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20 से 50 फीसदी तक महंगी हुई पशुओं की खुराक
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नारी (ऊना)। जिले के 90 फीसदी लोग कृषि और पशुपालन करते हैं। यह उनकी आमदनी का जरिया है। किसान जहां बीज, खाद और कीटनाशक महंगे होने की दुहाई दे रहे हैं, वहीं पशुपालक भी पशुओं की खुराक महंगी होने से परेशान हैं।
गत छह महीने में खल-बिनौले के दाम 20 से 50 फीसदी तक बढ़े हैं। करीब छह महीने पहले बिनौले के थोक दाम 35 से 40 रुपये किलो थे। अब यह 50 से 60 रुपये किलो हो गए हैं। खल के दाम 20 से 25 रुपये किलो बढ़कर 40 से 45 रुपये किलो हुए हैं। पशुओं के हाजमे के लिए रामबाण माने जाने वाले तारामीरा का थोक भाव छह महीने पहले 36 रुपये किलो। अब यह 80 रुपये किलो हो गया है। फीड के दाम भी पांच से छह रुपये किलो बढ़े हैं।
पशुपालक रामलाल, प्रकाश चंद, मुकेश कुमार, जोगिंदर पाल, बलवीर सिंह और कृष्ण चंद्र ने कहा कि पशुओं की खुराक भी महंगी हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में गाय का दूध पुराने ही रेट 35 रुपये किलो और भैंस का 50 रुपये किलो बिक रहा है। इससे आय बढ़ना तो दूर,खर्चा पूरा करना मुश्किल हो गया है। पेट्रोल-डीजल के दाम घटने के बाद उन्हें पशुओं की खुराक सस्ती होने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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उधर, तूड़ी के दाम भी 300 रुपये से 500 रुपये बढ़ गए हैं। पिछले सीजन पर 500 रुपये क्विंटल बिकने वाली तूड़ी 900 से 1000 रुपये क्विंटल बिक रही है। क्षेत्र के कुछ पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि इस समय कई पशुपालकों के पास तूड़ी खत्म हो गई है। पंजाब से इसे मंगवाया जा रहा है। वे लोग मनमाने दाम वसूलते हैं। सरकार पंचायतों को परमिट दे तो तूड़ी सस्ते दाम पर पशुपालकों को उपलब्ध करवाई जा सकती है।
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गत छह महीने में खल-बिनौले के दाम 20 से 50 फीसदी तक बढ़े हैं। करीब छह महीने पहले बिनौले के थोक दाम 35 से 40 रुपये किलो थे। अब यह 50 से 60 रुपये किलो हो गए हैं। खल के दाम 20 से 25 रुपये किलो बढ़कर 40 से 45 रुपये किलो हुए हैं। पशुओं के हाजमे के लिए रामबाण माने जाने वाले तारामीरा का थोक भाव छह महीने पहले 36 रुपये किलो। अब यह 80 रुपये किलो हो गया है। फीड के दाम भी पांच से छह रुपये किलो बढ़े हैं।
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पशुपालक रामलाल, प्रकाश चंद, मुकेश कुमार, जोगिंदर पाल, बलवीर सिंह और कृष्ण चंद्र ने कहा कि पशुओं की खुराक भी महंगी हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में गाय का दूध पुराने ही रेट 35 रुपये किलो और भैंस का 50 रुपये किलो बिक रहा है। इससे आय बढ़ना तो दूर,खर्चा पूरा करना मुश्किल हो गया है। पेट्रोल-डीजल के दाम घटने के बाद उन्हें पशुओं की खुराक सस्ती होने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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उधर, तूड़ी के दाम भी 300 रुपये से 500 रुपये बढ़ गए हैं। पिछले सीजन पर 500 रुपये क्विंटल बिकने वाली तूड़ी 900 से 1000 रुपये क्विंटल बिक रही है। क्षेत्र के कुछ पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि इस समय कई पशुपालकों के पास तूड़ी खत्म हो गई है। पंजाब से इसे मंगवाया जा रहा है। वे लोग मनमाने दाम वसूलते हैं। सरकार पंचायतों को परमिट दे तो तूड़ी सस्ते दाम पर पशुपालकों को उपलब्ध करवाई जा सकती है।