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सफेद हाथी साबित हो रही पशुशाला
Updated Wed, 01 Nov 2017 11:43 PM IST
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दलजीत शर्मा
लठियाणी (ऊना)।
क्षेत्र की मुच्छाली पंचायत के गांव डुमखर में लावारिस पशुओं के लिए 10 लाख की राशि से बनाई पशुशाला सफेद हाथी साबित हो रही है। 10 पंचायतों की सहयोग राशि से 10 लाख खर्च कर लावारिस पशुओं से किसानों को राहत दिलाने के लिए इसका निर्माण करवाया गया लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते पशुशाला में लावारिस पशुओं को पकड़ कर रखने के लिए कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए हैं। इसके चलते आज भी लावारिस पशु किसानों के खेतों और सड़कों में घूम रहे हैं।
इससे किसान वर्ग और आम लोग खासे परेशान हैं। लोगों में सरकार और प्रशासन के लिए रोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि उच्च न्यायालय के आरोपों के बाद भी आज दिन तक क्षेत्र के किसानों को लावारिस पशुओं से राहत मिलती नहीं दिख रही है। किसानों में राज कुमार, अनुज ठाकुर, ब्रह्मदास, किशन चंद, राम स्वरूप, प्रोमिला, जमना देवी, उषा रानी, पवना देवी, संतोष कुमार, रुकमणी देवी ने कहा कि पशुशाला बनने के बाद उनको कोई लाभ नहीं मिला है।
ऐसे में यह लाखों रुपये की बर्बादी है। पशुशाला बनने के बाद भी उनकी मक्की की फसल लावारिस पशुओं ने तहस-नहस कर दी है। अब गेहूं की बीजाई का वक्त आ गया है और उन्हें पिछली फसल की तरह इस बार भी फसल उजड़ती दिखाई दे रही है। इसके चलते लोगों ने खेती से मुंह फेरना भी शुरू कर दिया है। स्थानीय निवासी ब्रह्मदास ने कहा कि अगर 10 पंचायतों के सहयोग से 10 लाख रुपये खर्च कर बनाई गौशाला का उपयोग ही नहीं करना था तो इतनी बड़ी राशि खर्च करने की क्या जरूरत थी। इन पंचायतों के लोग काफी परेशान हैं जिनकी प्रशासन कोई सुध नहीं ले रहा है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से इस संबंध में शीघ्र उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की है। एडीएम ऊना सुखदेव सिंह ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। शीघ्र उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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लठियाणी (ऊना)।
क्षेत्र की मुच्छाली पंचायत के गांव डुमखर में लावारिस पशुओं के लिए 10 लाख की राशि से बनाई पशुशाला सफेद हाथी साबित हो रही है। 10 पंचायतों की सहयोग राशि से 10 लाख खर्च कर लावारिस पशुओं से किसानों को राहत दिलाने के लिए इसका निर्माण करवाया गया लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते पशुशाला में लावारिस पशुओं को पकड़ कर रखने के लिए कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए हैं। इसके चलते आज भी लावारिस पशु किसानों के खेतों और सड़कों में घूम रहे हैं।
इससे किसान वर्ग और आम लोग खासे परेशान हैं। लोगों में सरकार और प्रशासन के लिए रोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि उच्च न्यायालय के आरोपों के बाद भी आज दिन तक क्षेत्र के किसानों को लावारिस पशुओं से राहत मिलती नहीं दिख रही है। किसानों में राज कुमार, अनुज ठाकुर, ब्रह्मदास, किशन चंद, राम स्वरूप, प्रोमिला, जमना देवी, उषा रानी, पवना देवी, संतोष कुमार, रुकमणी देवी ने कहा कि पशुशाला बनने के बाद उनको कोई लाभ नहीं मिला है।
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ऐसे में यह लाखों रुपये की बर्बादी है। पशुशाला बनने के बाद भी उनकी मक्की की फसल लावारिस पशुओं ने तहस-नहस कर दी है। अब गेहूं की बीजाई का वक्त आ गया है और उन्हें पिछली फसल की तरह इस बार भी फसल उजड़ती दिखाई दे रही है। इसके चलते लोगों ने खेती से मुंह फेरना भी शुरू कर दिया है। स्थानीय निवासी ब्रह्मदास ने कहा कि अगर 10 पंचायतों के सहयोग से 10 लाख रुपये खर्च कर बनाई गौशाला का उपयोग ही नहीं करना था तो इतनी बड़ी राशि खर्च करने की क्या जरूरत थी। इन पंचायतों के लोग काफी परेशान हैं जिनकी प्रशासन कोई सुध नहीं ले रहा है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से इस संबंध में शीघ्र उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की है। एडीएम ऊना सुखदेव सिंह ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। शीघ्र उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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