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लाइनों में श्रद्धालु धूप से ढुलसने को मजबूर
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अमर उजाला ब्यूरो
चिंतपूर्णी/भरवाईं (ऊना)। शक्तिपीठ चिंतपूर्णी में हर साल करोड़ों का चढ़ावा मां के दर चढ़ता है। आमदनी के मामले में चिंतपूर्णी मंदिर प्रदेश का सबसे अमीर मंदिर है। करोड़ों के चढ़ावे के बाद भी यहां श्रद्धालुओं को जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इस कारण यहां श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ती है।
चिंतपूर्णी मंदिर में सबसे बड़ी समस्या बाजार में कहीं भी स्थायी शौचालयों का न होना है। मुख्य पुलिस बैरियर से मंदिर लिफ्ट तक शौचालयों के न होने के कारण श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बाजार में धूप और बारिश से बचने के लिए मंदिर ट्रस्ट आज तक केनोपी शेड नहीं बनवा पाया है। इससे श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी लाइनें बाजार में पहुंचती हैं। कई बार श्रद्धालु बारिश में भीगते नजर आते हैं। गर्मियों के मौसम में धूप के समय जलते नजर आते हैं।
रविवार को लगभग 13 हजार से अधिक श्रद्धालु ने मां चिंतपूर्णी के दरबार में शीश नवाया। रविवार को तपती धूप में श्रद्धालु छोटे-छोटे बच्चों के साथ धूप में झुलते रहे इसके बावजूद मंदिर प्रशासन मूकदर्शक बना है। आज दिन तक मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं के लिए छायमान तक नहीं खरीद पाया है। अभी मंदिर लिफ्ट के पास मंदिर ट्रस्ट ने लाखों रुपये खर्च कर एक शेड का निर्माण करवाया है। लेकिन बाजार में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कहीं भी शेड नहीं है। स्थानीय निवासी निरंजन कालिया, सतीश कालिया, विकास ठाकुर, गगन शर्मा, गणेश, राहुल शर्मा ने मंदिर प्रशासन पर आरोप लगाया है कि मंदिर न्यास श्रद्धालुओं के चढ़ावे के पैसों को फिजूल खर्च कर रहा है। लोगों का कहना है कि लिफ्ट वाली साइड मंदिर न्यास ने पैसे खर्च कर वीआईपी लोगों के लिए शेड का निर्माण तो करवा दिया, लेकिन मुख्य बैरियर से लिफ्ट तक न तो आज तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शौचालय बनाए जा सके हैं। न ही केनोपी शेड बनाया जा सका है।
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इस कारण मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को धूप और बारिश में परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके अलावा मेन मंदिर रोड पर भी शौचालय की सुविधा न होने से यात्रियों को शौच के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में मंदिर के विस्तारीकरण का काम भी सिरे चढ़ता नजर नहीं आ रहा है।
क्या कहते हैं मंदिर अधिकारी
मंदिर अधिकारी जीवन कुमार का कहना है कि मंदिर ट्रस्ट को बाजार में शेड बनाने को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। अगर स्थानीय लोग और दुकानदार सहयोग करें तो बाजार में केनोपी शेड का निर्माण करवाया जा सकता है। चिंतपूर्णी मंदिर के एसडीओ आरके जसवाल ने बताया कि लिफ्ट वाली साइड ट्रस्ट ने जो शेड बनवाया है उसकी एक तरफ जगह मंदिर ट्रस्ट की थी जबकि दूसरी तरफ शेड के निर्माण में अड़चन के चलते ट्रस्ट को कोर्ट केस लड़ना पड़ा।
उन्होंने कहा कि बाजार में बिजली के तार बहुत ज्यादा हैं। स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर रोड पर भी शेड बनाया जा सकता है। एसडीओ ने बताया कि मंदिर रोड पर स्थायी शौचालयों के लिए जमीन की कमी है लेकिन माधो टिल्ले के पास जमीन को लेकर भूमि मालिकों से बातचीत चली हुई है।
