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Una News: अंब में गर्मी के बीच आस्था और विश्वास का दिखा अनोखा संगम
Sat, 23 May 2026 12:10 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 23 May 2026 12:10 AM IST
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अंब(ऊना)। भयंकर गर्मी और तपती धूप के बीच आस्था और विश्वास का एक अनोखा दृश्य अंब उपमंडल के तहत ज्वार में देखने को मिला।
यहां राजस्थान के कोटकासिम गांव जिला अलवर से आया एक परिवार अपने 13 वर्षीय बेटे की मन्नत पूरी होने पर उसे दंडवत यात्रा करवाते हुए कांगड़ा स्थित माता नगरकोट धाम (माता बज्रेश्वरी देवी मंदिर) की ओर बढ़ रहा है।
इस परिवार के मुखिया महेंद्र सिंह ने बताया कि जब नितेश तीन साल का था तो बोध अवस्था में उसने अपने कान में पेंसिल फंसा ली थी। जिससे उसके कान के पर्दे को काफी क्षति पहुंची थी। एक बार चिकित्सकों ने भी उसके ठीक होने को लेकर हाथ खड़े कर दिए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और माता बज्रेश्वरी के यहां मन्नत मांगी कि यदि बेटा ठीक हो गया तो वह उसे दंडवत करते हुए माता के दरबार लाएंगे।
माता की कृपा से जब बेटा पूरी तरह स्वस्थ हो गया तो परिवार अपनी मन्नत पूरी करने के लिए करीब डेढ़ माह पहले दूसरी बार राजस्थान से पैदल ही कठिन यात्रा पर निकल पड़ा।
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इन दिनों जहां मैदानी और पहाड़ी इलाकों में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है और भयंकर लू के कारण लोग घरों से बाहर निकलने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे, वहीं यह परिवार इस भीषण गर्मी की परवाह किए बिना पूरी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रहा है।
आग उगलती हुई डामर की सड़कों की तपिश से मासूम बेटे को बचाने के लिए उसकी मां और बहन लगातार सड़क पर गद्दे बिछाते हुए चल रहे हैं ताकि बेटे को झुलसने से बचाया जा सके।
वहीं, बच्चे के पिता माता नगरकोट धाम के नाम का पोस्टर लगी एक रेहड़ी पर परिवार की जरूरत का सामान लेकर साथ-साथ चल रहे हैं।
आस्था की यह कठिन और अनोखी यात्रा रास्ते से गुजरने वाले हर राहगीर के लिए कौतूहल और श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है।
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यहां राजस्थान के कोटकासिम गांव जिला अलवर से आया एक परिवार अपने 13 वर्षीय बेटे की मन्नत पूरी होने पर उसे दंडवत यात्रा करवाते हुए कांगड़ा स्थित माता नगरकोट धाम (माता बज्रेश्वरी देवी मंदिर) की ओर बढ़ रहा है।
इस परिवार के मुखिया महेंद्र सिंह ने बताया कि जब नितेश तीन साल का था तो बोध अवस्था में उसने अपने कान में पेंसिल फंसा ली थी। जिससे उसके कान के पर्दे को काफी क्षति पहुंची थी। एक बार चिकित्सकों ने भी उसके ठीक होने को लेकर हाथ खड़े कर दिए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और माता बज्रेश्वरी के यहां मन्नत मांगी कि यदि बेटा ठीक हो गया तो वह उसे दंडवत करते हुए माता के दरबार लाएंगे।
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माता की कृपा से जब बेटा पूरी तरह स्वस्थ हो गया तो परिवार अपनी मन्नत पूरी करने के लिए करीब डेढ़ माह पहले दूसरी बार राजस्थान से पैदल ही कठिन यात्रा पर निकल पड़ा।
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इन दिनों जहां मैदानी और पहाड़ी इलाकों में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है और भयंकर लू के कारण लोग घरों से बाहर निकलने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे, वहीं यह परिवार इस भीषण गर्मी की परवाह किए बिना पूरी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रहा है।
आग उगलती हुई डामर की सड़कों की तपिश से मासूम बेटे को बचाने के लिए उसकी मां और बहन लगातार सड़क पर गद्दे बिछाते हुए चल रहे हैं ताकि बेटे को झुलसने से बचाया जा सके।
वहीं, बच्चे के पिता माता नगरकोट धाम के नाम का पोस्टर लगी एक रेहड़ी पर परिवार की जरूरत का सामान लेकर साथ-साथ चल रहे हैं।
आस्था की यह कठिन और अनोखी यात्रा रास्ते से गुजरने वाले हर राहगीर के लिए कौतूहल और श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है।