{"_id":"23-38851","slug":"Una-38851-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्कृष्ट कार्य पर 3 सहकारी समितियां सम्मानित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्कृष्ट कार्य पर 3 सहकारी समितियां सम्मानित
Una
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
दौलतपुर चौक (ऊना)। क्षेत्र के मवां कोहलां में सोमवार को 59वें जिला स्तरीय सहकारिता दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान जिला की तीन सहकारी समितियों को उत्कृष्ट कार्य निष्पादन के लिए सम्मानित किया गया। इनमें दि कोटला डोहगी कृषि सेवा सहकारी सभा, दि अमलैहड़ जदीद कृषि सेवा सहकारी सभा और दि टब्बा कृषि सेवा सहकारी सभा शामिल हैं। इन्हें क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। ब्लाक स्तर पर भी पांच सहकारी समितियों को प्रथम पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमें अंब ब्लाक की मुबारिकपुर हार कृषि सेवा सहकारी सभा, बंगाणा ब्लाक की रौणखर कृषि सेवा सहकारी सभा, गगरेट ब्लाक की अंबोआ कृषि सेवा सहकारी सभा, हरोली ब्लाक की ईसपुर कृषि सेवा सहकारी सभा और ऊना ब्लाक की टक्का तर्फ विशणा कृषि सेवा सहकारी सभा शामिल हैं। इन सहकारी सभाओं को एसडीएम अंब अश्वनी रमेश ने बतौर मुख्य अतिथि पुरस्कार प्रदान किए।
इस अवसर पर एसडीएम अंब अश्वनी रमेश ने कहा कि प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि सहकारिता के माध्यम से लोग अपनी आर्थिकी में समृद्धि के नए रंग भर सकें। उन्होंने कहा कि जिला ऊना को यह गौरव भी हासिल है कि 1892 में यहीं के गांव पंजावर से सहकारिता की लहर उठी थी। इसकी गूंज फिर पूरे देश में सुनी गई। पंजावर निवासी मियां हीरा सिंह ने सबसे पहले सहकारिता की अहमियत महसूस की और गांव के कृषकों की भूस्खलन समस्या का निदान सहकारी सभा गठित कर किया और स्वां नदी की बाढ़ से होने वाले नुकसान की रोकथाम के उपाय किए। देश में सहकारिता का अधिनियम 1904 में अस्तित्व में आया। सही मायनों में सहकारिता का शंखनाद ऊना जिला से ही हुआ। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से कठिन से कठिन कार्य को भी सहज रूप से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिला ऊना की सहकारी समितियों में 5 अरब 72 करोड़ रुपये की अमानतें जमा हैं, जबकि 4 करोड़ 39 लाख रुपये के लोन बकाया में हैं। इस अवसर पर जिला अंकेक्षण अधिकारी रमेश सिंह जसवाल ने बताया कि ऊना जिला में सहकारिता आंदोलन की जड़ें निरंतर मजबूत होती जा रही हैं। समारोह में आरआईसीएम के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने भी विचार रखे। समारोह में निरीक्षक अशोक शर्मा व अधीक्षक रमा शर्मा को विशेष तौर पर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर जिला सहकारी संघ के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा, कांगड़ा सहकारी बैंक के निदेशक अमृतलाल भारद्वाज, कपार्ट बैंक के उपाध्यक्ष चरणजीत शर्मा, प्रदेश सहकारी अराजपत्रित संघ के प्रदेशाध्यक्ष उमेश शर्मा, जिला निरीक्षक बालक राम शर्मा, गगरेट ब्लाक के खंड निरीक्षक निर्मल भारद्वाज, घनारी की निरीक्षक सहकारी सभाएं संदेश बाला सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
विज्ञापन
बाक्स
ऊना में 1.85 लाख सदस्य
