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खोखे में चल रहा मैहतपुर वन विभाग का नाका
Updated Thu, 29 Mar 2018 06:23 PM IST
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खोखे में चल रहा मैहतपुर वन विभाग का नाका
औपचारिकता के लिए बनी फोरेस्ट चेक पोस्ट, 12-12 घंटे ड्यूटी बजा रहे चेक पोस्ट के कर्मी
पाई-पाई को मोहताज हुए वन खंड अधिकारी, पांच महीनों से नहीं दी जा रही है सैलरी
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)।
दिन : वीरवार, समय तकरीबन सुबह 11 बजे, स्थान- औद्योगिक क्षेत्र मोड़ पर स्थित वन विभाग के स्थानीय नाका।
टीन से बना एक खोखानुमा कार्यालय जहां आसपास की गंदगी और सड़ांध भरा वातावरण में स्वस्थ आदमी बीमार हो जाए, ऐसे हालात में वन विभाग के कर्मचारी ड्यूटी बजाने को मजबूर हैं। नाके पर दो कर्मचारी एक वन खंड अधिकारी संदीप कुमार और दूसरा वनरक्षक सुरजीत कुमार तैनात हैं। दोनों ही कर्मी 12-12 घंटे ड्यूटी बजाने को मजबूर हैं। पहले चार कर्मचारी थे, अब दो ही कर्मी बचे हैं। रात्रि के समय अकेला कर्मचारी ही वाहनों की तलाशी भी करता है, दस्तावेजों की जांच भी। मौजूदा हालात में वन विभाग का स्थानीय नाका महज औपचारिकता भर के लिए है। हाईवे किनारे वन नाके के लिए जमीन तलाशी जा रही है लेकिन अभी तक जमीन नहीं मिली है। 12 घंटे तक ड्यूटी देने वाले इन कर्मियों को आपात स्थिति में शौचालय का कोई बंदोबस्त तक नहीं, पेयजल उपलब्ध नहीं है। बेशक स्वां प्रोजेक्ट में वन विभाग ने करोड़ों रुपये बहा दिए हैं, लेकिन विभागीय कर्मियों के लिए आवासी सुविधा का इंतजाम आज तक नहीं किया गया। ड्यूटी पर तैनात वन खंड अधिकारी संदीप कुमार की मानें तो उन्हें पिछले पांच महीनों से सैलरी तक नहीं दी जा रही जिससे वह पाई-पाई के मोहताज हो गए हैं। मकान का किराया, राशन का बिल, बच्चों की फीस, घर का खर्च उनकी सैलरी से चलता है। लेकिन पांच महीनों की सैलरी रोककर विभाग उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। सवाल उठता है कि वन विभाग के उच्चाधिकारी अपने मातहत कर्मियों के सूख रहे अरमानों को हरियाली देंगे।
नाके के लिए तलाशी जा रही जमीन : डीएफओ
डीएफओ यशूदीप सिंह ने कहा कि सड़क किनारे जमीन न मिलने की वजह से वन नाका एक खोखे में चलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमने डीसी ऊना को भी लिखा है, अपने स्तर पर भी प्रयास कर रहे हैं लेकिन जमीन की दिक्कत आ पेश आ रही है। विभाग में स्टाफ की कमी तो हर चैकपोस्ट पर आ रही है। कहा कि एक साल तक नई भर्तियां होंगी तो स्टाफ की दिक्कत कुछ हद तक कम हो सकेगी। सैलरी रोकने के बारे में डीएफओ ने कहा कि वह इसका पता करवाएंगे कि सैलरी क्यों नहीं दी जा रही है।
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खोखे में चल रहा मैहतपुर वन विभाग का नाका
औपचारिकता के लिए बनी फोरेस्ट चेक पोस्ट, 12-12 घंटे ड्यूटी बजा रहे चेक पोस्ट के कर्मी
पाई-पाई को मोहताज हुए वन खंड अधिकारी, पांच महीनों से नहीं दी जा रही है सैलरी
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)।
दिन : वीरवार, समय तकरीबन सुबह 11 बजे, स्थान- औद्योगिक क्षेत्र मोड़ पर स्थित वन विभाग के स्थानीय नाका।
टीन से बना एक खोखानुमा कार्यालय जहां आसपास की गंदगी और सड़ांध भरा वातावरण में स्वस्थ आदमी बीमार हो जाए, ऐसे हालात में वन विभाग के कर्मचारी ड्यूटी बजाने को मजबूर हैं। नाके पर दो कर्मचारी एक वन खंड अधिकारी संदीप कुमार और दूसरा वनरक्षक सुरजीत कुमार तैनात हैं। दोनों ही कर्मी 12-12 घंटे ड्यूटी बजाने को मजबूर हैं। पहले चार कर्मचारी थे, अब दो ही कर्मी बचे हैं। रात्रि के समय अकेला कर्मचारी ही वाहनों की तलाशी भी करता है, दस्तावेजों की जांच भी। मौजूदा हालात में वन विभाग का स्थानीय नाका महज औपचारिकता भर के लिए है। हाईवे किनारे वन नाके के लिए जमीन तलाशी जा रही है लेकिन अभी तक जमीन नहीं मिली है। 12 घंटे तक ड्यूटी देने वाले इन कर्मियों को आपात स्थिति में शौचालय का कोई बंदोबस्त तक नहीं, पेयजल उपलब्ध नहीं है। बेशक स्वां प्रोजेक्ट में वन विभाग ने करोड़ों रुपये बहा दिए हैं, लेकिन विभागीय कर्मियों के लिए आवासी सुविधा का इंतजाम आज तक नहीं किया गया। ड्यूटी पर तैनात वन खंड अधिकारी संदीप कुमार की मानें तो उन्हें पिछले पांच महीनों से सैलरी तक नहीं दी जा रही जिससे वह पाई-पाई के मोहताज हो गए हैं। मकान का किराया, राशन का बिल, बच्चों की फीस, घर का खर्च उनकी सैलरी से चलता है। लेकिन पांच महीनों की सैलरी रोककर विभाग उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। सवाल उठता है कि वन विभाग के उच्चाधिकारी अपने मातहत कर्मियों के सूख रहे अरमानों को हरियाली देंगे।
नाके के लिए तलाशी जा रही जमीन : डीएफओ
डीएफओ यशूदीप सिंह ने कहा कि सड़क किनारे जमीन न मिलने की वजह से वन नाका एक खोखे में चलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमने डीसी ऊना को भी लिखा है, अपने स्तर पर भी प्रयास कर रहे हैं लेकिन जमीन की दिक्कत आ पेश आ रही है। विभाग में स्टाफ की कमी तो हर चैकपोस्ट पर आ रही है। कहा कि एक साल तक नई भर्तियां होंगी तो स्टाफ की दिक्कत कुछ हद तक कम हो सकेगी। सैलरी रोकने के बारे में डीएफओ ने कहा कि वह इसका पता करवाएंगे कि सैलरी क्यों नहीं दी जा रही है।
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