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Una News: चकोता के नाम पर हस्ताक्षर कराने की दलील नहीं मानी, जमीन का बिक्री करार बरकरार

Fri, 11 Sep 2026 11:54 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Fri, 11 Sep 2026 11:54 PM IST
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Argument for setting aside the sale agreement on the ground of 'Chakota' rejected; land sale agreement upheld.
दुलैहड़ (ऊना)। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश प्रथम राजिंदर कुमार की अदालत ने बसोली अपरली में जमीन की बिक्री से जुड़े मामले में अपील खारिज कर निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने माना कि 27 जून 2011 को हुआ बिक्री करार साबित है और इसमें तय 18,281 रुपये की पूरी राशि अदा की जा चुकी थी। संबंधित पक्षों को करार के अनुसार जमीन का विक्रय विलेख करने के निर्देश भी कायम रहेंगे। मामला 3 कनाल 14 मरले जमीन से जुड़ा है। वादी के अनुसार 27 जून 2011 को जमीन की बिक्री का करार हुआ था और पूरी राशि उसी समय दे दी गई थी। इसके बावजूद विक्रय विलेख नहीं किया गया। बार-बार आग्रह और कानूनी नोटिस के बाद भी विलेख न होने पर मामला अदालत पहुंचा। वरिष्ठ सिविल जज ऊना की अदालत ने 22 जुलाई 2023 को वादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विक्रय विलेख करने के निर्देश दिए थे। इसी फैसले को अपील में चुनौती दी गई थी। अपील में बिक्री करार से इनकार करते हुए कहा गया कि वादी लंबे समय से जमीन की खेती और देखभाल चकोता व्यवस्था के तहत कर रहा था। 27 जून 2011 को तहसील परिसर में चकोता संबंधी दस्तावेज तैयार करवाने गए थे। इसी दौरान दस्तावेज की वास्तविक प्रकृति बताए बिना हस्ताक्षर और अंगूठे का निशान ले लिया गया और बाद में उसे बिक्री करार के रूप में पेश कर दिया गया। अदालत ने रिकॉर्ड की जांच में पाया कि दस्तावेज पर हस्ताक्षर और अंगूठे का निशान होने की बात स्वीकार की गई थी। बिक्री करार के गवाह गुरनाम सिंह ने बयान दिया कि 3 कनाल 14 मरले जमीन 5,000 रुपये प्रति कनाल की दर से बेचने का सौदा हुआ था और 18,281 रुपये की पूरी राशि उसकी मौजूदगी में दी गई। उसके अनुसार डीड राइटर ने दस्तावेज तैयार किया और उसकी सामग्री संबंधित पक्षों को पढ़कर और समझाकर सुनाई गई थी। इसके बाद हस्ताक्षर और अंगूठे का निशान लगाया गया। अदालत ने कहा कि जिरह के दौरान भी गवाह की गवाही में कोई महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने नहीं आया।
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अदालत ने कहा कि चकोता के लिए दस्तावेज तैयार होने की दलील के समर्थन में न तो तहसील परिसर के किसी व्यक्ति को गवाह बनाया गया और न डीड राइटर को पेश किया गया। चकोता से संबंधित कोई तत्कालीन दस्तावेज भी रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया। ऐसे में केवल मौखिक दलील के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि बिक्री करार पर धोखे से हस्ताक्षर करवाए गए थे। शुक्रवार को अपील खारिज कर 22 जुलाई 2023 का फैसला बरकरार रखा गया। अब करार के अनुसार विक्रय विलेख करना होगा। यदि जमीन का कब्जा पहले से वादी के पास नहीं है तो उसे कब्जा देने का निर्देश भी लागू रहेगा। दोनों पक्ष अपने-अपने खर्च वहन करेंगे।
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