{"_id":"5cbdf749bdec2209dc70eb83","slug":"171555953481-una-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जमा दो बोर्ड परीक्षा परिणाम में पिछड़े निजी स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जमा दो बोर्ड परीक्षा परिणाम में पिछड़े निजी स्कूल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
ऊना। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की जमा दो के वार्षिक परीक्षा परिणाम में निजी स्कूल सरकारी स्कूलों से पिछड़ गए। जिला ऊना से छह विद्यार्थियों ने प्रदेश के टॉप-10 विद्यार्थियों में स्थान प्राप्त किया है।
देखने वाली बात है कि प्रदेश में भी जिला ऊना के विद्यार्थियों ने सबसे ज्यादा मेरिट में स्थान प्राप्त कर लोहा मनवाया है। निजी स्कूलों की बात की जाए तो हर निजी स्कूलों के विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा परिणामों में सरकारी स्कूलों से 70 प्रतिशत आगे रहते थे। इस वर्ष ऐसा नहीं हो पाया। प्रदेश के टॉप-10 के विद्यार्थियों में से जिला ऊना में 6 विद्यार्थी शामिल हैं। इसमें से चार मेधावी विद्यार्थी सरकारी स्कूलों के हैं।
मात्र दो विद्यार्थी निजी स्कूलों के हैं। इन सरकारी स्कूलों में सलोह स्कूल, कन्या स्कूल ऊना, अंब स्कूल और दौलतपुर चौक स्कूल के दो विद्यार्थी शामिल हैं। उच्चतर शिक्षा उपनिदेशक बीआर धीमान ने बताया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ खेलों का स्तर ऊंचा उठा है। खेलों में हिस्सा लेने से विद्यार्थी तन-मन से स्वस्थ रहते हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षक मेहनती हैं जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद ही स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। इसलिए सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी कड़ी मेहनत कर निजी स्कूलों को पछाड़ रहे हैं।
विज्ञापन
मेहनत करने वालों को मिला फल
निजी और सरकारी स्कूलों के बोर्ड परीक्षा केंद्रों में नकल को रोकने तथा सुचारू रूप से बोर्ड परीक्षा करवाने के लिए सीसीटीवी ने भी एक अहम रोल अदा किया है। नकल के सहारे से वो विद्यार्थी आगे निकल जाते थे, जो पढ़ाई में कमजोर होते थे। इस सत्र में ऐसा नहीं हुआ। जिन विद्यार्थियों ने कड़ी मेहनत कर परीक्षाएं दी, उन्हीं विद्यार्थियों ने प्रदेश में टॉप किया है।
विज्ञापन
ऊना। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की जमा दो के वार्षिक परीक्षा परिणाम में निजी स्कूल सरकारी स्कूलों से पिछड़ गए। जिला ऊना से छह विद्यार्थियों ने प्रदेश के टॉप-10 विद्यार्थियों में स्थान प्राप्त किया है।
देखने वाली बात है कि प्रदेश में भी जिला ऊना के विद्यार्थियों ने सबसे ज्यादा मेरिट में स्थान प्राप्त कर लोहा मनवाया है। निजी स्कूलों की बात की जाए तो हर निजी स्कूलों के विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा परिणामों में सरकारी स्कूलों से 70 प्रतिशत आगे रहते थे। इस वर्ष ऐसा नहीं हो पाया। प्रदेश के टॉप-10 के विद्यार्थियों में से जिला ऊना में 6 विद्यार्थी शामिल हैं। इसमें से चार मेधावी विद्यार्थी सरकारी स्कूलों के हैं।
विज्ञापन
मात्र दो विद्यार्थी निजी स्कूलों के हैं। इन सरकारी स्कूलों में सलोह स्कूल, कन्या स्कूल ऊना, अंब स्कूल और दौलतपुर चौक स्कूल के दो विद्यार्थी शामिल हैं। उच्चतर शिक्षा उपनिदेशक बीआर धीमान ने बताया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ खेलों का स्तर ऊंचा उठा है। खेलों में हिस्सा लेने से विद्यार्थी तन-मन से स्वस्थ रहते हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षक मेहनती हैं जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद ही स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। इसलिए सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी कड़ी मेहनत कर निजी स्कूलों को पछाड़ रहे हैं।
विज्ञापन
मेहनत करने वालों को मिला फल
निजी और सरकारी स्कूलों के बोर्ड परीक्षा केंद्रों में नकल को रोकने तथा सुचारू रूप से बोर्ड परीक्षा करवाने के लिए सीसीटीवी ने भी एक अहम रोल अदा किया है। नकल के सहारे से वो विद्यार्थी आगे निकल जाते थे, जो पढ़ाई में कमजोर होते थे। इस सत्र में ऐसा नहीं हुआ। जिन विद्यार्थियों ने कड़ी मेहनत कर परीक्षाएं दी, उन्हीं विद्यार्थियों ने प्रदेश में टॉप किया है।