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ागजों में सीएचसी, हकीकत में डिस्पेंसरी
Updated Sat, 04 Nov 2017 06:38 PM IST
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कागजों में सीएचसी, हकीकत में डिस्पेंसरी
संतोषगढ़ पीएचसी का दर्जा बढ़ा पर सुविधा नहीं
10 गांवों की आबादी को एक भी एंबुलेंस नहीं
संतोषगढ़ जनसभा में मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा
पंकज चब्बा
ऊना।
सरकारी घोषणाओं के सच की बानगी संतोषगढ़ के स्वास्थ्य केंद्र में देखी जा सकती है। कहने को तो इस केंद्र को पीएचसी से सीएचसी का दर्जा दिया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग ने बाकायदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का बोर्ड भी लटका रखा है। हकीकत में यह संस्थान डिस्पेंसरी से ऊपर नहीं बढ़ सका है। स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर यहां न तो स्टाफ पूरा है और न ही मरीज को भर्ती करने की उचित सुविधा। आठ बिस्तरों की अधिसूचना पर अस्पताल में छह बिस्तर तो स्थापित किए गए हैं लेकिन यह है कि इस सीएचसी में आपात स्थिति में मरीज को केंद्र तक पहुंचाने या यहां से रेफर करने के लिए कोई एंबुलेंस भी नहीं है। डॉक्टर का एक पद खाली चल रहा है जबकि लैब तकनीशियन का पद भी खाली चल रहा है। नियमानुसार सीएचसी में एक्सरे और लैब की भी सुविधा नहीं। ऐसे में लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि क्षेत्र के साथ लगते 10 गांवों की करीब 20 हजार की आबादी या तो बीबीएमबी अस्पताल नंगल या फिर जिला अस्पताल पर निर्भर है। करीब साढ़े चार साल पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने संतोषगढ़ में आयोजित जनसभा में इसकी अपग्रेडेशन का एलान किया था। उसके बाद विभाग ने हरकत में आते हुए पीएचसी भवन पर ही सीएचसी का बोर्ड लटका दिया लेकिन इतने अरसे के बाद भी यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन नहीं बन पाया।
वीरभद्र सिंह मात्र घोषणाओं के मुख्यमंत्री : सत्ती
ऊना सदर के विधायक एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती का कहना है कि वीरभद्र सिंह मात्र घोषणाओं के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने झूठी घोषणाओं के नाम पर लोगों को गुमराह किया है।
कांग्रेस ने किया चहुंमुखी विकास : रायजादा
ऊना सदर से कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल रायजादा का कहना है कि स्थानीय विधायक क्षेत्र का विकास करवाने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस सरकार के नेतृत्व में प्रदेश का चहुंमुखी विकास हुआ है।
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संतोषगढ़ पीएचसी का दर्जा बढ़ा पर सुविधा नहीं
10 गांवों की आबादी को एक भी एंबुलेंस नहीं
संतोषगढ़ जनसभा में मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा
पंकज चब्बा
ऊना।
सरकारी घोषणाओं के सच की बानगी संतोषगढ़ के स्वास्थ्य केंद्र में देखी जा सकती है। कहने को तो इस केंद्र को पीएचसी से सीएचसी का दर्जा दिया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग ने बाकायदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का बोर्ड भी लटका रखा है। हकीकत में यह संस्थान डिस्पेंसरी से ऊपर नहीं बढ़ सका है। स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर यहां न तो स्टाफ पूरा है और न ही मरीज को भर्ती करने की उचित सुविधा। आठ बिस्तरों की अधिसूचना पर अस्पताल में छह बिस्तर तो स्थापित किए गए हैं लेकिन यह है कि इस सीएचसी में आपात स्थिति में मरीज को केंद्र तक पहुंचाने या यहां से रेफर करने के लिए कोई एंबुलेंस भी नहीं है। डॉक्टर का एक पद खाली चल रहा है जबकि लैब तकनीशियन का पद भी खाली चल रहा है। नियमानुसार सीएचसी में एक्सरे और लैब की भी सुविधा नहीं। ऐसे में लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि क्षेत्र के साथ लगते 10 गांवों की करीब 20 हजार की आबादी या तो बीबीएमबी अस्पताल नंगल या फिर जिला अस्पताल पर निर्भर है। करीब साढ़े चार साल पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने संतोषगढ़ में आयोजित जनसभा में इसकी अपग्रेडेशन का एलान किया था। उसके बाद विभाग ने हरकत में आते हुए पीएचसी भवन पर ही सीएचसी का बोर्ड लटका दिया लेकिन इतने अरसे के बाद भी यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन नहीं बन पाया।
वीरभद्र सिंह मात्र घोषणाओं के मुख्यमंत्री : सत्ती
ऊना सदर के विधायक एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती का कहना है कि वीरभद्र सिंह मात्र घोषणाओं के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने झूठी घोषणाओं के नाम पर लोगों को गुमराह किया है।
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कांग्रेस ने किया चहुंमुखी विकास : रायजादा
ऊना सदर से कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल रायजादा का कहना है कि स्थानीय विधायक क्षेत्र का विकास करवाने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस सरकार के नेतृत्व में प्रदेश का चहुंमुखी विकास हुआ है।
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