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Una News: तीन माह से बारिश न होने से कृषि और बागवानी संकट में

Wed, 14 Jan 2026 12:34 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2026 12:34 AM IST
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Agriculture and horticulture in crisis due to lack of rain for three months
शिवा परियोजना सहित कई योजनाओं पर मंडराया खतरा
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पौधों को कोहरे से होने लगा नुकसान, जल्द बारिश की दरकार
शिवा जैसी परियोजनाओं के तहत खर्च किए गए हैं लाखों रुपये

संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। जिले में बीते करीब तीन माह से अच्छी बारिश न होने से कृषि और बागवानी क्षेत्र गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में किसान किसी तरह फसलों को बचाए हुए हैं, लेकिन गैर-सिंचित इलाकों में पौधे मुरझाने लगे हैं। यदि आने वाले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों और बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार जिले के बंगाणा क्षेत्र में शिवा परियोजना के तहत 12 क्लस्टरों में अमरूद के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। प्रत्येक क्लस्टर पर करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य बंजर और खाली पड़ी जमीन को आय के साधन में बदलना है, लेकिन लगातार सूखे की स्थिति के चलते यह परियोजना भी संकट में आ गई है।
बागवानी विभाग की टीम ने पौधों की सिंचाई के लिए अपने स्तर पर व्यवस्थाएं तो की हैं, लेकिन यदि यही हालात बने रहे तो गर्मी के मौसम में पौधों को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा जिले की विभिन्न पंचायतों में भी पौधों का वितरण किया गया है और अन्य योजनाओं के माध्यम से किसान बागवानी की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। हालांकि बीते दिनों हुई हल्की बारिश का असर भी नाममात्र ही रहा।
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क्या कहते हैं किसान
जिले के किसान अमरीक सिंह, सुरेंद्र कुमार, शिवपाल, रामदास और जीवन कुमार ने बताया कि गेहूं की फसल के साथ-साथ बागवानी के पौधे भी खराब होने लगे हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ बारिश नहीं हो रही है, दूसरी ओर कोहरे की मार से फसलें प्रभावित हो रही हैं। किसानों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो सारी फसलें बर्बाद हो सकती हैं।उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में ऐसा कभी नहीं देखा गया कि तीन महीनों तक बारिश न हो। किसानों ने आशंका जताई कि यदि हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में कई किसान खेती से हाथ खींचने को मजबूर हो जाएंगे।
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बागवानी विभाग का पक्ष
जिला बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. केके भारद्वाज ने बताया कि विशेषज्ञ लगातार फसलों और पौधों को बचाने के प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बारिश होना बेहद जरूरी हो चुका है। बड़ी परियोजनाओं के लिए सिंचाई की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन यदि यही हालात रहे तो गर्मियों में समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
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