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मौसम के बाद आलू पर झुलसा की मार

Fri, 16 Nov 2018 10:15 PM IST
Updated Fri, 16 Nov 2018 10:15 PM IST
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मौसम के बाद आलू पर झुलसा की मार
अमर उजाला ब्यूरो
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ऊना। जिला की मुख्य नकदी आलू की फसल संकट के दौर से गुजर रही है। मौसम में बदलाव से आलू की फसल झुलसा रोग की चपेट में आ गई है। इससे किसानों की लाखों रुपये की फसल खराब होने का अंदेशा है।
रोग के चलते फसल की पैदावार में भारी अंतर आने की आशंका है। झुलसा रोग की दस्तक ने किसानों की नींद उड़ा दी है। बीमारी के चलते आलू उत्पादक किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। हालांकि किसान आलू फसल को दवाओं का स्प्रे भी कर रहे हैं। फिर भी बीमारी थमने का नाम नहीं ले रही है। आलू के पौधे झुलस कर जमीन पर गिर रहे हैं। फसल प्रभावित होते देख किसान फसलों को बचाने के प्रयास में जुट गए हैं। कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है।
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हरोली क्षेत्र के आलू उत्पादक सोहन लाल, रौनक लाल, पवन सैणी, जगतार सिंह, रामपाल, प्यारा लाल ने कहा कि मौसम में एकाएक बदलाव के चलते आलू की फसल झुलसा रोग की चपेट में आ गई है। जिससे उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले ही बाजार में फसल की लागत का मूल्य नहीं मिल रहा है। वहीं अब फसल झुलसा रोग लगने से उनकी दिक्कतें बढ़ गई हैं। फसल को बचाने को दवाओं पर स्प्रे भी किया जा रहा है, लेकिन बीमारी काबू नहीं आ रही है। इस वजह से आलू की फसल को हुए नुकसान की भरपाई करना मुश्किल है। गौरतलब है अत्यधिक बारिश की वजह से अधिकांश किसानों को दूसरी बार खेतों मेें बीज डालना पड़ा था।
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ऐसे करें रोकथाम
जिला कृषि उपनिदेशक सुरेश कपूर का कहना है कि ऐसा मौसम की खराबी की वजह से होता है। झुलसा का प्रकोप ऊपर की पत्तियों से शुरू होता है। शुरू में किनारे की पत्तियां काली होती हैं। तेजी से इसका प्रकोप पत्तियों और तने से होता हुआ कंद तक पहुंच जाता है। छिड़काव करने के लिए 15 लीटर पानी में 35 ग्राम मैंकोजेब, 20 ग्राम सल्फर और 20 ग्राम बोरान (20 फीसद) मिलाकर छिड़काव करें। इससे रोग के साथ ठंड से भी बचाव होगा। इसके साथ साथ किसान लिल्ट नामक दवाई का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके प्रयोग की सभी विधियां दवाई के पैकेट भी दर्शाई हैं। इनके प्रयोग से आलू की फसल के पौधों के कंद की साइज भी अच्छी आएगी। 15 दिन के अंतराल पर इसी मिश्रण के साथ दूसरा छिड़काव भी करें।

जिला में 10 करोड़ का उत्पादन
हर साल जिले में करीब 10 करोड़ रुपये के आलू का उत्पादन होता है। जो दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों की मंडियों में सप्लाई होता है। इस बार पहले मौसम की मार ने आलू फसल को नुकसान पहुंचाया। वहीं बची कसर आलू फसल को झुलसा रोग लगने पूरी हो गई। इससे आलू कारोबारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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