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Una News: शिक्षण संस्थानों में पीईटी बोतलों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध
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कई बैठकों और समारोह में 500 एमएल पीईटी बोतल में दिया जा रहा पानी
जिला प्रशासन ने इस्तेमाल को बताया हानिकारक
कहा- वाटर डिस्पेंसर के पानी का करें इस्तेमाल, न बरते लापरवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत जिला प्रशासन ने सभी शिक्षण संस्थानों में पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट (पीईटी) पानी की बोतलों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय पर्यावरण को हो रहे नुकसान और पीईटी (सामान्य प्लास्टिक) बोतलों के अन्य दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रशासन की ओर से जारी आदेश में विशेष रूप से 500 एमएल की पीईटी पानी की बोतलों का उपयोग न करने को कहा गया है। आमतौर पर बैठकों व सार्वजनिक आयोजनों में इन बोतलों का प्रयोग होता है, जो पर्यावरणीय दृष्टिकोण से हानिकारक है। पर्यटन स्थलों पर ऐसी बोतलों का कचरा बिखरा हुआ देखा जाता है, जिससे प्रदेश की छवि को भी नुकसान पहुंचता है। प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि प्लास्टिक बोतलों के स्थान पर ईको-फ्रेंडली बर्तनों अथवा कांच की बोतलों का उपयोग किया जाए।
स्कूलों की सफाई में पॉलिथीन बना बाधा
स्कूल परिसरों की सफाई व्यवस्था में पॉलिथीन एक बड़ी चुनौती बन गया है। सफाई के दौरान पॉलिथीन युक्त कचरे की अधिकता देखी गई है, जिससे पानी की निकासी में रुकावट सहित अन्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। प्लास्टिक के नष्ट न होने की वजह से यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक सोमलाल धीमान ने जानकारी दी कि सभी स्कूलों को पीईटी बोतलों में पानी की आपूर्ति न करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में निरीक्षण के दौरान यदि आदेशों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित संस्थान के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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जिला प्रशासन ने इस्तेमाल को बताया हानिकारक
कहा- वाटर डिस्पेंसर के पानी का करें इस्तेमाल, न बरते लापरवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत जिला प्रशासन ने सभी शिक्षण संस्थानों में पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट (पीईटी) पानी की बोतलों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय पर्यावरण को हो रहे नुकसान और पीईटी (सामान्य प्लास्टिक) बोतलों के अन्य दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रशासन की ओर से जारी आदेश में विशेष रूप से 500 एमएल की पीईटी पानी की बोतलों का उपयोग न करने को कहा गया है। आमतौर पर बैठकों व सार्वजनिक आयोजनों में इन बोतलों का प्रयोग होता है, जो पर्यावरणीय दृष्टिकोण से हानिकारक है। पर्यटन स्थलों पर ऐसी बोतलों का कचरा बिखरा हुआ देखा जाता है, जिससे प्रदेश की छवि को भी नुकसान पहुंचता है। प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि प्लास्टिक बोतलों के स्थान पर ईको-फ्रेंडली बर्तनों अथवा कांच की बोतलों का उपयोग किया जाए।
स्कूलों की सफाई में पॉलिथीन बना बाधा
स्कूल परिसरों की सफाई व्यवस्था में पॉलिथीन एक बड़ी चुनौती बन गया है। सफाई के दौरान पॉलिथीन युक्त कचरे की अधिकता देखी गई है, जिससे पानी की निकासी में रुकावट सहित अन्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। प्लास्टिक के नष्ट न होने की वजह से यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक सोमलाल धीमान ने जानकारी दी कि सभी स्कूलों को पीईटी बोतलों में पानी की आपूर्ति न करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में निरीक्षण के दौरान यदि आदेशों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित संस्थान के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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