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दो चरणों में हो गर्मियों की छुट्टियां : संघ
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उजाला ब्यूरो
ऊना। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ऊना इकाई ने गर्मियों की छुट्टियां दो चरणों में करने की मांग की। इकाई के अध्यक्ष संजीव पराशर, महासचिव शशि पाल सैनी ने शिक्षा विभाग और सरकार से मांग संयुक्त बयान जारी कर यह मांग की।
उन्होंने कहा कि जिले की भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए होने वाली छुट्टियों को या तो जून में किया जाए या दो चरणों में (जिसमें पहला चरण 15 दिन जून माह में जब भयंकर गर्मी पड़ती है तथा बाकी शेष छुट्टियां अगस्त में जब बरसात अत्यधिक होती है) की जाए। या फिर जिला उपायुक्त और शिक्षा उपनिदेशक को मौसम को ध्यान में रखते हुए छुट्टियों को करने की शक्तियां दी जाएं। उन्होंने कहा कि हर जिले की भौगोलिक परिस्थितियां और जरूरतें अलग-अलग हैं। अकसर देखा गया है कि जून में अत्यधिक गर्मी के कारण टीचिंग टाइमिंग कम कर दिए जाते हैं। इससे पढ़ाई बाधित होती है। ऐसा ही हाल पहाड़ी जिलों में भी होता है जब या तो अधिक बारिश होती है या फिर अधिक बर्फवारी।
इन आपातकालीन स्थितियों में ही स्कूलों में छुट्टियां करनी पड़ती हैं। इसलिए हर जिले के उपायुक्त या शिक्षा निदेशक को शिक्षा निदेशक से मंत्रणा करके इन छुट्टियों को विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए करनी चाहिए। इससे हर जिले के टीचिंग डेज भी वहीं रहेंगे और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बाधित नहीं होगी। इस मौके पर स्कूल प्रवक्ता संघ के पदाधिकारी जिनमें विकास रतन, रमन विज, रामकुमार, संजीव कुमार, राकेश मल्होत्रा, संदीप सैनी, राकेश सैनी, राजेश बंसल आदि उपस्थित रहे।
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ऊना। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ऊना इकाई ने गर्मियों की छुट्टियां दो चरणों में करने की मांग की। इकाई के अध्यक्ष संजीव पराशर, महासचिव शशि पाल सैनी ने शिक्षा विभाग और सरकार से मांग संयुक्त बयान जारी कर यह मांग की।
उन्होंने कहा कि जिले की भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए होने वाली छुट्टियों को या तो जून में किया जाए या दो चरणों में (जिसमें पहला चरण 15 दिन जून माह में जब भयंकर गर्मी पड़ती है तथा बाकी शेष छुट्टियां अगस्त में जब बरसात अत्यधिक होती है) की जाए। या फिर जिला उपायुक्त और शिक्षा उपनिदेशक को मौसम को ध्यान में रखते हुए छुट्टियों को करने की शक्तियां दी जाएं। उन्होंने कहा कि हर जिले की भौगोलिक परिस्थितियां और जरूरतें अलग-अलग हैं। अकसर देखा गया है कि जून में अत्यधिक गर्मी के कारण टीचिंग टाइमिंग कम कर दिए जाते हैं। इससे पढ़ाई बाधित होती है। ऐसा ही हाल पहाड़ी जिलों में भी होता है जब या तो अधिक बारिश होती है या फिर अधिक बर्फवारी।
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इन आपातकालीन स्थितियों में ही स्कूलों में छुट्टियां करनी पड़ती हैं। इसलिए हर जिले के उपायुक्त या शिक्षा निदेशक को शिक्षा निदेशक से मंत्रणा करके इन छुट्टियों को विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए करनी चाहिए। इससे हर जिले के टीचिंग डेज भी वहीं रहेंगे और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बाधित नहीं होगी। इस मौके पर स्कूल प्रवक्ता संघ के पदाधिकारी जिनमें विकास रतन, रमन विज, रामकुमार, संजीव कुमार, राकेश मल्होत्रा, संदीप सैनी, राकेश सैनी, राजेश बंसल आदि उपस्थित रहे।
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