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सेहत के लिए घातक है डीजे की ऊंची सांऊड
Updated Sun, 26 Nov 2017 10:32 PM IST
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एसडी शर्मा
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मैहतपुर (ऊना)।
विवाह समारोह, सेवानिवृत्ति, जन्मदिवस और अन्य मनोरंजन के मौके पर अकसर लोग डीजे पर नाच गाकर खुशी मनाते हैं। डीजे की बेहद तीव्र साउंड पर नाचने वाले बच्चों, नौजवानों और वृद्धों की सेहत के लिए यह साउंड कितनी घातक हो सकती है, इसका शायद ही हम अनुमान लगा पाते हैं। खतरनाक ध्वनि प्रदूषण से अंजान डीजे की धुन पर नाचते-थिरकते शायद यह नहीं जानते कि डीजे की तीव्र ध्वनि उनके बच्चों की सेहत पर क्या असर डालती है।
पिछले कुछ समय से वैवाहिक आयोजनों में डीजे का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 50 डेसिबल तक की ध्वनि सहन करने लायक होती है लेकिन डीजे की ध्वनि की तीव्रता 500 डेसिबल होती है। इससे अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि डीजे हमारे लिए किस कद्र खतरनाक है। डीजे की तीव्र ध्वनि से आदमी के शरीर की रूह तक कांप उठती है। ऐसे में हमारे बच्चों की सेहत पर इसका क्या और कितना प्रभाव पड़ता है, यह समझना कठिन नहीं है।
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पर्यावरण प्रदूषण के चिंतक प्रो. एचएस चट्ठा की मानें तो हमारे घर में दिन के समय अधिकतम 25 से 30 और रात्रि में 20-25 डेसिबल तक ध्वनि होनी चाहिए। वाहनों के प्रेशर हॉर्न और मशीनों की आवाज से ध्वनि प्रदूषण की तीव्रता बढ़ जाती है। ऐसे में डीजे की तीव्र ध्वनि के पास खड़े रहना सेहत के लिए भयानक खतरा है।
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क्या असर डालती है तीव्र ध्वनि : आर्य
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. केआर आर्य की मानें तो ऊंची ध्वनि मस्तिष्क में तनाव पैदा करती है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है, रक्तचाप बढ़ जाता है। तीव्र ध्वनि की वजह से प्रजनन क्षमता घट जाती है, गर्भपात की शिकायत बढ़ती है और मानसिक विकलांग बच्चे पैदा हो सकते हैं।
ऋृषि मुनि ढूंढते रहे शांत वातावरण : डोगरा
वशिष्ठ ज्योतिष सदन के अध्यक्ष पंडित शशिपाल डोगरा के मुताबिक भारतीय संस्कृति में शांति को सर्वोपरि इसीलिए माना जाता था। पूजापाठ के अंत में शांति पाठ किया जाता है। यह कैसी विडंबना है कि हम डीजे की धुन पर खुद की सेहत से ही खिलवाड़ करने में लगे हैं।
रात्रि 10 बजे के बाद डीजे पर पाबंदी : एसपी
पुलिस अधीक्षक ऊना संजीव गांधी के मुताबिक डीजे की ध्वनि बेहद खतरनाक है, इसके लिए समाज को खुद ही जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि रात्रि 10 बजे के बाद डीजे बजाने पर पूर्णतया पाबंदी लगाई है।