जिला की 371 सहकारी सभाओं से 1 लाख 85 हजार सदस्य हैं। जिला में वर्ष 2012 के संकलित आंकड़ों के मुताबिक कुल 371 सहकारी सभाओं में से 218 कृषि सेवा सहकारी सभाएं, 13 गैर कृषक सहकारी संस्थाएं, 4 मत्स्य, 22 दुग्ध उत्पादक, 13 औद्योगिक सहकारी सभाएं, 10 गृह निर्माण सहकारी सभाएं, 2 फल एवं सब्जी उत्पादक सभाओं सहित विभिन्न प्रकार की सभाएं कार्य कर रही हैं। इन सभाओं की कुल कार्यशील पूंजी 7 अरब 14 करोड़ रुपये है। जिला की सहकारी समितियों द्वारा वर्ष 201 में 38 करोड़ रुपये की वस्तुएं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बेची गईं। इसके अलावा 1 करोड़ 30 लाख रुपये के खाद बीज वितरित किए गए।
विज्ञापन
इस अवसर पर एसडीएम अंब अश्वनी रमेश ने कहा कि प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि सहकारिता के माध्यम से लोग अपनी आर्थिकी में समृद्धि के नए रंग भर सकें। उन्होंने कहा कि जिला ऊना को यह गौरव भी हासिल है कि 1892 में यहीं के गांव पंजावर से सहकारिता की लहर उठी थी। इसकी गूंज फिर पूरे देश में सुनी गई। पंजावर निवासी मियां हीरा सिंह ने सबसे पहले सहकारिता की अहमियत महसूस की और गांव के कृषकों की भूस्खलन समस्या का निदान सहकारी सभा गठित कर किया और स्वां नदी की बाढ़ से होने वाले नुकसान की रोकथाम के उपाय किए। देश में सहकारिता का अधिनियम 1904 में अस्तित्व में आया। सही मायनों में सहकारिता का शंखनाद ऊना जिला से ही हुआ। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से कठिन से कठिन कार्य को भी सहज रूप से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिला ऊना की सहकारी समितियों में 5 अरब 72 करोड़ रुपये की अमानतें जमा हैं, जबकि 4 करोड़ 39 लाख रुपये के लोन बकाया में हैं। इस अवसर पर जिला अंकेक्षण अधिकारी रमेश सिंह जसवाल ने बताया कि ऊना जिला में सहकारिता आंदोलन की जड़ें निरंतर मजबूत होती जा रही हैं। समारोह में आरआईसीएम के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने भी विचार रखे। समारोह में निरीक्षक अशोक शर्मा व अधीक्षक रमा शर्मा को विशेष तौर पर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
इस अवसर पर जिला सहकारी संघ के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा, कांगड़ा सहकारी बैंक के निदेशक अमृतलाल भारद्वाज, कपार्ट बैंक के उपाध्यक्ष चरणजीत शर्मा, प्रदेश सहकारी अराजपत्रित संघ के प्रदेशाध्यक्ष उमेश शर्मा, जिला निरीक्षक बालक राम शर्मा, गगरेट ब्लाक के खंड निरीक्षक निर्मल भारद्वाज, घनारी की निरीक्षक सहकारी सभाएं संदेश बाला सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
विज्ञापन
बाक्स
ऊना में 1.85 लाख सदस्य
जिला की 371 सहकारी सभाओं से 1 लाख 85 हजार सदस्य हैं। जिला में वर्ष 2012 के संकलित आंकड़ों के मुताबिक कुल 371 सहकारी सभाओं में से 218 कृषि सेवा सहकारी सभाएं, 13 गैर कृषक सहकारी संस्थाएं, 4 मत्स्य, 22 दुग्ध उत्पादक, 13 औद्योगिक सहकारी सभाएं, 10 गृह निर्माण सहकारी सभाएं, 2 फल एवं सब्जी उत्पादक सभाओं सहित विभिन्न प्रकार की सभाएं कार्य कर रही हैं। इन सभाओं की कुल कार्यशील पूंजी 7 अरब 14 करोड़ रुपये है। जिला की सहकारी समितियों द्वारा वर्ष 201 में 38 करोड़ रुपये की वस्तुएं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बेची गईं। इसके अलावा 1 करोड़ 30 लाख रुपये के खाद बीज वितरित किए गए।