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पंचेन लामा की रिहाई के लिए मैहतपुर पहुंचा मार्च
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अमर उजाला ब्यूरो
मैहतपुर (ऊना)। तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाईलामा के अनुयायियों में अपने 11वें धर्मगुरु पंचेन लामा की रिहाई को लेकर अटूट आस्था दिखाई है। प्रतिदिन 12 से 15 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद उनके पांवों में पड़े छाले भी उनकी राह नहीं रोक पा रहे हैं।
हिमाचल के शहरों से आई करीब एक सौ तिब्बती महिलाओं के जत्थे में पांच साल के बच्चे से लेकर 83 साल की वृद्ध महिला शामिल है। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि 24 वर्ष से अपने जिस गुरु की रिहाई को लेकर वे संघर्ष कर रही हैं, उसका प्रतिफल अवश्य मिलेगा। पद यात्रा में शामिल 83 वर्षीय बुजुर्ग महिला सोनल थ्रिंग कहती हैं कि पांव में कितने भी छाले क्यों न पड़ जाएं, परंतु गुरु की रिहाई होने तक हर पीड़ा को सहन करेंगी। गेदेन च्यूकी निमा 1995 में महज छह साल के थे, जब उन्हें धर्मगुरु दलाईलामा ने पंचेन लामा के तौर पर मान्यता दी थी।
उन्हें 11वें पंचेन लामा घोषित करते ही चीन सरकार ने उन्हें बंदी बना लिया। उनके साथ उनके परिजनों, उन्हें ढूंढने वाले चाडरल रिंपोछे को भी बंदी बना रखा है। थ्रिंग मानती हैं कि चीन सरकार तिब्बत के वजूद को ही खत्म करना चाहती है। तिब्बतियन महिला संघ की उपाध्यक्ष केलसंग यूडिन का कहना कि उनकी पदयात्रा चंडीगढ़ में समाप्त होगी, जहां पर कैंडल मार्च से धर्मगुरु की जल्द रिहाई की अपील की जाएगी।
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पदयात्रा में शामिल तेंजिग योंडन ने कहा कि यह संघर्ष आस्था और क्रूरता के बीच है। अब किस की जीत होती है, यह देखते हैं। शिमला क्षेत्र की अध्यक्ष केलसंग यंगचेन, बीर रीजन की अध्यक्ष टेनसिंग डोलमा, डल्हौजी रीजन की अध्यक्ष डावा थावों, रिवालसर रीजन की अध्यक्ष थियांग, लद्दाख रीजन से तेंजिग न्योडिन तथा कुल्लू मनाली से तेंजिग डोल्कर ने मोदी सरकार से आग्रह किया वह चीन सरकार पर इस बात को लेकर दबाव बनाए ताकि उनके गुरु की रिहाई संभव हो सके।
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मैहतपुर (ऊना)। तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाईलामा के अनुयायियों में अपने 11वें धर्मगुरु पंचेन लामा की रिहाई को लेकर अटूट आस्था दिखाई है। प्रतिदिन 12 से 15 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद उनके पांवों में पड़े छाले भी उनकी राह नहीं रोक पा रहे हैं।
हिमाचल के शहरों से आई करीब एक सौ तिब्बती महिलाओं के जत्थे में पांच साल के बच्चे से लेकर 83 साल की वृद्ध महिला शामिल है। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि 24 वर्ष से अपने जिस गुरु की रिहाई को लेकर वे संघर्ष कर रही हैं, उसका प्रतिफल अवश्य मिलेगा। पद यात्रा में शामिल 83 वर्षीय बुजुर्ग महिला सोनल थ्रिंग कहती हैं कि पांव में कितने भी छाले क्यों न पड़ जाएं, परंतु गुरु की रिहाई होने तक हर पीड़ा को सहन करेंगी। गेदेन च्यूकी निमा 1995 में महज छह साल के थे, जब उन्हें धर्मगुरु दलाईलामा ने पंचेन लामा के तौर पर मान्यता दी थी।
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उन्हें 11वें पंचेन लामा घोषित करते ही चीन सरकार ने उन्हें बंदी बना लिया। उनके साथ उनके परिजनों, उन्हें ढूंढने वाले चाडरल रिंपोछे को भी बंदी बना रखा है। थ्रिंग मानती हैं कि चीन सरकार तिब्बत के वजूद को ही खत्म करना चाहती है। तिब्बतियन महिला संघ की उपाध्यक्ष केलसंग यूडिन का कहना कि उनकी पदयात्रा चंडीगढ़ में समाप्त होगी, जहां पर कैंडल मार्च से धर्मगुरु की जल्द रिहाई की अपील की जाएगी।
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पदयात्रा में शामिल तेंजिग योंडन ने कहा कि यह संघर्ष आस्था और क्रूरता के बीच है। अब किस की जीत होती है, यह देखते हैं। शिमला क्षेत्र की अध्यक्ष केलसंग यंगचेन, बीर रीजन की अध्यक्ष टेनसिंग डोलमा, डल्हौजी रीजन की अध्यक्ष डावा थावों, रिवालसर रीजन की अध्यक्ष थियांग, लद्दाख रीजन से तेंजिग न्योडिन तथा कुल्लू मनाली से तेंजिग डोल्कर ने मोदी सरकार से आग्रह किया वह चीन सरकार पर इस बात को लेकर दबाव बनाए ताकि उनके गुरु की रिहाई संभव हो सके।