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जिले के 5185 बच्चों ने पहली बार रखा स्कूल में कदम
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ढक्की स्कूल में दरी पर बैठे नन्हे विद्यार्थी
- फोटो : Una
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ऊना। जिले के 500 सरकारी प्राइमरी स्कूलों में सोमवार को पहली बार पहली और दूसरी कक्षा के विद्यार्थी पहली बार स्कूल पहुंचे। दो सालों से कोरोना महामारी के कारण यह बच्चे स्कूल नहीं जा सके थे।
इस दौरान दोनों कक्षाओं के कुल 8856 बच्चों में से 5185 (लगभग 60 फीसदी) बच्चे स्कूल पहुंचे। अधिकतर जगह अध्यापक बच्चों के आने से पहले ही स्कूल पहुंच गए थे और थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजेशन, सही तरीके से मास्क पहनाने और उचित शारीरिक दूरी के साथ विद्यार्थियों को कक्षाओं में भेजा गया। हालांकि कुछ जगह अव्यवस्था भी साफ नजर आई। ढक्की में स्कूल का पहले दिन बच्चों को ठंडे फर्श पर दरी बिछाकर बैठाया गया। कई बच्चे बिना वर्दी के भी पहुंचे और कुछ को अभिभावकों और बड़े भाई-बहनों के साथ स्कूल में दाखिल हुए। इसके अतिरिक्त निजी स्कूलों में भी पहली और दूसरी के बच्चों की कक्षाएं शुरू हो गई है। मगर यहां भी बच्चों की संख्या कम ही रही।
हरोली तहसील में ढक्की गांव के प्राइमरी स्कूल की सभी कक्षाओं में सोमवार सुबह सैनिटाइजेशन की गई। इसके बाद बच्चों को कोविड एसओपी के तरह स्कूल में दाखिल किया गया। मगर बच्चों को ठंडे फर्श पर दरी बिछाकर बैठाया गया। इस दौरान शारीरिक दूरी का भी ख्याल नहीं रखा गया। हालांकि अधिकतर बच्चों ने मास्क लगाए हुए थे। स्कूल की प्राध्यापिका जसबीर कौर ने बताया कि उनके स्कूल में पहली कक्षा के कुल 40 विद्यार्थी हैं। पहले दिन इनमें 21 ही स्कूल पहुंचे। दूसरी कक्षा के 38 बच्चे हैं, जिनमें से 24 उपस्थित रहे। प्राथमिक स्कूल भदसाली में पहली कक्षा में तीन और दूसरी में केवल चार बच्चे ही स्कूल पहुंचे। हालांकि स्कूल प्रबंधन की व्यवस्था ठीक नजर आई।
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निजी स्कूलों की बात करें तो पंजावर गांव के सेंट मीरा पब्लिक स्कूल में भी पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों की संख्या कम रही। प्रधानाचार्य योगेश कुमार ने बताया कि स्कूल बस सेवा बंद होने के कारण अभी वही बच्चे स्कूल आ रहे है, जिनके परिजन उन्हें छोड़ने पहुंचे। जिले में पहली कक्षा में 4357 और दूसरी में 4499, तीसरी में 4912, चौथी कक्षा में 5013 और पांचवीं कक्षा में 5030 विद्यार्थी पढ़ते हैं। सोमवार को इनमें पहली कक्षा के 2480, दूसरी के 2705, तीसरी के 3612, चौथी के 3899, पांचवीं के 3979 बच्चे स्कूल आए।
प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक देवेंद्र चंदेल ने कहा कि स्कूलों में बच्चों को कोविड एसओपी को ध्यान में रखते हुए पढ़ाया जा रहा है। जिन स्कूलों में कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं, वहां स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के तहत एहतियातन कदम उठाए जा रहे हैं।
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इस दौरान दोनों कक्षाओं के कुल 8856 बच्चों में से 5185 (लगभग 60 फीसदी) बच्चे स्कूल पहुंचे। अधिकतर जगह अध्यापक बच्चों के आने से पहले ही स्कूल पहुंच गए थे और थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजेशन, सही तरीके से मास्क पहनाने और उचित शारीरिक दूरी के साथ विद्यार्थियों को कक्षाओं में भेजा गया। हालांकि कुछ जगह अव्यवस्था भी साफ नजर आई। ढक्की में स्कूल का पहले दिन बच्चों को ठंडे फर्श पर दरी बिछाकर बैठाया गया। कई बच्चे बिना वर्दी के भी पहुंचे और कुछ को अभिभावकों और बड़े भाई-बहनों के साथ स्कूल में दाखिल हुए। इसके अतिरिक्त निजी स्कूलों में भी पहली और दूसरी के बच्चों की कक्षाएं शुरू हो गई है। मगर यहां भी बच्चों की संख्या कम ही रही।
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हरोली तहसील में ढक्की गांव के प्राइमरी स्कूल की सभी कक्षाओं में सोमवार सुबह सैनिटाइजेशन की गई। इसके बाद बच्चों को कोविड एसओपी के तरह स्कूल में दाखिल किया गया। मगर बच्चों को ठंडे फर्श पर दरी बिछाकर बैठाया गया। इस दौरान शारीरिक दूरी का भी ख्याल नहीं रखा गया। हालांकि अधिकतर बच्चों ने मास्क लगाए हुए थे। स्कूल की प्राध्यापिका जसबीर कौर ने बताया कि उनके स्कूल में पहली कक्षा के कुल 40 विद्यार्थी हैं। पहले दिन इनमें 21 ही स्कूल पहुंचे। दूसरी कक्षा के 38 बच्चे हैं, जिनमें से 24 उपस्थित रहे। प्राथमिक स्कूल भदसाली में पहली कक्षा में तीन और दूसरी में केवल चार बच्चे ही स्कूल पहुंचे। हालांकि स्कूल प्रबंधन की व्यवस्था ठीक नजर आई।
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निजी स्कूलों की बात करें तो पंजावर गांव के सेंट मीरा पब्लिक स्कूल में भी पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों की संख्या कम रही। प्रधानाचार्य योगेश कुमार ने बताया कि स्कूल बस सेवा बंद होने के कारण अभी वही बच्चे स्कूल आ रहे है, जिनके परिजन उन्हें छोड़ने पहुंचे। जिले में पहली कक्षा में 4357 और दूसरी में 4499, तीसरी में 4912, चौथी कक्षा में 5013 और पांचवीं कक्षा में 5030 विद्यार्थी पढ़ते हैं। सोमवार को इनमें पहली कक्षा के 2480, दूसरी के 2705, तीसरी के 3612, चौथी के 3899, पांचवीं के 3979 बच्चे स्कूल आए।
प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक देवेंद्र चंदेल ने कहा कि स्कूलों में बच्चों को कोविड एसओपी को ध्यान में रखते हुए पढ़ाया जा रहा है। जिन स्कूलों में कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं, वहां स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के तहत एहतियातन कदम उठाए जा रहे हैं।