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Una News: 23.35 लाख लेकर जमीन की रजिस्ट्री नहीं की, आरोपी की डिस्चार्ज अर्जी खारिज
Sat, 03 Oct 2026 11:01 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 03 Oct 2026 11:01 PM IST
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दुलैहड़(ऊना)। टाहलीवाल में जमीन बेचने के नाम पर 23.35 लाख रुपये लेने और बाद में जमीन की रजिस्ट्री नहीं करने के मामले में आरोपी को सत्र न्यायालय से राहत नहीं मिली है। सत्र न्यायाधीश पीसी राणा की अदालत ने आरोपी की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें आरोपी की डिस्चार्ज अर्जी खारिज की गई थी। अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी का मामला बनना माना है। मामला हरोली थाना में वर्ष 2020 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।
अदालत के समक्ष रखे गए रिकॉर्ड के अनुसार शिकायतकर्ता टाहलीवाल चौक, बाथरी रोड पर हार्डवेयर का कारोबार करता था और आरोपी के मकान में किराये पर रहता था। शिकायत के मुताबिक आरोपी ने उसे अपना मकान बनाने के लिए एक कनाल जमीन बेचने की बात कही थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि वह हिमाचल का निवासी नहीं होने के कारण जमीन खरीदने के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत से परिचित था। आरोपी ने उसे सरकार से अनुमति लेने के बाद जमीन की बिक्री करने का भरोसा दिया। शिकायत के अनुसार जमीन का सौदा 23.35 लाख रुपये में तय हुआ। इसके बाद वर्ष 2018 और 2019 में अलग-अलग तारीखों पर शिकायतकर्ता ने नकद और चेक के माध्यम से रकम का भुगतान किया। कुछ रकम आरोपी को और कुछ उसके कहने पर अन्य लोगों के खातों में दी गई। शिकायतकर्ता का दावा था कि पूरी रकम देने के बाद उसे जमीन पर मकान बनाने के लिए कहा गया। इसके बाद अगस्त 2019 में शिकायतकर्ता ने बताए गए भूखंड पर मकान का निर्माण शुरू कर दिया। रिकॉर्ड के मुताबिक उसने एक मंजिल के लैंटर तक निर्माण कराया और इस पर करीब 7.77 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया। शिकायतकर्ता ने जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम कराने के लिए कई बार आरोपी से आग्रह किया लेकिन रजिस्ट्री नहीं हुई। आरोप है कि बाद में आरोपी ने जमीन की रजिस्ट्री करने और रकम वापस करने से इन्कार कर दिया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उसे बनाए गए मकान में जाने से रोक दिया गया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया।
सत्र न्यायालय ने कहा कि आरोप तय करने के स्तर पर अदालत को केवल यह देखना होता है कि अभियोजन के रिकॉर्ड से आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। इस चरण में गवाहों के बयानों और अन्य सामग्री की अंतिम रूप से विश्वसनीयता जांचना जरूरी नहीं है। अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष की ओर से पेश किए गए तथ्यों का परीक्षण मुकदमे के दौरान साक्ष्य के आधार पर किया जाएगा।
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अदालत ने आरोपी की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए 4 जुलाई 2025 के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। दोनों पक्षों को 12 अक्तूबर 2026 को ट्रायल कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।
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अदालत के समक्ष रखे गए रिकॉर्ड के अनुसार शिकायतकर्ता टाहलीवाल चौक, बाथरी रोड पर हार्डवेयर का कारोबार करता था और आरोपी के मकान में किराये पर रहता था। शिकायत के मुताबिक आरोपी ने उसे अपना मकान बनाने के लिए एक कनाल जमीन बेचने की बात कही थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि वह हिमाचल का निवासी नहीं होने के कारण जमीन खरीदने के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत से परिचित था। आरोपी ने उसे सरकार से अनुमति लेने के बाद जमीन की बिक्री करने का भरोसा दिया। शिकायत के अनुसार जमीन का सौदा 23.35 लाख रुपये में तय हुआ। इसके बाद वर्ष 2018 और 2019 में अलग-अलग तारीखों पर शिकायतकर्ता ने नकद और चेक के माध्यम से रकम का भुगतान किया। कुछ रकम आरोपी को और कुछ उसके कहने पर अन्य लोगों के खातों में दी गई। शिकायतकर्ता का दावा था कि पूरी रकम देने के बाद उसे जमीन पर मकान बनाने के लिए कहा गया। इसके बाद अगस्त 2019 में शिकायतकर्ता ने बताए गए भूखंड पर मकान का निर्माण शुरू कर दिया। रिकॉर्ड के मुताबिक उसने एक मंजिल के लैंटर तक निर्माण कराया और इस पर करीब 7.77 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया। शिकायतकर्ता ने जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम कराने के लिए कई बार आरोपी से आग्रह किया लेकिन रजिस्ट्री नहीं हुई। आरोप है कि बाद में आरोपी ने जमीन की रजिस्ट्री करने और रकम वापस करने से इन्कार कर दिया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उसे बनाए गए मकान में जाने से रोक दिया गया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया।
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सत्र न्यायालय ने कहा कि आरोप तय करने के स्तर पर अदालत को केवल यह देखना होता है कि अभियोजन के रिकॉर्ड से आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। इस चरण में गवाहों के बयानों और अन्य सामग्री की अंतिम रूप से विश्वसनीयता जांचना जरूरी नहीं है। अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष की ओर से पेश किए गए तथ्यों का परीक्षण मुकदमे के दौरान साक्ष्य के आधार पर किया जाएगा।
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अदालत ने आरोपी की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए 4 जुलाई 2025 के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। दोनों पक्षों को 12 अक्तूबर 2026 को ट्रायल कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।