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दूषित पानी की आपूर्ति के मामले में भरे गए 32 सैंपल
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ऊना सदर विस क्षेत्र के तहत आने वाले सनोली, मजारा, मलूकपुर, बीनेवाल व पूना ग्राम पंचायतों को केमिकल
- फोटो : Una
ऊना। सदर विस क्षेत्र के तहत आने वाले सनोली, मजारा, मलूकपुर, बीनेवाल व पूना ग्राम पंचायतों को केमिकल वाले पानी से राहत दिलाने के लिए प्रयास शुरू हो गए हैं। प्रदेश सरकार के निर्देश पर मंगलवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा जल शक्ति विभाग ने अलग-अलग स्थानों से 16-16 सैंपल भरे। दोनों विभागों ने 10-10 सैंपल पीने के पानी के स्रोतों और 6-6 सैंपल सिंचाई के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पानी के स्रोतों से भरे।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंजाब बॉर्डर पर स्थित पीएसीएल केमिकल की फैक्ट्री से रसायन युक्त पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे न सिर्फ उनके खेतों की फसलें खराब हो रही हैं, बल्कि पीने का पानी भी दूषित हो गया है, जिससे बीमारियां फैल रही हैं। उनका कहा है कि कंपनी अपशिष्ट पानी को बिना ट्रीट किए ही छोड़ रही है, जिससे समस्या खड़ी हो गई है। इसके कारण इन पांचों गांवों के लगभग 40 निजी व सरकारी ट्यूबवेल, हैंडपंप व कुएं खराब हो चुके हैं। यह मामला छठे वित्तायोग के अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सीएम के समक्ष उठाया था। इसके बाद ऊर्जा मंत्री ने मौके पर जाकर हालत देखे थे। अब इस मामले में सैंपल भरे गए हैं।
उधर, जल शक्ति विभाग के अधिशाषी अभियंता नरेश धीमान ने बताया कि विभाग ने 16 सैंपल भरे हैं, जिन्हें टेस्टिंग के लिए कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना, इको लैब चंडीगढ़ तथा ऊना स्थित विभाग की लैब को जांच के लिए भेजा गया है। उम्मीद है कि दस दिन के भीतर नतीजे आ जाएंगे, जिसके बाद रिपोर्ट सरकार को भेज दी जाएगी। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ प्रवीण धीमान ने कहा कि जल शक्ति विभाग के साथ मिलकर 16 सैंपल लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए विभाग की क्षेत्रीय लैब धर्मशाला को भेजा गया है। जल्द ही नतीजे आ जाएंगे। सैंपल लेने वाली टीम में जल शक्ति विभाग के जेई अशोक कुमार, प्रदूषण विभाग के जेई गुरप्रीत अटवाल व स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल रहे।
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ग्रामीणों का आरोप है कि पंजाब बॉर्डर पर स्थित पीएसीएल केमिकल की फैक्ट्री से रसायन युक्त पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे न सिर्फ उनके खेतों की फसलें खराब हो रही हैं, बल्कि पीने का पानी भी दूषित हो गया है, जिससे बीमारियां फैल रही हैं। उनका कहा है कि कंपनी अपशिष्ट पानी को बिना ट्रीट किए ही छोड़ रही है, जिससे समस्या खड़ी हो गई है। इसके कारण इन पांचों गांवों के लगभग 40 निजी व सरकारी ट्यूबवेल, हैंडपंप व कुएं खराब हो चुके हैं। यह मामला छठे वित्तायोग के अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सीएम के समक्ष उठाया था। इसके बाद ऊर्जा मंत्री ने मौके पर जाकर हालत देखे थे। अब इस मामले में सैंपल भरे गए हैं।
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उधर, जल शक्ति विभाग के अधिशाषी अभियंता नरेश धीमान ने बताया कि विभाग ने 16 सैंपल भरे हैं, जिन्हें टेस्टिंग के लिए कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना, इको लैब चंडीगढ़ तथा ऊना स्थित विभाग की लैब को जांच के लिए भेजा गया है। उम्मीद है कि दस दिन के भीतर नतीजे आ जाएंगे, जिसके बाद रिपोर्ट सरकार को भेज दी जाएगी। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ प्रवीण धीमान ने कहा कि जल शक्ति विभाग के साथ मिलकर 16 सैंपल लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए विभाग की क्षेत्रीय लैब धर्मशाला को भेजा गया है। जल्द ही नतीजे आ जाएंगे। सैंपल लेने वाली टीम में जल शक्ति विभाग के जेई अशोक कुमार, प्रदूषण विभाग के जेई गुरप्रीत अटवाल व स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल रहे।
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