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बैरियर पर कैमरे खराब, कैसे पकड़ में आएंगे शातिर
Una
Updated Fri, 17 Oct 2014 05:33 AM IST
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मैहतपुर (ऊना)। आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त शातिरों के लिए ऊना जिला एक महफूज ठिकाना बन चुका है। यही वजह है कि लंबे समय से पंजाब के इस सरहदी जिला के विभिन्न क्षेत्रों में अपराध का ग्राफ बढ़ चुका है। जिला के बेहद संजीदा एवं व्यस्ततम प्रवेश द्वारों में शुमार मैहतपुर में अपराधियों पर नजर रखने के लिए मौजूदा सुरक्षा बंदोबस्त नाकाफी हैं। हैरत की बात तो यह है कि निगरानी के लिए यहां लगाए गए खुफिया कैमरे करीब एक वर्ष से खराब पड़े हैं।
वाहन बिना निरीक्षण से गुजरते हैं, उनका कोई रिकार्ड प्रवेश नाके पर नहीं रखा जाता और न ही हथियारबंद पुलिस जवानों की यहां स्थायी तैनाती की कोई व्यवस्था है। खाली हाथ एक जवान बाहरी राज्यों से आने वाले सैकड़ों वाहनों को आते-जाते महज देखता भर रहता है। इससे अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि यहां से कोई भी बड़ा अपराधी अथवा गिरोह कितनी आसानी से हिमाचल की सरहद में दाखिल हो सकता है। बुधवार सुबह स्थानीय पीएनबी शाखा की एटीएम मशीन को काटकर लाखों रुपयों पर हाथ साफ करने की इस वारदात से पूर्व दूसरे किस्म के अनेक अपराधों को भी इसी प्रकार शातिर अंजाम दे चुके हैं। प्रवेश नाके पर अगर टोल वसूली का प्रावधान न हो, आबकारी कराधान नाका न होता, तो फिर तो अपराधियों के बारे न्यारे होते। क्योंकि थोड़ी बहुत से चेकिंग होती भी है, वह आबकारी नाके अथवा टोल प्लाजा की वजह से हो पाती है। बेहद छोटे से डिब्बानुमा पुलिस केबिन में सीसीटीवी कैमरे तो लगाए भी गए थे, लेकिन उन्हें खराब हुए भी एक साल हो गया है। ऐसे में स्थानीय प्रवेशद्वार पर अपराधियों पर नजर रखने के लिए जिला पुलिस की कारगुजारी का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
कब दुरुस्त होंगे सीसीटीवी कैमरे?
बड़ा सवाल यह कि बैरियर पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे कब तक दुरुस्त होंगे, जो बाहरी राज्यों से आने वाले शातिरों पर नजर रखने में मददगार साबित हो सकें। हालांकि पुलिस सूत्रों के मुताबिक टोल प्लाजा पर लगे ठेकेदार के निजी खुफिया कैमराें की फुटेज से पुलिस शातिरों तक पहुंचने के लिए मार्ग ढूंढ रही है।
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कोट्स
पुलिस अधीक्षक अनुपम शर्मा की मानें तो रात्रि के वक्त पूरी चौकसी रखी जाती है। पुलिस गश्त बराबर होती है। सीसीटीवी कैमरों के खराब होने से थोड़ी दिक्कत है, जिसे दूर कर लिया जाएगा। कहा कि पुलिस हर पहलू की बारीकी से तफतीश कर रही है, लिहाजा अभी तक खुलकर कुछ कहना सही नहीं होगा।
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वाहन बिना निरीक्षण से गुजरते हैं, उनका कोई रिकार्ड प्रवेश नाके पर नहीं रखा जाता और न ही हथियारबंद पुलिस जवानों की यहां स्थायी तैनाती की कोई व्यवस्था है। खाली हाथ एक जवान बाहरी राज्यों से आने वाले सैकड़ों वाहनों को आते-जाते महज देखता भर रहता है। इससे अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि यहां से कोई भी बड़ा अपराधी अथवा गिरोह कितनी आसानी से हिमाचल की सरहद में दाखिल हो सकता है। बुधवार सुबह स्थानीय पीएनबी शाखा की एटीएम मशीन को काटकर लाखों रुपयों पर हाथ साफ करने की इस वारदात से पूर्व दूसरे किस्म के अनेक अपराधों को भी इसी प्रकार शातिर अंजाम दे चुके हैं। प्रवेश नाके पर अगर टोल वसूली का प्रावधान न हो, आबकारी कराधान नाका न होता, तो फिर तो अपराधियों के बारे न्यारे होते। क्योंकि थोड़ी बहुत से चेकिंग होती भी है, वह आबकारी नाके अथवा टोल प्लाजा की वजह से हो पाती है। बेहद छोटे से डिब्बानुमा पुलिस केबिन में सीसीटीवी कैमरे तो लगाए भी गए थे, लेकिन उन्हें खराब हुए भी एक साल हो गया है। ऐसे में स्थानीय प्रवेशद्वार पर अपराधियों पर नजर रखने के लिए जिला पुलिस की कारगुजारी का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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कब दुरुस्त होंगे सीसीटीवी कैमरे?
बड़ा सवाल यह कि बैरियर पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे कब तक दुरुस्त होंगे, जो बाहरी राज्यों से आने वाले शातिरों पर नजर रखने में मददगार साबित हो सकें। हालांकि पुलिस सूत्रों के मुताबिक टोल प्लाजा पर लगे ठेकेदार के निजी खुफिया कैमराें की फुटेज से पुलिस शातिरों तक पहुंचने के लिए मार्ग ढूंढ रही है।
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पुलिस अधीक्षक अनुपम शर्मा की मानें तो रात्रि के वक्त पूरी चौकसी रखी जाती है। पुलिस गश्त बराबर होती है। सीसीटीवी कैमरों के खराब होने से थोड़ी दिक्कत है, जिसे दूर कर लिया जाएगा। कहा कि पुलिस हर पहलू की बारीकी से तफतीश कर रही है, लिहाजा अभी तक खुलकर कुछ कहना सही नहीं होगा।