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हरनाम के लिए घर ही बन गया शमशान
Una
Updated Wed, 17 Dec 2014 05:30 AM IST
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संतोषगढ़(ऊना)। गरीबी और लाचारी में जीवन जी रहे साठ वर्षीय हरनाम को क्या पता था कि मौत के क्रूर पंजे उसे इस बर्बरता से अपने साथ ले जाएंगे। संतोषगढ़ के साथ मलूकपुरा में हुए अगिभनकांड को देखकर हर किसी की रूह कांप उठी। हालात यह थे कि उस खड़पोश झोपड़ी में जिंदा जल गए हरनाम का अस्थि पिंजर ही बचा था। एक तरह से उसका घर ही उसके लिए शमशान बन गया, जबकि झोपड़ी में प्रयोग की गई लकड़ी और घास ने उसे चिता की तरह जला दिया। बताया जा रहा है कि हरनाम इस झोंपड़ी में कई सालों से एकाकी जीवन बिता रहा था। वह घोड़ा गाड़ी चलाकर अपना और घोड़े का गुजारा करता था। हालांकि हरनाम की मां और भाई अलग घर में रहते हैं, लोगों का कहना है कि उस घोड़े के अलावा हरनाम का यहां कोई नहीं था। इस हादसे में हरनाम का घोड़ा और गाड़ी बच गए। लेकिन वह जिंदा ही झोंपड़ी में जल गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक प्रथम दृष्टया यह हादसा चूल्हें में आग के रह जाने से हुआ लगता है। जबकि पुलिस जांच कहती है कि हरनाम ने हादसे से पहले जिंदगी के लिए जद्दोजहद भी की होगी। चुंकि हरनाम का जला हुआ शव उसके बिस्तर से कुछ दूर बरामद हुआ। जिसकी पुलिस जांच कर रही है। एसपी अनुपम शर्मा का कहना है कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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