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चिंतपूर्णी/भरवाईं (ऊना)। शक्तिपीठ चिंतपूर्णी में हर साल करोड़ों का चढ़ावा मां के दर चढ़ता है। आमदनी के मामले में चिंतपूर्णी मंदिर प्रदेश का सबसे अमीर मंदिर है। करोड़ों के चढ़ावे के बाद भी यहां श्रद्धालुओं को जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इस कारण यहां श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ती है।
चिंतपूर्णी मंदिर में सबसे बड़ी समस्या बाजार में कहीं भी स्थायी शौचालयों का न होना है। मुख्य पुलिस बैरियर से मंदिर लिफ्ट तक शौचालयों के न होने के कारण श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बाजार में धूप और बारिश से बचने के लिए मंदिर ट्रस्ट आज तक केनोपी शेड नहीं बनवा पाया है। इससे श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी लाइनें बाजार में पहुंचती हैं। कई बार श्रद्धालु बारिश में भीगते नजर आते हैं। गर्मियों के मौसम में धूप के समय जलते नजर आते हैं।
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रविवार को लगभग 13 हजार से अधिक श्रद्धालु ने मां चिंतपूर्णी के दरबार में शीश नवाया। रविवार को तपती धूप में श्रद्धालु छोटे-छोटे बच्चों के साथ धूप में झुलते रहे इसके बावजूद मंदिर प्रशासन मूकदर्शक बना है। आज दिन तक मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं के लिए छायमान तक नहीं खरीद पाया है। अभी मंदिर लिफ्ट के पास मंदिर ट्रस्ट ने लाखों रुपये खर्च कर एक शेड का निर्माण करवाया है। लेकिन बाजार में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कहीं भी शेड नहीं है। स्थानीय निवासी निरंजन कालिया, सतीश कालिया, विकास ठाकुर, गगन शर्मा, गणेश, राहुल शर्मा ने मंदिर प्रशासन पर आरोप लगाया है कि मंदिर न्यास श्रद्धालुओं के चढ़ावे के पैसों को फिजूल खर्च कर रहा है। लोगों का कहना है कि लिफ्ट वाली साइड मंदिर न्यास ने पैसे खर्च कर वीआईपी लोगों के लिए शेड का निर्माण तो करवा दिया, लेकिन मुख्य बैरियर से लिफ्ट तक न तो आज तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शौचालय बनाए जा सके हैं। न ही केनोपी शेड बनाया जा सका है।
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इस कारण मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को धूप और बारिश में परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके अलावा मेन मंदिर रोड पर भी शौचालय की सुविधा न होने से यात्रियों को शौच के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में मंदिर के विस्तारीकरण का काम भी सिरे चढ़ता नजर नहीं आ रहा है।
क्या कहते हैं मंदिर अधिकारी
मंदिर अधिकारी जीवन कुमार का कहना है कि मंदिर ट्रस्ट को बाजार में शेड बनाने को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। अगर स्थानीय लोग और दुकानदार सहयोग करें तो बाजार में केनोपी शेड का निर्माण करवाया जा सकता है। चिंतपूर्णी मंदिर के एसडीओ आरके जसवाल ने बताया कि लिफ्ट वाली साइड ट्रस्ट ने जो शेड बनवाया है उसकी एक तरफ जगह मंदिर ट्रस्ट की थी जबकि दूसरी तरफ शेड के निर्माण में अड़चन के चलते ट्रस्ट को कोर्ट केस लड़ना पड़ा।
उन्होंने कहा कि बाजार में बिजली के तार बहुत ज्यादा हैं। स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर रोड पर भी शेड बनाया जा सकता है। एसडीओ ने बताया कि मंदिर रोड पर स्थायी शौचालयों के लिए जमीन की कमी है लेकिन माधो टिल्ले के पास जमीन को लेकर भूमि मालिकों से बातचीत चली हुई है।