। इस प्रसंग के माध्यम से भक्तों को यह संदेश दिया गया कि भगवान अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं, चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों। श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की भव्यता देखने को मिली। भगवान के जन्म के समय गोकुल और मथुरा में जो आनंद और उल्लास छाया था, उसका जीवंत चित्रण आचार्य जी ने किया।

आचार्य श्री विवेक विशिष्ठ
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