{"_id":"23-38877","slug":"Una-38877-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऊना हाईवे पर मौत की रफ्तार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऊना हाईवे पर मौत की रफ्तार
Una
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऊना। बेकाबू कार चालक हाईवे के किनारे खड़े बेकसूर लोगों की जिंदगी पर मौत बनकर टूट रहे हैं। ऊना में दो दिन में दो कार चालकों ने 10 लोगों को रौंद डाला है। इन लोगों को कसूर बस इतना था कि ये हाईवे किनारे बस का इंतजार कर रहे थे। इस तरह के हादसों ने राहगीरों और हाईवे किनारे बसी आबादी को मुश्किल में डाल दिया है। दूसरी ओर प्रशासन इन लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर नहीं है।
अभी तक चंडीगढ़-धर्मशाला नेशनल हाईवे का निर्माण कार्य मुकम्मल नहीं हो पाया है, लेकिन जिन क्षेत्रों में मार्ग को तैयार कर यातायात के लिए खोल दिया गया है, वहां वाहनों की स्पीड बड़े शहरों के हाईवे के तरह बेकाबू हो गई है। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने रोड का काम शुरू होने से पहले ही इस तरह के हादसों के बारे में चेताया था। इसी रोड पर दो दिन के भीतर दो तेज रफ्तार कारों ने जो कहर बरपाया है, उसे देख कर क्षेत्र के लोग बुरी तरह सहम उठे हैं। इन दोनों हादसों में लगभग 10 लोग बेकाबू रफ्तार का शिकार हो चुके हैं। जिनमें से एक की तो मौके पर ही मौत तक हो चुकी है। पुलिस प्रशासन की ओर से जहां यातायात नियमों का पालन कर सड़क हादसों पर अंकुश लगाने की अपील की जा रही है, वहीं कुछ चालक इन अपीलों और दलीलों को ठेंगा दिखा कर जिला की सड़कों पर फार्मूला-वन की तरह रेस लगाते दिखते हैं। बुद्धिजीवियाें में साहित्यकार ओपी शांत, राष्ट्रीय पुरस्कार से अलंकृत पूर्व प्रधानाचार्य रविंद्र नाथ पाठक, आरंभिक शिक्षा उपनिदेशक सुशील पुंडीर, अंबिकानगर साहित्य संस्कृति परिषद के स्थाई सचिव राजीव शर्मन, आरके शर्मा, तरसेम शर्मा कहते हैं कि सड़कों पर सरपट दौड़ने वालों को भी अन्य लोगों का ख्याल रखना चाहिए। दोनों हादसों में रफ्तार का शिकार हुए लोगों का केवल इतना ही कसूर था कि वह लोग सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज के युग में हर कोई जल्दी में है, लेकिन इतनी भी जल्दी नहीं की जानी चाहिए, जिससे किसी की जान चली जाए, या कोई ताउम्र अपंग होकर रह जाए। इधर, एएसपी राकेश सिंह का कहना है कि इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है। लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। जिससे वह स्वयं और अन्य लोग सुरक्षित रह सकें।
विज्ञापन
अभी तक चंडीगढ़-धर्मशाला नेशनल हाईवे का निर्माण कार्य मुकम्मल नहीं हो पाया है, लेकिन जिन क्षेत्रों में मार्ग को तैयार कर यातायात के लिए खोल दिया गया है, वहां वाहनों की स्पीड बड़े शहरों के हाईवे के तरह बेकाबू हो गई है। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने रोड का काम शुरू होने से पहले ही इस तरह के हादसों के बारे में चेताया था। इसी रोड पर दो दिन के भीतर दो तेज रफ्तार कारों ने जो कहर बरपाया है, उसे देख कर क्षेत्र के लोग बुरी तरह सहम उठे हैं। इन दोनों हादसों में लगभग 10 लोग बेकाबू रफ्तार का शिकार हो चुके हैं। जिनमें से एक की तो मौके पर ही मौत तक हो चुकी है। पुलिस प्रशासन की ओर से जहां यातायात नियमों का पालन कर सड़क हादसों पर अंकुश लगाने की अपील की जा रही है, वहीं कुछ चालक इन अपीलों और दलीलों को ठेंगा दिखा कर जिला की सड़कों पर फार्मूला-वन की तरह रेस लगाते दिखते हैं। बुद्धिजीवियाें में साहित्यकार ओपी शांत, राष्ट्रीय पुरस्कार से अलंकृत पूर्व प्रधानाचार्य रविंद्र नाथ पाठक, आरंभिक शिक्षा उपनिदेशक सुशील पुंडीर, अंबिकानगर साहित्य संस्कृति परिषद के स्थाई सचिव राजीव शर्मन, आरके शर्मा, तरसेम शर्मा कहते हैं कि सड़कों पर सरपट दौड़ने वालों को भी अन्य लोगों का ख्याल रखना चाहिए। दोनों हादसों में रफ्तार का शिकार हुए लोगों का केवल इतना ही कसूर था कि वह लोग सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज के युग में हर कोई जल्दी में है, लेकिन इतनी भी जल्दी नहीं की जानी चाहिए, जिससे किसी की जान चली जाए, या कोई ताउम्र अपंग होकर रह जाए। इधर, एएसपी राकेश सिंह का कहना है कि इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है। लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। जिससे वह स्वयं और अन्य लोग सुरक्षित रह सकें।
विज्ञापन